एप्सटीन विवाद: हरदीप सिंह पुरी से इस्तीफे की मांग

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Ajit Kumar

बिहारभारत
प्रेस बयान देते राजद नेता, हरदीप पुरी से इस्तीफे की मांग

राष्ट्रीय जनता दल नेता भाई अरुण का नैतिक सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 14 फरवरी 2026 — राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश महासचिव भाई अरुण कुमार ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि एप्सटीन फाइल से जुड़े विवादों में जिस तरह मंत्री का नाम सामने आया है, उससे नैतिकता के आधार पर उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिये. भाई अरुण ने प्रेस वार्ता में कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिये, इसलिए इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिये.

एप्सटीन विवाद और राजनीतिक बयानबाजी

भाई अरुण ने आरोप लगाया है कि एप्सटीन फाइल से जुड़े मेल और संपर्कों की चर्चा ने कई गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं.उनका कहना है कि जब कोई सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति किसी विवादित अंतरराष्ट्रीय शख्सियत से कई बार मुलाकात की बात स्वीकार करता है, तो यह अपने आप में जांच का विषय बन जाता है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन से चार बार मुलाकात की बात कही, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है.
यह पूरा विवाद अमेरिकी अपराधी जेफ्री एप्सटीन से जुड़े कथित मेल और संपर्कों को लेकर उभरा है, जो पहले से ही वैश्विक स्तर पर विवादों में रहा है.भाई अरुण ने कहा है कि ऐसे व्यक्ति, जो बच्चियों के यौन शोषण के गंभीर अपराधों में दोषी साबित हो चुका था, उससे किसी भी प्रकार का संपर्क या आर्थिक सहयोग स्वीकार करना नैतिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता है.

नैतिकता बनाम कानूनी पहलू

भाई अरुण ने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी कानूनी निर्णय से पहले नैतिकता के आधार पर दिया गया है. उन्होंने कहा कि हम न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन राजनीति में नैतिक जवाबदेही भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. यदि किसी मंत्री का नाम ऐसे विवाद में आता है, तो उन्हें स्वयं आगे बढ़कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये और जरूरत पड़े तो पद छोड़ देना चाहिये.

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सरकार की छवि से भी जुड़ा है. विपक्ष का कर्तव्य है कि वह जनता के सामने सवाल उठाए और जवाबदेही तय करे. उन्होंने कहा कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और जनता का विश्वास भी मजबूत होगा.

राजनीतिक दबाव और विपक्ष की रणनीति

राजद नेता ने कहा है कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीतिक संस्कृति और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान देने से बच रहा है, जिससे संदेह और बढ़ रहा है. भाई अरुण के अनुसार, यदि कोई मंत्री खुद ही विवाद से जुड़े तथ्यों को स्वीकार करता है, तो सरकार को भी सक्रिय होकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये .

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सर्वोच्च होता है और यदि किसी मंत्री पर गंभीर सवाल उठता हैं, तो उन्हें स्वयं उदाहरण पेश करना चाहिये, इससे राजनीति में नैतिकता की परंपरा मजबूत होगा और जनता का भरोसा कायम रहेगा.

अंतरराष्ट्रीय विवाद का भारतीय राजनीति पर असर

एप्सटीन फाइल का मामला मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर का है, लेकिन जब इसका संदर्भ भारतीय राजनीतिक नेताओं के साथ जुड़ता है, तो यह स्वाभाविक रूप से देश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन जाता है. भाई अरुण ने कहा कि भारत की राजनीति को वैश्विक स्तर पर अपनी छवि बनाए रखने की आवश्यकता है और किसी भी तरह के विवाद से यह छवि प्रभावित हो सकता है.

उन्होंने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्टता सबसे बड़ा समाधान होता है. यदि संबंधित मंत्री खुद सामने आकर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दें, तो कई भ्रम स्वतः दूर हो जाएंगे.

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विपक्ष की मांग: निष्पक्ष जांच हो

भाई अरुण कुमार ने केंद्र सरकार से मांग किया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिये और राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाना चाहिये, इससे न केवल विवाद समाप्त होगा, बल्कि राजनीतिक व्यवस्था में विश्वास भी बढ़ेगा.

उन्होंने कहा कि यदि जांच में मंत्री निर्दोष पाया जाता हैं, तो उन्हें राजनीतिक रूप से और अधिक मजबूती मिलेगी. लेकिन यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना ही लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप होगा.

निष्कर्ष

राजद के प्रदेश महासचिव भाई अरुण कुमार का यह बयान वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा महत्व रखता है. एप्सटीन फाइल से जुड़े विवादों ने पहले ही वैश्विक स्तर पर कई नेताओं और संस्थानों को कठघरे में खड़ा किया है. ऐसे में भारत में भी जब किसी केंद्रीय मंत्री का नाम इस विवाद से जुड़ता है, तो विपक्ष द्वारा सवाल उठाया जाना स्वाभाविक है.

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित मंत्री इस पूरे मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या सरकार पारदर्शी जांच कराएगी या यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा,यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा . फिलहाल, भाई अरुण कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नैतिकता और जवाबदेही के सिद्धांतों के आधार पर केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, ताकि लोकतंत्र में पारदर्शिता और विश्वास की परंपरा मजबूत हो सके.

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