महंगाई से ग्रामीण महिलाएं और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित: कांग्रेस
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,29 जनवरी — देश में सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ और असामान्य वृद्धि को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज़ हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया हैं.कांग्रेस के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल से जारी बयान में कहा गया है कि पिछले 13 महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने विशेष रूप से ग्रामीण भारत, महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है.
13 महीनों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का दावा
कांग्रेस के अनुसार, बीते 13 महीनों में चांदी की कीमतों में लगभग 306 प्रतिशत और सोने की कीमतों में 111 प्रतिशत तक की वृद्धि देखा गया है.पार्टी का कहना है कि यह बढ़ोतरी सामान्य महंगाई से कहीं अधिक है और इसका सीधा असर आम लोगों की बचत और भविष्य की योजनाओं पर पड़ा है.
भारत जैसे देश में सोना और चांदी केवल निवेश का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं, विशेषकर विवाह और महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है. ऐसे में कीमतों का इस तरह बेलगाम होना, कई परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.
ग्रामीण भारत और महिलाओं पर सीधा असर
कांग्रेस ने अपने बयान में विशेष रूप से ग्रामीण भारत की स्थिति पर ध्यान दिलाया है.पार्टी का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी सोना-चांदी महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य का प्रतीक माना जाता है.
कई परिवार वर्षों तक छोटी-छोटी बचत करके बेटियों के विवाह के लिए न्यूनतम आभूषण जुटाते हैं.लेकिन मौजूदा कीमतों के चलते किसान, श्रमिक और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवार अब बुनियादी आभूषण भी खरीदने में असमर्थ होते जा रहा हैं. इससे न केवल आर्थिक दबाव बढ़ा है, बल्कि सामाजिक तनाव भी गहराता जा रहा है.
सरकार की नीतियों पर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने सोने-चांदी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं. पार्टी के अनुसार,
सोने पर लगाया गया भारी GST, उच्च आयात शुल्क, और जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई की कमी,
इन सभी कारणों से कीमतें लगातार ऊपर जा रहा हैं. कांग्रेस का कहना है कि एक तरफ सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करता है, वहीं दूसरी ओर ऐसी नीतियां लागू हैं जो महिलाओं की वर्षों की बचत को मूल्यहीन बना रहा हैं.
जमाखोरी और बाजार नियंत्रण का मुद्दा
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बढ़ती कीमतों का लाभ जमाखोरों और बड़े कारोबारियों को मिल रहा है, जबकि आम उपभोक्ता नुकसान झेल रहा है.कांग्रेस का कहना है कि यदि बाजार में पारदर्शिता और सख्त निगरानी होती, तो कीमतों में इस तरह की तेज़ बढ़ोतरी को रोका जा सकता था.
बयान में यह भी कहा गया है कि सरकार की निष्क्रियता के कारण महिलाओं को सजा मिल रही है, जबकि जमाखोरों को अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त हो रहा है.
छोटे सुनार और रोजगार पर असर
सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का असर केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है.छोटे ज्वैलर्स और कारीगर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. मांग में गिरावट के कारण छोटे कारोबारियों को रोज़गार के संकट का सामना करना पड़ रहा है.
कांग्रेस के अनुसार, यदि यही स्थिति बनी रही तो पारंपरिक आभूषण उद्योग, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है, गंभीर संकट में आ सकता है.
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राज्यसभा में उठी मांग
राज्यसभा सांसद नीरज डांगी द्वारा इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने का भी उल्लेख किया गया है. कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि देशहित में सोने और चांदी की कीमतों पर हस्तक्षेप किया जाए. पार्टी का कहना है कि GST में कटौती, आयात शुल्क की समीक्षा और जमाखोरी के खिलाफ कठोर कदम उठाकर ही आम जनता को राहत दी जा सकती है.
निष्कर्ष
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित मामला नहीं हैं, बल्कि इसका गहरा सामाजिक प्रभाव भी पड़ रहा है। ग्रामीण भारत, महिलाएं, मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारी , सभी इस बढ़ोतरी से प्रभावित हो रहा हैं.
कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है.अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए कौन-सी नीतिगत पहल की जाती है.

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