16 वर्षीय महादलित छात्रा की जलाकर हत्या, माले ने की जांच

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Ajit Kumar

बिहार
16 वर्षीय महादलित छात्रा की जलाकर हत्या, माले ने की जांच

चुनाव बाद महिलाओं पर हिंसा की बाढ़, सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,24 जनवरी 2026 — पटना जिले के संपतचक थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय महादलित छात्रा को जिंदा जलाकर मार दिए जाने की दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. इस जघन्य हत्या की भाकपा (माले) की छह सदस्यीय जांच टीम ने स्थल पर जाकर विस्तृत जांच की और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली.

भाकपा (माले) ने इस मामले में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच, स्पीडी ट्रायल और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है. पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा.

पेट्रोल छिड़क कर जिंदा जलाया गया, इलाज के दौरान मौत

मिली जानकारी के अनुसार, 17 जनवरी 2026 की शाम करीब 5 बजे पीड़ित किशोरी अपने गांव अब्दुल्लाहचक से बगल के गांव बैरिया स्थित ममानी के घर जा रही थी. रास्ते में बैरिया गांव के पास उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई. गंभीर रूप से झुलसी किशोरी को पहले स्थानीय अस्पताल और फिर पटना के एनएमसीएच में भर्ती कराया गया.

छह दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.पीड़िता दसवीं कक्षा की परीक्षा देने वाली थी और परिवार उसकी पढ़ाई को लेकर बेहद आशान्वित था.

माले की जांच टीम ने क्या पाया

भाकपा (माले) की जांच टीम ने पीड़िता के माता-पिता, चाचा, नाना और ममानी से अलग-अलग मुलाकात कर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश की.जांच के दौरान सामने आया कि,

आरोपी एक स्थानीय वार्ड पार्षद का पुत्र है.

प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण के कारण गिरफ्तारी में जानबूझकर देरी की गई.

इलाज, जांच और कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हुई.

पीड़ित परिवार को धमकियां दी गईं और मामला मैनेज करने का दबाव बनाया गया.

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के छह दिन बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सका है और किशोरी की मौत के बाद आरोपी ने खुद जाकर आत्मसमर्पण किया, जिसे प्रशासनिक विफलता का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है.

इलाज में लापरवाही का आरोप, अलग जांच की मांग

माले ने एनएमसीएच, पटना में इलाज के दौरान बरती गई लापरवाही को भी किशोरी की मौत का कारण बताया है. पार्टी का कहना है कि यदि समय पर और गंभीरता से इलाज किया जाता तो शायद किशोरी की जान बचाई जा सकती थी.

इसलिए पार्टी ने चिकित्सकीय लापरवाही की अलग से जांच कराने की भी मांग की है.

डबल इंजन सरकार में महिलाओं पर हिंसा बेलगाम — कामरेड अमर

भाकपा (माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य सह जिला सचिव कामरेड अमर ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ,

डबल इंजन की एनडीए सरकार में छात्राओं, लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ हत्या, उत्पीड़न और बलात्कार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है. चुनाव के बाद महिलाओं पर हिंसा की यह अभूतपूर्व बाढ़ सीधे तौर पर सरकार की विफलता को उजागर करती है.

उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की चुप्पी शर्मनाक है और यह दर्शाती है कि सत्ता के संरक्षण में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं.

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माले की प्रमुख मांगें

भाकपा (माले) ने सरकार और प्रशासन से निम्नलिखित मांगें रखी हैं,

पीड़ित परिवार को न्याय की पूर्ण गारंटी दी जाए.

परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.

दोषियों को स्पीडी ट्रायल के जरिए कड़ी सजा दी जाए.

पार्टी ने साफ कहा है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो राज्यव्यापी जन आंदोलन किया जाएगा.

जांच टीम में शामिल रहे ये नेता और कार्यकर्ता

इस जांच टीम में शामिल थे,

कामरेड कमलेश कुमार (राज्य कमेटी सदस्य सह जिला कार्यालय सचिव)

सत्यानंद पासवान (संपतचक प्रखंड सचिव)

शैलेंद्र यादव (फतुहा प्रखंड सचिव)

सुरेश चंद्र ठाकुर,रासमणि देवी, मुन्नी देवी

बड़ा सवाल: कब सुरक्षित होंगी बिहार की बेटियां?

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि बिहार में सामाजिक न्याय, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की गहरी विफलता का प्रतीक बन चुकी है.सवाल यह है कि क्या प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी? और क्या पीड़ित परिवार को सचमुच न्याय मिलेगा?

जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक लोकतंत्र और न्याय दोनों पर सवाल उठते रहेंगे.

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