भारत की Epstein Files: शेल्टर होम कांड और सिस्टम की नाकामी की कहानी

| BY

Ajit Kumar

भारतबिहार
भारत की Epstein Files: शेल्टर होम कांड और सिस्टम की नाकामी की कहानी

जब विदेशी घोटाला भारतीय सच्चाई की याद दिलाए

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना (बिहार), 10 — फरवरी अमेरिका में सामने आई Jeffrey Epstein Files ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे सत्ता, पैसा और रसूख मिलकर नाबालिग लड़कियों के शोषण को सालों तक छिपाए रखता हैं. यह मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं था, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की तस्वीर था जो ताकतवरों के आगे आंख मूंद लेता है.

यही वजह है कि जब भारत में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने X (Twitter) पर लिखा कि भारत की भी अपनी Epstein Files हैं, तो यह बात सीधे दिल पर लगा.उनका इशारा बिहार के उन शेल्टर होम कांड के ओर था, जहां बच्चियों की सुरक्षा के नाम पर उन्हें सबसे असुरक्षित माहौल में धकेल दिया गया.

यह लेख भारत के उन्हीं काले अध्यायों,मुजफ्फरपुर और गया शेल्टर होम कांड,की पड़ताल करता है.

Epstein Files क्या हैं? एक संक्षिप्त समझ

जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंशियर था, जिसने नाबालिग लड़कियों के सेक्स ट्रैफिकिंग रिंग चलाई.जांच में सामने आया कि 14 साल से कम उम्र की बच्चियों को लालच, डर और ड्रग्स के ज़रिये शोषण के जाल में फंसाया जाता था.
इस कांड की सबसे डरावनी बात यह था कि,प्रभावशाली और ताकतवर लोगों की संलिप्तता.

यही पैटर्न हमें भारत के शेल्टर होम मामलों में भी दिखता है.

Epstein Files: सत्ता और शोषण की मिलीभगत

जेफ्री एपस्टीन का मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे प्रभावशाली लोग कानून से ऊपर बन जाता हैं. जांच में सामने आया कि नाबालिग लड़कियों को लालच, डर और मजबूरी के जरिए एक संगठित शोषण तंत्र में फंसाया गया. सबसे खतरनाक पहलू यह था कि इस नेटवर्क को राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण मिलता रहा.

यही पैटर्न भारत में भी दिखाई देता है,बस नाम और जगह बदल जाता हैं.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: जब सुरक्षा घर ही जेल बन गया

साल 2018 में बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक बालिका शेल्टर होम से जो सच सामने आया, उसने पूरे देश को झकझोर दिया था. यह शेल्टर होम एक NGO द्वारा संचालित था और सरकारी फंड से चल रहा था.

TISS (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने खुलासा किया कि,

अधिकांश बच्चियां लंबे समय से यौन शोषण का शिकार था.

मारपीट, दवाइयों का गलत इस्तेमाल और धमकियां आम था .

शेल्टर होम स्टाफ और बाहरी लोगों की मिलीभगत था.

सबसे डरावनी बात यह था कि जिन बच्चियों को समाज से बचाने के लिए यहां रखा गया था, वही जगह उनके लिए सबसे खतरनाक साबित हुआ. इस मामले में मुख्य आरोपी को सजा जरूर मिला, लेकिन इस कांड ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है.

सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना (@yogitabhayana) ने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में एक तीखा सवाल उठाया,

आप जो अमेरिका की EpsteinFiles में देख रहे हो, वैसा ही EpsteinFiles कांड भारत में भी हुआ है… मुजफ्फरपुर बालिका शेल्टर होम और गया शेल्टर होम कांड.

उनका यह बयान भारत में हुए उन भयावह अपराधों की याद दिलाता है, जिन्हें अक्सर समय के साथ भुला दिया जाता है. यह लेख इन्हीं भारतीय ‘Epstein Files की परतें खोलता है.

ये भी पढ़े :अल्पसंख्यक होना आज डर क्यों बन गया?
ये भी पढ़े :अपना–पराया का खेल: देश को कौन बाँट रहा है और क्यों?

गया शेल्टर होम कांड: एक और अनसुनी चीख

मुजफ्फरपुर कोई अकेला मामला नहीं था.गया जिले के शेल्टर होम्स में भी गंभीर अनियमितताओं और दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आईं.रिपोर्ट्स के मुताबिक,

बच्चों को अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया.

शारीरिक और मानसिक हिंसा आम था
.
प्रशासनिक निगरानी नाम मात्र की था .

इन मामलों ने यह साफ कर दिया कि समस्या किसी एक संस्था या व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता थी.

क्यों कहे जाते हैं ये भारत की Epstein Files?

इन भारतीय कांडों और Epstein Files में कई समानताएं हैं.

नाबालिगों का संगठित शोषण.

ताकतवर लोगों की भूमिका.

सिस्टम की चुप्पी और लापरवाही.

पीड़ितों की आवाज़ को दबाया जाना.

फर्क सिर्फ इतना है कि विदेशों में ऐसे मामले वैश्विक बहस बन जाता हैं, जबकि भारत में अक्सर समय के साथ दबा दिया जाता हैं.

कानून हैं, लेकिन ज़मीन पर क्यों नहीं दिखते?

भारत में POCSO Act, Juvenile Justice Act जैसे कड़े कानून मौजूद हैं, लेकिन,

शेल्टर होम्स की नियमित निगरानी नहीं होती है.

NGO और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं.

VIP संस्कृति जांच को प्रभावित करता है.

जब तक इन खामियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे कांड दोहराते रहेंगे.

निष्कर्ष: याद रखना ही पहला कदम है

मुजफ्फरपुर और गया शेल्टर होम कांड हमें यह सिखाते हैं कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है.
ज़रूरत है,

सतर्क समाज की,जवाबदेह प्रशासन की,और लगातार सवाल पूछने की,

योगिता भयाना जैसी आवाज़ें हमें याद दिलाती हैं कि चुप्पी अपराध को बढ़ावा देती है. अगर हम सच में बच्चों को सुरक्षित भविष्य देना चाहते हैं, तो इन ‘भारतीय Epstein Files को भूलना नहीं, बल्कि उनसे सबक लेना होगा.

Trending news

Leave a Comment