कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर संजय सरावगी ने परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर बोला हमला
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 25 जनवरी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर बिहार की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गया है. इस निर्णय को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजद पर तीखा हमला बोला है. बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस फैसले को राजद के राजनीतिक ताबूत में अंतिम कील करार दिया है.
तेजस्वी यादव की उपलब्धि सिर्फ भ्रष्टाचार : संजय सरावगी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तेजस्वी यादव के अब तक के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन को अगर निष्पक्ष रूप से देखा जाए, तो उनकी उपलब्धि केवल भ्रष्टाचार के आरोपों तक ही सीमित रही है. उन्होंने कहा कि पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियों और राजनीति तक, हर मोर्चे पर तेजस्वी यादव असफल साबित हुए हैं.
संजय सरावगी ने कहा,असफलता की पराकाष्ठा पर पहुंच चुके तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाना राजद नेतृत्व की मजबूरी को दर्शाता है. यह फैसला योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पारिवारिक दबाव और परिवारवाद की राजनीति का परिणाम है.
परिवारवाद पर सीधा हमला
भाजपा अध्यक्ष ने राजद पर परिवारवाद को लेकर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी में कई वरिष्ठ, अनुभवी और दिग्गज नेता मौजूद हैं, जिनका राजनीतिक अनुभव दशकों का है. इसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर तेजस्वी यादव को आगे बढ़ाया जाना यह साबित करता है कि राजद में लोकतांत्रिक परंपराएं केवल दिखावे तक सीमित हैं.
उन्होंने विशेष रूप से अब्दुल बारी सिद्दीकी, जगदानन्द सिंह और उदय नारायण चौधरी जैसे वरिष्ठ नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि,
राजद में ऐसे नेता हैं जिन्होंने कठिन समय में पार्टी को संभाला, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष जैसे अहम पद पर परिवार के सदस्य को बैठाकर पार्टी ने खुद यह स्वीकार कर लिया है कि वहां नेतृत्व का रास्ता केवल एक ही परिवार से होकर गुजरता है.
पार्टी के अंदर ही विरोध, भविष्य के लिए अशुभ संकेत
संजय सरावगी ने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाना राजद का आंतरिक मामला है, लेकिन जिस तरह इस फैसले के खिलाफ पार्टी और परिवार के भीतर से ही विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं, वह राजद के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है.
उन्होंने कहा, जब किसी पार्टी के निर्णयों का विरोध उसी के अपने लोग करने लगें, तो यह साफ संकेत होता है कि संगठन अंदर से कमजोर हो चुका है. राजद आज उसी दौर से गुजर रही है.
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राजद के भविष्य पर सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि तेजस्वी यादव को आगे बढ़ाने की राजनीति ने राजद को जनता से और दूर कर दिया है. उनके अनुसार, बिहार की जनता अब परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति से ऊपर उठ चुकी है और विकास, सुशासन तथा पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है.
उन्होंने कहा कि, राजद अब समाप्ति की ओर बढ़ चुकी है. पार्टी के पास न कोई नई सोच है, न कोई वैकल्पिक नेतृत्व और न ही जनता से जुड़ने का विज़न. तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना इस राजनीतिक सच्चाई की अंतिम पुष्टि है.
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी
तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है. एक ओर राजद इस फैसले को संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की तैयारी बता रही है, वहीं भाजपा इसे पार्टी के भीतर बढ़ते परिवारवाद और नेतृत्व संकट का प्रतीक मान रही है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में बिहार की राजनीति को और अधिक धारदार बना सकता है. आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का अहम केंद्र बनने की संभावना रखता है.
निष्कर्ष
तेजस्वी यादव की नई भूमिका को लेकर उठे सवाल सिर्फ विपक्ष की बयानबाज़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राजद की आंतरिक राजनीति, नेतृत्व संरचना और भविष्य की दिशा पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता हैं. भाजपा का हमला जितना तीखा है, उतनी ही चुनौती राजद के लिए अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता और संगठनात्मक एकता को बनाए रखने की होगी.

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