महिलाओं के सम्मान पर हमला बर्दाश्त नहीं, नीतीश कुमार के खिलाफ सड़कों पर उतरी राजद महिला प्रकोष्ठ
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,10 फरवरी बिहार की राजनीति में एक बार फिर भाषा और मर्यादा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. बिहार की प्रथम महिला मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती राबड़ी देवी के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कथित रूप से गंदी और असंसदीय भाषा के इस्तेमाल के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) महिला प्रकोष्ठ ने जोरदार प्रदर्शन किया.प्रदेश राजद महिला प्रकोष्ठ की कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती अनीता भारती के नेतृत्व में पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया.

महिलाओं के सम्मान पर हमला बर्दाश्त नहीं : अनीता भारती
प्रदेश राजद महिला प्रकोष्ठ की कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती अनीता भारती ने कहा कि ,गंदी भाषा और गंदी जुबान अब नीतीश कुमार की पहचान बन चुकी है. बिहार की महिलाओं के मान-सम्मान की प्रतीक और राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री रहीं श्रीमती राबड़ी देवी के खिलाफ इस तरह की अभद्र भाषा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक महिला नेता का अपमान नहीं, बल्कि बिहार की करोड़ों महिलाओं के स्वाभिमान पर सीधा हमला है.
राजद कार्यालय से आयकर गोलंबर तक विरोध मार्च
राजद महिला प्रकोष्ठ की ओर से यह विरोध प्रदर्शन पटना स्थित प्रदेश राजद कार्यालय से शुरू हुआ. वीरचंद पटेल पथ होते हुए सैकड़ों महिलाओं ने नारेबाजी के साथ विरोध मार्च निकाला.प्रदर्शन के दौरान ,गंदी भाषा, गंदी जुबान नीतीश कुमार की यही पहचान, अभद्र भाषा क्यों, नीतीश कुमार जवाब दो, महिला विरोधी सरकार हाय-हाय” जैसे गगनभेदी नारे लगाए गए.
महिलाएं बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रही थीं. मार्च आयकर गोलंबर की ओर बढ़ा, जहां पहले से पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग की गई थी. प्रशासनिक रोक के बावजूद वहीं पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन कर रोष प्रकट किया गया.
महिलाओं में गुस्सा, सरकार मौन : एजाज अहमद
प्रदेश राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं के लिए अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.उन्होंने कहा कि बिहार की महिलाएं आज गुस्से और आक्रोश से भरी हुई हैं. एक ओर राज्य में लगातार महिलाओं और बच्चियों के साथ जघन्य अपराध हो रहे हैं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं.
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि जब इन मुद्दों को लेकर विधान परिषद में सवाल उठाया गया, तो सरकार ने जवाब देने के बजाय ध्यान भटकाने के लिए अभद्र भाषा का सहारा लिया, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है.
बच्चियों के साथ अपराधों से शर्मसार बिहार
विरोध प्रदर्शन के दौरान विधान पार्षद डॉ. उर्मिला ठाकुर और श्रीमती मुन्नी रजक ने बिहार में बढ़ते महिला अपराधों पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पटना में नीट की छात्रा, दरभंगा में छह वर्षीय बच्ची, खगड़िया में चार वर्षीय बच्ची, बक्सर में दो बच्चियों और मधेपुरा में एक विधवा महिला के साथ बलात्कार के बाद हत्या जैसी घटनाओं ने पूरे बिहार को शर्मसार कर दिया है.
उनका कहना था कि इन भयावह घटनाओं के बावजूद मुख्यमंत्री की चुप्पी यह साबित करती है कि मौजूदा सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील नहीं है. ऐसे माहौल में जब श्रीमती राबड़ी देवी ने सरकार से जवाब मांगा, तो उन्हें अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा.
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अविलंब माफी मांगें नीतीश कुमार : राजद
राजद महिला प्रकोष्ठ और पार्टी नेतृत्व ने एक सुर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग किया कि वे बिहार की महिलाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें.नेताओं ने कहा कि श्रीमती राबड़ी देवी न सिर्फ बिहार की प्रथम महिला मुख्यमंत्री रही हैं, बल्कि वे महिलाओं के सम्मान और संघर्ष की प्रतीक भी हैं. उनके खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पूरे महिला समाज का अपमान है.
बड़ी संख्या में महिला और पार्टी नेता रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश राजद की प्रवक्ता श्रीमती सारिका पासवान, मधु मंजरी, महिला प्रकोष्ठ की पूर्व अध्यक्ष आभा लता, प्रदेश महासचिव मुकुंद सिंह, सुनीता कुशवाहा, मीना राय, पूजा शेखर यादव, प्रो. रतन प्रिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं.
इसके अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और नेता भी मौजूद थे, जिनमें प्रदेश महासचिव बल्ली यादव, प्रमोद कुमार राम, भाई अरुण कुमार, अशोक यादव, अभिषेक कुमार सिंह, शिक्षक प्रकोष्ठ अध्यक्ष कुमार राय सहित अनेक नेता शामिल थे.
निष्कर्ष
यह विरोध प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा सवाल है. राजद महिला प्रकोष्ठ ने साफ कर दिया है कि महिलाओं के अपमान और बढ़ते अपराधों पर चुप्पी अब स्वीकार नहीं की जाएगी.आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और भी तेज होने की संभावना है.

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