RJD कार्यालय में समकालीन राजनीति और जगदेव बाबू पर संगोष्ठी

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Ajit Kumar

बिहार
RJD कार्यालय दिल्ली में जगदेव बाबू जयंती पर आयोजित संगोष्ठी

जगदेव बाबू के विचारों पर सांसदों और पत्रकारों का मंथन

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 2 फरवरी 2026 — राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यालय, नई दिल्ली में अमर शहीद जगदेव प्रसाद बाबू की जयंती के अवसर पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी सह पत्रकार मिलन समारोह का आयोजन किया गया. भारत लेनिन के नाम से प्रसिद्ध जगदेव प्रसाद बाबू के विचारों को समर्पित इस संगोष्ठी का विषय था, उपेक्षित वर्गों को सशक्त बनाने की राजनीति से प्रेरित समकालीन राजनीति और जगदेव बाबू, कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी राजनीति के सवालों पर गहन चर्चा हुई.

जगदेव बाबू के विचारों पर सांसदों और पत्रकारों का मंथन

इस संगोष्ठी का आयोजन राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर सुबोध कुमार मेहता के नेतृत्व में किया गया. उन्होंने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि आज के राजनीतिक परिदृश्य में जगदेव बाबू के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया हैं. बढ़ती असमानता, सामाजिक विभाजन और हाशिए पर पड़े वर्गों की अनदेखी के दौर में जगदेव बाबू की राजनीति समाज को नई दिशा देने का काम कर सकती है.

वरिष्ठ पत्रकारों ने रखे विचार

कार्यक्रम में देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार जय शंकर गुप्ता और विनोद अग्निहोत्री ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत किया , दोनों वक्ताओं ने समकालीन राजनीति में सामाजिक न्याय की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि वे एक वैचारिक आंदोलन थे, जिनका उद्देश्य सत्ता नहीं बल्कि समाज का पुनर्गठन था.

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज जब राजनीति अधिकतर चुनावी गणित और तात्कालिक लाभ तक सीमित हो गया है, ऐसे समय में जगदेव बाबू की वैचारिक स्पष्टता और प्रतिबद्धता राजनीतिक दलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है.उन्होंने कहा कि शोषित, वंचित और पिछड़े वर्गों की वास्तविक भागीदारी के बिना लोकतंत्र अधूरा है.

भारत लेनिन जगदेव प्रसाद बाबू का संघर्ष

प्रोफेसर सुबोध मेहता ने अपने संबोधन में कहा कि जगदेव प्रसाद बाबू बिहार की समाजवादी राजनीति के मजबूत स्तंभ रहे हैं.उन्होंने शोषित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को सड़क से लेकर विधानसभा तक मजबूती से उठाया. सामाजिक न्याय और समानता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के कारण ही उन्हें भारत लेनिन की संज्ञा दी गई.

उन्होंने बताया कि वर्ष 1974 में सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई के दौरान जगदेव बाबू शहीद हो गए, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं. जनआंदोलनों, सामाजिक संगठनों और प्रगतिशील राजनीति में उनके विचार आज भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ हैं. उपस्थित जनसमूह ने उनके बताए मार्ग पर चलने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की रही मौजूदगी

सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की रही मौजूदगी

इस अवसर पर राजद के कई प्रमुख नेता और सांसद मौजूद रहे। लोकसभा में राजद संसदीय दल के नेता अभय कुशवाहा, राज्यसभा सांसद संजय यादव, बक्सर से लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी वर्ग ने कार्यक्रम में भाग लिया.

सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि जगदेव बाबू के विचार आज भी सामाजिक समरसता और समावेशी राजनीति के लिए प्रासंगिक हैं.उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज को बांटने वाली राजनीति हावी है, तब सामाजिक न्याय आधारित राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है.

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पत्रकार मिलन समारोह भी हुआ आयोजित

संगोष्ठी के उपरांत एक पत्रकार मिलन समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली में बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने वाले पत्रकारों, संसदीय बीट के पत्रकारों और विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े संवाददाताओं ने भाग लिया. इस दौरान राजनीति, सामाजिक मुद्दों और मीडिया की भूमिका पर अनौपचारिक चर्चा हुई.

प्रोफेसर सुबोध मेहता ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सामाजिक न्याय के सवालों को मजबूती से उठाने में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे हाशिए पर पड़े वर्गों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाएं.

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, राजद राष्ट्रीय कार्यालय में आयोजित यह संगोष्ठी न केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम था, बल्कि यह समकालीन राजनीति के लिए एक वैचारिक मंथन का मंच भी साबित हुआ. जगदेव प्रसाद बाबू के विचारों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास के बिना लोकतंत्र अधूरा है. कार्यक्रम में मौजूद नेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने इस बात पर सहमति जताई कि जगदेव बाबू की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.

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