NEET छात्रा कांड में न्याय की मांग तेज
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 3 फरवरी 2026 — बिहार में बेटियों की सुरक्षा, न्याय और सम्मान को लेकर एक बार फिर सरकार की भूमिका कठघरे में है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (AIPWA) के संयुक्त आह्वान पर पटना के बुद्ध स्मृति पार्क में आयोजित जनसुनवाई ने राज्य सरकार के महिला सुरक्षा दावों की पोल खोल दिया है. इस जनसुनवाई में बिहार सरकार के खिलाफ बाकायदा आरोप पत्र पेश किया गया और कहा गया कि सरकार बेटियों को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल हो चुका है.
NEET छात्रा कांड बना जनसुनवाई का केंद्र
जनसुनवाई में खास तौर पर NEET छात्रा कांड को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया. वक्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस मामले में अपराधियों को बचाने के लिए प्रशासनिक तंत्र सक्रिय भूमिका निभा रहा है. पुलिस और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करते हुए कहा गया कि पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित किया जा रहा है.
यह भी कहा गया कि केवल CBI जांच की घोषणा जनता को गुमराह करने का तरीका बनता जा रहा है .जब तक जांच सुप्रीम कोर्ट के प्रत्यक्ष निर्देशन में, समयबद्ध और निष्पक्ष नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी.
बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ से अपराधियों को बचाओ तक
AIPWA की महासचिव मीना तिवारी ने जनसुनवाई को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के नारे और ज़मीनी हकीकत के बीच गहरी खाई है.
उन्होंने तीखा सवाल उठाया है कि जो सरकार बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, वही सरकार आज बेटियों के हत्यारों और बलात्कारियों को संरक्षण दे रही है.
उन्होंने शंभू और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल कांड का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में साक्ष्य मिटाने, गवाहों को डराने और प्रभावशाली अपराधियों को बचाने के लिए प्रशासन ने खुलकर काम किया. उनका स्पष्ट कहना था कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित संरक्षण का मामला है.
महिला सशक्तिकरण के दावे बनाम सच्चाई
विधान परिषद सदस्य का. शशि यादव ने कहा कि सरकार एक ओर राज्यपाल के अभिभाषण में महिला सशक्तिकरण की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
उन्होंने कहा कि अब चुप्पी नहीं चलेगी और बेटी बचाओ–न्याय यात्रा के ज़रिए मगध क्षेत्र से पूरे बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की आवाज़ बुलंद की जाएगी.
आजादी हमारा हक है
बिहार राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष मंजू प्रकाश ने कहा कि महिलाएं जन्म से ही आज़ादी और सम्मान का अधिकार लेकर पैदा होती हैं. लेकिन जब वे अपने अधिकारों की मांग करती हैं, तो उन्हें हर स्तर पर निशाना बनाया जाता है.
उन्होंने दो टूक कहा कि अब इस अन्याय को और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ,आजादी हमारा हक है, और इसे लेकर हम सड़क से संसद तक संघर्ष करेंगे.
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जूरी का फैसला: सरकार ही असली अपराधी
जनसुनवाई की जूरी में शामिल महिला कार्यकर्ता रूपम मिश्र, सामाजिक कार्यकर्ता अशरफी सदा और मंजू प्रकाश ने सर्वसम्मति से कहा कि यह साबित हो चुका है कि सरकार बेटियों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है और अपराधियों को बचा रही है.
उन्होंने कहा कि बलात्कार के मामलों में साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई, हॉस्टल संचालकों को रिमांड पर नहीं लिया गया और पुलिस ने घटनाओं से इनकार तक किया. यह सब दर्शाता है कि सरकारी तंत्र खुद कटघरे में खड़ा है.
सांस्कृतिक प्रतिरोध और जनभागीदारी
जनसुनवाई में जन संस्कृति मंच के कलाकारों ने क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से सामाजिक बदलाव का आह्वान किया. महिला कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, छात्रों और युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर इस आंदोलन को व्यापक समर्थन दिया.
AISA की प्रदेश अध्यक्ष प्रीति कुमारी, AIPWA की युवा नेता वंदना प्रभा, सबा आफरीन, कमलेश शर्मा सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन कुमार दिव्यम ने किया.
बेटी बचाओ–न्याय यात्रा का ऐलान
जनसुनवाई के अंत में घोषणा की गई कि 4 फरवरी 2026 से जहानाबाद से बेटी बचाओ–न्याय यात्रा की शुरुआत होगी. यह यात्रा बिहार के विभिन्न जिलों से होते हुए 10 फरवरी 2026 को बिहार विधानसभा के समक्ष विशाल मार्च के रूप में समाप्त होगी.
इस यात्रा का उद्देश्य है,महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के खिलाफ जनचेतना फैलाना, दोषियों को सजा दिलाने का दबाव बनाना और सरकार को जवाबदेह ठहराना.
निष्कर्ष
पटना की यह जनसुनवाई सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार में बेटियों की सुरक्षा और न्याय के लिए उभरता हुआ जनआंदोलन है. सवाल साफ है,क्या सरकार अपने दावों पर खरी उतरेगी, या जनता की यह आवाज़ उसे जवाब देने पर मजबूर करेगी?
आने वाले दिनों में ‘बेटी बचाओ–न्याय यात्रा’ इस सवाल का जवाब तय करेगी.

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