लेबर कोड और अमेरिकी डील पर कांग्रेस आक्रामक
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,12 फरवरी – कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लेबर कोड और अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं. प्रियंका गांधी ने कहा है कि पहले लेबर कोड के जरिए मजदूरों के अधिकारों पर प्रहार किया गया और अब अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील के माध्यम से किसानों के हितों से समझौता किया जा रहा है.
लेबर कोड पर सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि लेबर कोड के लागू होने से मजदूरों की सुरक्षा और अधिकार कमजोर हुआ हैं. उनका आरोप है कि श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से काम के घंटे, नौकरी की सुरक्षा और ट्रेड यूनियनों की ताकत पर असर पड़ा है. कांग्रेस का मानना है कि इन बदलावों से बड़ी कंपनियों को लाभ हुआ है, जबकि मजदूर वर्ग को नुकसान झेलना पड़ा है.
कांग्रेस लंबे समय से यह मुद्दा उठाती रही है कि श्रम सुधारों के नाम पर मजदूरों के अधिकार सीमित किया जा रहा है . प्रियंका गांधी के बयान ने एक बार फिर इस बहस को राष्ट्रीय स्तर पर तेज कर दिया है.
अमेरिकी ट्रेड डील और किसान
प्रियंका गांधी ने अपने पोस्ट में अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इस डील में रखी गई शर्तें भारतीय किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं. उनका दावा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिए गए फैसले घरेलू कृषि क्षेत्र को कमजोर कर सकता हैं.
उन्होंने आरोप लगाया है कि पहले भी केंद्र सरकार कृषि कानून लाई थी, जिसके खिलाफ देशभर में किसानों ने लंबा आंदोलन किया था. प्रियंका गांधी ने कहा कि उस आंदोलन के दौरान 750 किसानों की जान चली गई थी. अब कांग्रेस का आरोप है कि नई ट्रेड डील के जरिए फिर से किसानों के हितों पर आघात हो सकता है.
कांग्रेस का रुख
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस पार्टी मजदूरों और किसानों के साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि पार्टी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और अन्याय नहीं होने देगी. कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में रोजगार, महंगाई और कृषि आय जैसे मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इन मुद्दों को आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा बना सकता है. मजदूर और किसान वर्ग देश की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इन वर्गों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता हैं.
सरकार का संभावित पक्ष
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि लेबर कोड का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि निवेश बढ़े और रोजगार के अवसर सृजित हों. वहीं ट्रेड डील को सरकार वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताता रहा है.
सरकार समर्थकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय समझौते भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद कर सकता हैं. लेकिन विपक्ष का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू हितों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिये
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राजनीतिक असर
प्रियंका गांधी का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि कांग्रेस मजदूर-किसान मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में किसानों के आंदोलन और श्रमिक संगठनों की सक्रियता ने इन मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है.
यदि कांग्रेस इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता के बीच ले जाती है, तो इसका राजनीतिक प्रभाव आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है. दूसरी ओर, सरकार भी अपने फैसलों को विकास और आर्थिक सुधार के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी.
निष्कर्ष
लेबर कोड और अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक बहस आने वाले समय में और तेज हो सकता है. प्रियंका गांधी ने मजदूरों और किसानों के हितों की रक्षा का वादा करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताया है. अब यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और देश की जनता किस पक्ष को ज्यादा विश्वसनीय मानती है.
मजदूर और किसान भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ऐसे में उनसे जुड़े किसी भी फैसले का प्रभाव व्यापक होता है. यही कारण है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक दिशा से भी जुड़ा हुआ है.

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