केन्द्रीय बजट 2026 पर बिहार के एनडीए नेताओं की भूमिका: सवालों के घेरे में बिहारी अस्मिता
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 2 फरवरी 2026 केन्द्रीय बजट 2026 को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बिहार के एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया को हतप्रभ करने वाली बताते हुए कई गंभीर सवाल खड़ा किया हैं. उनका कहना है कि जिस बजट से बिहार की जनता को बड़ी उम्मीदें थीं, उसी बजट पर एनडीए के बिहारी नेताओं की बेतहाशा प्रशंसा यह दर्शाती है कि वे या तो पूरी तरह केन्द्र सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर चुका हैं या फिर सत्ता के लोभ में बिहारी अस्मिता को पीछे छोड़ चुका हैं.
प्री-बजट मांगें और बजट की हकीकत
राजद प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि बजट से पहले आयोजित प्री-बजट मीटिंग में बिहार सरकार द्वारा जो भी मांगें केन्द्र सरकार के सामने रखी गई थीं, उनमें से एक भी मांग को केन्द्रीय बजट में पूरा नहीं किया गया. यह स्थिति बिहार के साथ किए गए वादों और घोषणाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है.
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले बजट में कोशी डैम के निर्माण, पटना–पूर्णिया, बक्सर–भागलपुर और बोधगया–राजगीर–वैशाली–दरभंगा एक्सप्रेस-वे, पटना, गया और भागलपुर में टेक्सटाइल इंडस्ट्री की स्थापना, तथा आधारभूत संरचना के विकास के लिए 59 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जैसी घोषणाएं की गई थीं. लेकिन इस बार के बजट में इन सभी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे बिहार की जनता में निराशा स्वाभाविक है.
फिर भी बजट की जय-जयकार क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिहार को कोई ठोस और विशेष लाभ नहीं मिला, तब भी एनडीए के बिहारी नेताओं के बीच बजट की प्रशंसा करने की होड़ क्यों लगी हुई है. राजद का आरोप है कि ये नेता बिहार की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को नजरअंदाज कर केन्द्र सरकार के हर फैसले पर आंख मूंदकर मुहर लगाने का काम कर रहा हैं.
चित्तरंजन गगन ने कहा कि एनडीए नेताओं द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि बजट में बिहार के सभी जिलों में महिला छात्रावास बनाए जाएंगे. जबकि सच्चाई यह है कि महिला छात्रावास की योजना केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे विकसित राज्यों के सभी जिलों में भी ऐसे छात्रावास बनाए जाएंगे. ऐसे में इसे बिहार के लिए विशेष उपलब्धि के रूप में पेश करना जनता को गुमराह करने जैसा है.
हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर और शिप रिपेयरिंग सेंटर का सच
एनडीए नेताओं द्वारा बनारस–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर को भी बिहार की बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है.राजद प्रवक्ता ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कॉरिडोर बिहार होकर गुजरना ही है, लेकिन इससे बिहार को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलेगा, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा। केवल किसी परियोजना का बिहार से गुजरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे रोजगार, उद्योग और क्षेत्रीय विकास को क्या फायदा होगा, यह अधिक महत्वपूर्ण है.
इसी तरह पटना में प्रस्तावित शिप रिपेयरिंग सेंटर को भी ऐसे प्रचारित किया जा रहा है जैसे बिहार को कोई विशाल औद्योगिक परियोजना मिल गई हो. चित्तरंजन गगन ने इसे एक छोटे पौधे को विशाल वटवृक्ष बताने जैसा करार दिया. उन्होंने कहा कि बिहार में वाटर ट्रांसपोर्टेशन और इनलैंड वाटरवेज की स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है.जब तक बुनियादी ढांचे और परिवहन व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसे छोटे प्रोजेक्ट्स से बड़े बदलाव की उम्मीद करना केवल भ्रम पैदा करने जैसा है.
बिहार के लिए अलग से क्या मिला?
राजद का स्पष्ट आरोप है कि केन्द्रीय बजट में जिन योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा की गई है, वे पूरे देश के लिए हैं. इनमें बिहार के लिए अलग से कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है. ऐसे में यह अनुमान लगाना कि इन योजनाओं से बिहार को कितना लाभ मिलेगा, हवा में तीर चलाने के समान है.
राजद प्रवक्ता ने एनडीए नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि वे बिहार की आवाज मजबूती से नहीं उठा सकते, तो कम से कम झूठे दावे और अतिरंजित प्रचार के माध्यम से बिहार की जनता को गुमराह करने का प्रयास न करें.
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विशेष राज्य का दर्जा: संघर्ष जारी
चित्तरंजन गगन ने जानकारी दी कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज देने की मांग को लेकर राजद सांसदों ने संसद के सामने प्रदर्शन किया है.उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल बजट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के हक और अधिकार की है.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. राजद का मानना है कि जब तक बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष आर्थिक पैकेज नहीं मिलेगा, तब तक राज्य की गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है.
निष्कर्ष
केन्द्रीय बजट 2026 ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या केन्द्र सरकार और उसके सहयोगी दल बिहार के साथ न्याय कर रहे हैं या नहीं.राजद के आरोपों ने यह सवाल जनता के सामने रख दिया है कि क्या बिहार की राजनीतिक आवाज को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिहार के हितों की लड़ाई संसद और सड़क, दोनों जगह किस तरह आगे बढ़ती है.

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