बिहार की बेटियों के न्याय के लिए विधानसभा मार्च पर पुलिस लाठीचार्ज

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में विधानसभा मार्च के दौरान महिलाओं पर पुलिस लाठीचार्ज

जेपी गोलंबर पर दमन, बैरिकेड तोड़ डाकबंगला चौराहे तक पहुँचा मार्च

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 10 फरवरी बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उठ रही आवाज़ को आज एक बार फिर पुलिसिया दमन का सामना करना पड़ा है. NEET पीड़िता समेत बिहार की बेटियों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आइसा–ऐपवा द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण विधानसभा मार्च पर पटना में पुलिस ने लाठीचार्ज किया है. इस कार्रवाई में कई महिलाएँ घायल हो गईं, जबकि प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुँचाने से रोक दिया गया.

गांधी मैदान से शुरू हुआ शांतिपूर्ण मार्च

गांधी मैदान से शुरू हुआ शांतिपूर्ण मार्च

आइसा–ऐपवा के आह्वान पर दोपहर 12 बजे गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से विधानसभा मार्च की शुरुआत हुआ था. इस मार्च में हजारों की संख्या में छात्राएँ, महिलाएँ और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुआ. सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर NEET छात्रा सहित बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर न्याय की मांग करना चाहते थे.

मार्च जैसे ही जेपी गोलंबर पहुँचा, वहां पहले से लगाए गए भारी पुलिस बैरिकेड के कारण उसे रोक दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने संयम बनाए रखते हुए आगे बढ़ने की कोशिश किया, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने धक्का-मुक्की शुरू कर दिया.

महिलाओं पर लाठीचार्ज, कई घायल

स्थिति अचानक तब बिगड़ गया जब पुलिस ने महिलाओं पर लाठीचार्ज कर दिया.इस कार्रवाई में कई महिलाओं को हाथ, सिर और पैरों में चोटें आईं है.लाठीचार्ज के कारण सैकड़ों महिलाएँ तितर-बितर हो गईं और मुख्य मार्च से अलग हो गया . बावजूद इसके, आंदोलनकारियों का हौसला नहीं टूटा.

बैरिकेड तोड़ डाकबंगला चौराहे तक पहुँचे प्रदर्शनकारी

पुलिस दमन के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर पर लगे बैरिकेड को पार किया और डाकबंगला चौराहे तक पहुँचने में सफल रहा. वहां भी पहले से पुलिस बैरिकेड मौजूद था.डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा संभालते हुए वहीं बैठकर सभा आयोजित किया .

प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से मिलने और NEET छात्रा समेत बिहार की बेटियों से जुड़े मामलों में न्याय की मांग पर अड़ा रहा . समाचार लिखे जाने तक डाकबंगला चौराहे पर सभा जारी था.

आंदोलन का नेतृत्व और समर्थन

इस विधानसभा मार्च का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, आइसा के महासचिव प्रसेनजीत कुमार, JNUSU के पूर्व अध्यक्ष धनंजय कुमार, सोहिला गुप्ता, संगीता सिंह, रीता वर्णवाल, सरोज चौबे, प्रीति कुमारी, सबीर कुमार, कुमार दिव्यम, सबा आफरीन, मनीषा यादव, अनु, प्रिया, दीपंकर सहित कई नेताओं ने किया.

मार्च के समर्थन में विधायक संदीप सौरभ, एमएलसी शशि यादव, पूर्व विधायक गोपाल रविदास, सिस्टर डोरोथी और मीरा दत्त भी मौके पर पहुँचे.

बिहार में महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार विफल – मीना तिवारी

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि बिहार में छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ लगातार गंभीर अपराध हो रहा हैं.NEET छात्रा का मामला, दरभंगा में छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और बक्सर की घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय सरकार आंदोलनकारी महिलाओं पर लाठीचार्ज करा रही है, जो बेहद निंदनीय है.

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केवल CBI जाँच से नहीं मिलेगा न्याय

मीना तिवारी ने स्पष्ट कहा कि NEET छात्रा मामले में केवल सीबीआई जाँच से न्याय सुनिश्चित नहीं होगा.उन्होंने मांग किया कि इस पूरे मामले की जाँच सुप्रीम कोर्ट के प्रत्यक्ष निर्देशन में कराई जाए, ताकि निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय मिल सके.

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की महिलाएँ अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगी और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा.

सरकार मुद्दे को दबाना चाहती है – शशि यादव

एमएलसी शशि यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार इस मामले को विधानमंडल से लेकर सड़क तक दबाना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सदन के भीतर मुख्यमंत्री महिला जनप्रतिनिधियों को अपमानित करता हैं और बाहर सड़क पर उनकी पुलिस महिलाओं पर लाठीचार्ज करती है.

7 दिनों की न्याय यात्रा का समापन

गौरतलब है कि यह विधानसभा मार्च 7 दिनों तक चली न्याय यात्रा के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया था. इस यात्रा के दौरान बिहार के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए महिलाओं और छात्राओं ने न्याय की आवाज़ बुलंद किया.

आज के मार्च में हजारों महिलाओं और छात्राओं की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार की बेटियाँ अब चुप नहीं बैठेंगी और अपने हक़ व न्याय के लिए संगठित होकर संघर्ष करेंगी.

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