भाकपा–माले की बैठक: बिहार के ज्वलंत मुद्दों पर मंथन

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Ajit Kumar

बिहार
भाकपा–माले की राज्य स्थाई समिति की बैठक पटना में आयोजित

बेटी बचाओ–न्याय यात्रा और श्रम कोड हड़ताल पर ऐलान

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 1 फरवरी 2026 — आज भाकपा–माले की राज्य स्थाई समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक पार्टी के राज्य कार्यालय में आयोजित की गई. यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब बिहार सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े गंभीर संकटों से गुजर रहा है.बैठक में पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, वरिष्ठ नेता का. स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव का. कुणाल, का. धीरेंद्र झा, का. अमर, मीना तिवारी, शशि यादव, वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, मंजू प्रकाश, के.डी. यादव सहित राज्य नेतृत्व के कई प्रमुख साथी शामिल हुए.

बैठक में बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, नीट छात्रा कांड, यूजीसी गाइडलाइन, मनरेगा की बदहाली, दलित-गरीब बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई, भूमि लूट और चार श्रम कोड जैसे ज्वलंत मुद्दों पर गहन और विस्तार से चर्चा किया गया.

नीट छात्रा कांड और बेटी बचाओ–न्याय आंदोलन

बैठक में शंभू और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े बलात्कार-हत्या कांड पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई.भाकपा–माले ने साफ कहा कि यह मामला केवल एक छात्रा या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय से जुड़ा प्रश्न है.

पार्टी ने मांग किया कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज के निर्देशन में, तय समय सीमा के भीतर कराई जाए ताकि दोषियों को बचाने की किसी भी कोशिश पर रोक लगे. इसी कड़ी में 3 फरवरी से मगध रेंज में शुरू होने वाली बेटी बचाओ–न्याय यात्रा और 10 फरवरी को विधानसभा के समक्ष प्रस्तावित न्याय मार्च की तैयारियों की समीक्षा की गई.

भाकपा–माले ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन निर्णायक अंजाम तक पहुंचाए बिना नहीं रुकेगा और इसमें व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा.

यूजीसी गाइडलाइन, कैंपसों में जातिगत भेदभाव और रोहित एक्ट की मांग

बैठक में विश्वविद्यालय परिसरों में जारी जातिगत भेदभाव के खिलाफ आंदोलनों और यूजीसी की गाइडलाइन पर भी गंभीर चर्चा हुई. पार्टी ने कहा कि रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे मामले इस सच्चाई के गवाह हैं कि संस्थागत जातिगत भेदभाव आज भी देश के शिक्षण संस्थानों में जान ले रहा है.

इसके बावजूद न तो अदालतों ने इन मौतों को एक गंभीर सामाजिक संकट के रूप में स्वीकार किया और न ही इन्हें संस्थागत हत्याओं के रूप में चिन्हित किया गया.भाकपा–माले ने कहा कि जब यूजीसी ने,भले ही अपर्याप्त और कमजोर ही सही, कैंपसों में भेदभाव रोकने के लिए कुछ नियम बनाए, तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें जातिविहीन समाज के तर्क के नाम पर प्रतिगामी ठहराया जाना, दरअसल देश में जाति की गहरी और जीवित संरचनाओं को उजागर करता है.

पार्टी ने एक बार फिर रोहित एक्ट की तर्ज पर मजबूत, बाध्यकारी और प्रभावी कानून बनाने की मांग दोहराई ताकि कैंपसों में भेदभाव के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित हो सके.

मनरेगा पर हमला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकट

बैठक में मनरेगा को कमजोर किए जाने की प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता जताई गई। पार्टी ने कहा कि मनरेगा को लगभग समाप्त करने की कोशिश लंबे समय से चल रही थी, जिसे अब और तेज कर दिया गया है. तथाकथित ग्रामजी कानून को संवैधानिक रोजगार गारंटी को कमजोर करने वाला बताते हुए कहा गया कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और पहले से जर्जर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

भाकपा–माले ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि गरीबों के लिए सम्मानजनक जीवन का आधार है और इसे कमजोर करना सीधे-सीधे गरीब विरोधी नीति है.

बुलडोजर कार्रवाई, भूमि लूट और विस्थापन का सवाल

बैठक में दलित-गरीब बस्तियों पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई.पार्टी ने मांग की कि बुलडोजर कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए, सभी अनधिकृत बसावटों का समग्र सर्वे कराया जाए और भूमिहीन दलित-वंचित परिवारों को आवासीय जमीन का अधिकार दिया जाए.

भाकपा–माले ने आरोप लगाया कि बिहार में विभिन्न रास्तों से भूमि लूट की एक सुनियोजित साजिश चल रही है, जिसमें कॉरपोरेट हितों के लिए गरीबों को उजाड़ा जा रहा है. इन सवालों पर 2 फरवरी 2026 को पटना में राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य भी शामिल होंगे.

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चार श्रम कोड के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल

बैठक में 12 फरवरी को चार श्रम कोड के खिलाफ प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पुरजोर समर्थन किया गया.पार्टी ने कहा कि ये श्रम कोड मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं और इन्हें वापस लेने के लिए व्यापक, एकजुट और निर्णायक संघर्ष की जरूरत है.

लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का आह्वान

बैठक के अंत में भाकपा–माले ने जनता से अपील की कि वे बेटी बचाओ–न्याय आंदोलन, श्रमिक संघर्ष, भूमि अधिकार और सामाजिक न्याय की लड़ाइयों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें. पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए संगठित जनआंदोलन ही एकमात्र रास्ता है.

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