NEET छात्रा कांड: CBI को केस सौंपना सरकार की विफलता—तेजस्वी

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Ajit Kumar

बिहार
NEET छात्रा दुष्कर्म हत्या मामले पर तेजस्वी यादव का बयान

बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल, NDA सरकार पर तीखा आरोप

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,31 जनवरी 2026 —बिहार में कानून-व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है. NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मामले में बिहार सरकार द्वारा केस को CBI को सौंपने के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष एवं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता माननीय तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने इस निर्णय को राज्य सरकार की प्रशासनिक अक्षमता, भ्रष्टाचार और पुलिस तंत्र की विफलता का खुला स्वीकार बताया है.

तेजस्वी यादव ने अपने प्रेस बयान में कहा कि जब राज्य की पुलिस और प्रशासन एक जघन्य अपराध,जैसे बलात्कार और हत्या,की निष्पक्ष, तेज और प्रभावी जाँच तक नहीं कर पा रहा है, तो यह बिहार की ध्वस्त कानून-व्यवस्था का सबसे बड़ा प्रमाण है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बिहार सरकार किस नैतिक आधार पर खुद को सुशासन की सरकार कहती है.

CBI को केस सौंपना समाधान नहीं, जिम्मेदारी से भागने का तरीका

नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि CBI को केस सौंप देना न्याय की गारंटी नहीं है. उन्होंने नवरुणा कांड सहित कई उदाहरण गिनाते हुए कहा हैं कि ऐसे अनेक मामले हैं, जिनमें CBI 12-13 वर्षों तक आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही हैं और अंततः जाँच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.

तेजस्वी यादव ने कहा कि,यह आशंका स्वाभाविक है कि इस मामले में भी वही होगा,लंबी जाँच, कोई नतीजा नहीं, और पीड़िता को न्याय नहीं. सरकार जनता का गुस्सा शांत करने और मीडिया मैनेजमेंट के लिए CBI का नाम उछाल रही है.

जंगलराज’ का नारा देने वालों से सवाल

उन्होंने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि चुनाव के समय जंगलराज का शोर मचाने वाले अब कहां हैं? आज बिहार में अपराध बेलगाम हैं, छात्राएं असुरक्षित हैं और सरकार केवल बयानबाज़ी कर रही है.

तेजस्वी यादव ने सवाल किया किया कि,

बिहार की विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा?

क्या मुख्यमंत्री और गृह विभाग अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे?

क्या हर बड़े अपराध के बाद CBI को केस सौंपना ही सरकार की नीति बन गई है?

उन्होंने कहा कि अपराधियों को पकड़ने के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार हकीकत में करप्ट और कंप्रोमाइज़्ड सिस्टम के भरोसे चल रहा है.

छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंता

NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुई यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और सामाजिक सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न है. तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में लाखों छात्र-छात्राएं कोचिंग के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं, लेकिन सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह असफल रही है.

उन्होंने कहा, अगर पढ़ने वाली बेटियां ही सुरक्षित नहीं हैं, तो बिहार का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?

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हेडलाइन मैनेजमेंट बनाम वास्तविक न्याय

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार हर बड़े अपराध के बाद हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है. कभी SIT, कभी CBI—लेकिन ज़मीन पर न तो अपराध रुकते हैं और न ही पीड़ितों को न्याय मिलता है.

उन्होंने मांग किया है कि, मामले की तेज़, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच हो.

दोषियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी सजा दी जाए.

पीड़ित परिवार को उचित मुआवज़ा और सुरक्षा प्रदान की जाए.

निष्कर्ष: न्याय की कसौटी पर सरकार फेल

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार की मौजूदा सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में असमर्थ है. CBI को केस सौंपना कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी का प्रमाण है. जब तक अपराधियों में कानून का डर नहीं होगा और सरकार जवाबदेही नहीं लेगी, तब तक ऐसे दर्दनाक मामले सामने आते रहेंगे.

तेजस्वी यादव का यह बयान न केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, बल्कि बिहार में न्याय, सुरक्षा और जवाबदेही की मांग भी है,जिसे अब नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा.

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