BJP का भ्रष्टाचार मॉडल: कमीशन दो – काम लो

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Ajit Kumar

भारत
मध्य प्रदेश में मनरेगा मजदूरों से मुलाकात करते दिग्विजय सिंह, भ्रष्टाचार का आरोप

मध्य प्रदेश में मनरेगा मजदूरों की बदहाली, कांग्रेस का बड़ा आरोप

तीसरा पक्ष ब्यूरो मध्य प्रदेश 8 फरवरी — देश में केंद्र और कई राज्यों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भ्रष्टाचार के आरोप कोई नया नहीं हैं, लेकिन मध्य प्रदेश से सामने आये हालिया आरोपों ने एक बार फिर ,डबल इंजन सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल @INCIndia के माध्यम से मध्य प्रदेश में चल रहे कथित भ्रष्टाचार मॉडल को उजागर करते हुए कहा है कि राज्य में बिना कमीशन दिए कोई काम नहीं हो रहा है.

कांग्रेस के अनुसार यह मॉडल बेहद सरल लेकिन खतरनाक है,कमीशन दो, काम लो. इसका सबसे बड़ा शिकार गरीब, मजदूर और ग्रामीण जनता हो रहा है, जो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है.

पेंच नेशनल पार्क में जमीनी हकीकत

कांग्रेस के आरोपों को और मजबूती तब मिला जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पेंच नेशनल पार्क क्षेत्र में मनरेगा मजदूरों से सीधे मुलाकात किया. इस दौरान ग्राम प्रधानों और मजदूरों ने जो बातें बताईं, वे बेहद चिंताजनक हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार, मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है. मजदूरों ने खुलकर स्वीकार किया है कि बिना रिश्वत दिए काम मिलना लगभग असंभव हो गया है.

मजदूरों के गंभीर आरोप

मजदूरों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने जिन समस्याओं को सामने रखा, वे इस प्रकार हैं,

बिना कमीशन कोई काम नहीं मिलता है.

सरकारी अधिकारी काम के बदले 10% तक कमीशन मांगते हैं.

तय मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है.

कई महीनों से मनरेगा मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है.

रोजगार न मिलने के कारण मजदूर पलायन को मजबूर हैं.

ये आरोप केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लूटतंत्र की ओर इशारा करता हैं.

मनरेगा: रोजगार की गारंटी या भ्रष्टाचार का अड्डा?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना है.यह योजना देश के करोड़ों गरीब परिवारों के लिए जीवनरेखा माना जाता है.

लेकिन मध्य प्रदेश में मनरेगा की स्थिति इसके ठीक उलट बताया जा है है .मजदूरों को न समय पर काम मिल रहा है और न ही मेहनत की पूरी मजदूरी मिलती है . भुगतान में महीनों की देरी ने उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा कर दिया है.

पलायन की मजबूरी

कांग्रेस के मुताबिक, रोजगार और मजदूरी न मिलने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांव छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं. यह स्थिति उस राज्य में है, जहां सरकार विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करता है.

ग्रामीणों का कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर काम ही नहीं मिलेगा और जो मिलेगा उसमें भी कमीशन देना पड़ेगा , तो परिवार का पेट पालना असंभव हो जाता है.

डबल इंजन सरकार पर सवाल

BJP अक्सर केंद्र और राज्य में अपनी सरकार को, डबल इंजन बताकर विकास की गारंटी देने का दावा करता है. लेकिन कांग्रेस का कहना है कि मध्य प्रदेश में यह डबल इंजन विकास का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का इंजन बन चुका है.

कांग्रेस के अनुसार, नीचे से ऊपर तक,हर स्तर पर कमीशनखोरी और लूट-खसोट का खेल चल रहा है. आम जनता परेशान है, जबकि नेता और अधिकारी मोटी मलाई, खाने में व्यस्त हैं.

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कांग्रेस का हमला और राजनीतिक संदेश

Congress @INCIndia ने अपने X पोस्ट में साफ शब्दों में कहा है कि यह BJP का असली,करप्शन मॉडल है.पार्टी का दावा है कि जब तक जनता इन मुद्दों पर सवाल नहीं उठाएगी, तब तक गरीबों के हक पर इसी तरह डाका डाला जाता रहेगा.

कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि वह ऐसे मामलों को लगातार उजागर करते रहेंगे और मजदूरों को उनका हक दिलाने के लिए सड़क से संसद तक आवाज उठाएगी.

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में मनरेगा मजदूरों से जुड़े ये आरोप सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत की गंभीर तस्वीर पेश करता हैं. अगर ये आरोप सही हैं, तो यह न केवल राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि देश की सबसे बड़ी रोजगार योजना की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाता है.

अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करती है,या फिर कमीशन दो, काम लो का यह मॉडल यूं ही चलता रहेगा.

स्रोत: Congress @INCIndia का X (Twitter) पोस्ट
स्थान: मध्य प्रदेश

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