पटना में बढ़ती महिला हिंसा पर सवाल, निजी गर्ल्स हॉस्टलों की निगरानी की मांग तेज
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 30 जनवरी 2026 — बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है. शंभू गर्ल्स हॉस्टल और इंपरफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में रह रही NEET की छात्राओं के साथ हुई कथित बलात्कार और हत्या की घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इन मामलों की CBI जांच की मांग को लेकर छात्र संगठन आइसा (AISA) और पटना विश्वविद्यालय की छात्राओं ने गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया.

आइसा के बैनर तले बेटी बचाओ न्याय मार्च का आयोजन मगध महिला कॉलेज से कारगिल चौक तक किया गया. मार्च में बड़ी संख्या में छात्राएं और छात्र शामिल हुए, जिन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर महिला सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही की मांग किया है.
बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं – प्रदर्शनकारियों का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व आइसा बिहार राज्य अध्यक्ष प्रीति कुमारी, आइसा नेत्री सबा, पटना कॉलेज काउंसलर अदिति, प्रीति पासवान, श्रेयषी, वैष्णवी, प्रिय और आइसा की राज्य उपाध्यक्ष मनीषा यादव ने किया.
मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा है कि, आज बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. राजधानी पटना में ही अगर छात्राओं के साथ बलात्कार और हत्या जैसी घटनाएं हो रही हैं, तो पूरे राज्य की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
वक्ताओं ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल और इंपरफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में हुई घटनाओं को संस्थागत लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि जब तक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं होगी, तब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल सकता.
CBI जांच और निजी हॉस्टलों के लिए नियामक संस्था की मांग
आइसा और छात्राओं ने सरकार से स्पष्ट मांग किया है कि,NEET छात्राओं के साथ हुई बलात्कार और हत्या की घटनाओं की CBI जांच कराई जाए.
पटना समेत पूरे बिहार में प्राइवेट गर्ल्स हॉस्टलों के संचालन और निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था बनाई जाए.
हॉस्टलों की सुरक्षा, CCTV, वार्डन व्यवस्था और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाए.
वक्ताओं ने कहा कि निजी हॉस्टलों में छात्राएं असुरक्षित हैं और प्रशासन की ओर से कोई ठोस निगरानी तंत्र मौजूद नहीं है.
सरकार और पुलिस प्रशासन पर लीपापोती का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि,सरकार सुशासन का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है.
आइसा नेताओं ने गृह मंत्री सम्राट चौधरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी चिंताजनक है. उनका आरोप है कि मामलों को दबाने और लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं.
रेप की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है – आइसा
वक्ताओं ने कहा कि बिहार में लगातार बढ़ती महिला हिंसा यह संकेत देती है कि, रेप की संस्कृति को मौन समर्थन मिल रहा है.
उन्होंने मांग की कि सरकार केवल बयानबाज़ी न करे, बल्कि ठोस कदम उठाए और महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी दे.
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने कहा कि वे डर के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जो लोकतांत्रिक और सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक है.
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बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की भागीदारी
इस न्याय मार्च में आइसा बिहार राज्य सचिव सबीर कुमार, राज्य सह-सचिव कुमार दिव्यम, आशीष साह, नीतीश कुमार, ऋषि कुमार, आदर्श, मोनू, प्रिया सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं मौजूद थे. सभी ने एक स्वर में महिला सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही की मांग उठाई.
सवाल जो सरकार को जवाब देने होंगे
यह प्रदर्शन सिर्फ एक घटना का विरोध नहीं था, बल्कि बिहार में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल था.
क्या छात्राओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है?
निजी हॉस्टलों की जवाबदेही तय कब होगी?
पीड़ित परिवारों को न्याय कब मिलेगा?
इन सवालों के जवाब अब सरकार और प्रशासन को देने होंगे.
निष्कर्ष
पटना में NEET छात्राओं के साथ हुई घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता को उजागर करती हैं.आइसा द्वारा निकाला गया बेटी बचाओ न्याय मार्च इस बात का संकेत है कि छात्र समाज अब चुप नहीं बैठेगा.जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आवाज़ और तेज होती जाएगी.

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