हेमंत सोरेन–यूके वार्ता: जिम्मेदार खनन और विरासत संरक्षण पर सहयोग

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Ajit Kumar

झारखण्डभारत
हेमंत सोरेन–यूके वार्ता: जिम्मेदार खनन और विरासत संरक्षण पर सहयोग

क्रिटिकल मिनरल्स, ESG फ्रेमवर्क और झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर पर बनी सहमति

तीसरा पक्ष ब्यूरो रांची/दिल्ली,22 जनवरी 2026 झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता हेमंत सोरेन ने एक अहम अंतरराष्ट्रीय पहल की ओर कदम बढ़ाते हुए ब्रिटेन के मंत्री मल्होत्रा के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत बातचीत की. यह चर्चा केवल खनन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन, जिम्मेदार खनन, महत्वपूर्ण खनिज , स्वच्छ तकनीक, ESG फ्रेमवर्क और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे बहुआयामी मुद्देभी शामिल रहा.

हेमंत सोरेन ने इस बातचीत की जानकारी अपने आधिकारिक X (पूर्व में Twitter) अकाउंट के माध्यम से साझा की, जो झारखंड के भविष्य की दिशा और वैश्विक सहयोग की स्पष्ट झलक पेश करती है.

जिम्मेदार खनन पर अंतरराष्ट्रीय सहमति

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में खनन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है. इसी सोच के तहत झारखंड और यूके के बीच Responsible Mining को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.

इस चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि खनन कार्यों में,

पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना

स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा

प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग

जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्य के लिए यह दृष्टिकोण दीर्घकालिक विकास की नींव रख सकता है.

क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन पर फोकस

बैठक का एक अहम पहलू Critical Minerals रहा.ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं.दोनों पक्षों ने यूके–झारखंड क्रिटिकल मिनरल्स ट्रैक विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया.

इस ट्रैक का उद्देश्य होगा,

महत्वपूर्ण खनिजों की पारदर्शी आपूर्ति

लचीली और सुरक्षित सप्लाई चेन

वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन

इससे न केवल झारखंड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी, बल्कि भारत की रणनीतिक खनिज सुरक्षा भी मजबूत होगी.

ESG फ्रेमवर्क और स्वच्छ तकनीक पर सहमति

चर्चा के दौरान ESG (Environmental, Social and Governance) फ्रेमवर्क को लेकर भी गंभीर विमर्श हुआ. हेमंत सोरेन ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था वही होगी जो,

पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो

सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दे

शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करे

यूके के साथ सहयोग के माध्यम से झारखंड में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की योजना पर भी बात हुई. इससे प्रदूषण कम होगा और हरित विकास को गति मिलेगी.

जलवायु परिवर्तन से निपटने की साझा रणनीति

आज जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.इस संदर्भ में हेमंत सोरेन और मंत्री मल्होत्रा के बीच Climate Action को लेकर साझा रणनीति पर चर्चा हुई.

इसमें शामिल हैं,

कार्बन उत्सर्जन में कमी

नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार

पर्यावरण-अनुकूल खनन मॉडल

यह सहयोग झारखंड को जलवायु-संवेदनशील विकास मॉडल अपनाने में मदद करेगा.

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर ऐतिहासिक पहल

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर ऐतिहासिक पहल

इस बातचीत का एक विशेष और अनोखा पहलू रहा झारखंड के महापाषाण (Megaliths) और अखंड स्तंभों के संरक्षण पर सहयोग.मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि झारखंड की प्राचीन विरासत विश्व स्तर पर महत्व रखती है.

दोनों पक्षों ने,

स्टोनहेंज (Stonehenge) जैसी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं

वैज्ञानिक संरक्षण तकनीकों

पर्यटन और विरासत विकास

से प्रेरणा लेते हुए संयुक्त सहयोग पर चर्चा की. यह पहल झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित कर सकती है.

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झारखंड आने का न्योता, यूके से सकारात्मक संकेत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर मंत्री मल्होत्रा को झारखंड आने का औपचारिक निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। यह दौरा भविष्य में,

निवेश, तकनीकी सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, के नए रास्ते खोल सकता है.

झारखंड के विकास की नई दिशा

हेमंत सोरेन की यह पहल दर्शाती है कि झारखंड अब केवल एक खनिज राज्य नहीं, बल्कि सतत विकास, वैश्विक सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण का मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

यह संवाद, राज्य की अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत करता है.

युवाओं के लिए नए अवसर खोलता है.

पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है.

निष्कर्ष

हेमंत सोरेन और यूके के मंत्री मल्होत्रा के बीच हुई यह बातचीत झारखंड के लिए आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से मील का पत्थर साबित हो सकती है.जिम्मेदार खनन से लेकर जलवायु परिवर्तन और विरासत संरक्षण तक, यह पहल झारखंड को वैश्विक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का मजबूत प्रयास है.

आने वाले समय में यह सहयोग न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक नया विकास मॉडल प्रस्तुत कर सकता है.

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