राम मंदिर विवाद पर अशोक गहलोत का बड़ा बयान

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Ajit Kumar

भारत
AICC प्रेस वार्ता में राम मंदिर चढ़ावा विवाद और बंसी पहाड़पुर के पत्थर को लेकर अपनी बात रखते हुए अशोक गहलोत

AICC प्रेस वार्ता में गहलोत ने बंसी पहाड़पुर के पत्थर और चढ़ावा विवाद पर अपनी बात रखी

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना :राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राम मंदिर निर्माण और हाल ही में सामने आए चढ़ावा विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मंदिर निर्माण के लिए बंसी पहाड़पुर से कानूनी प्रक्रिया के तहत पत्थर उपलब्ध कराने में सहयोग किया गया था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर जैसे पवित्र कार्य में यदि चोरी या वित्तीय अनियमितता जैसे आरोप सामने आते हैं तो यह पूरे समाज के विश्वास को प्रभावित करता है.

गहलोत का यह बयान उनके आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट के माध्यम से भी साझा किया गया, जिसमें उन्होंने प्रेस वार्ता के प्रमुख अंश प्रकाशित किए.

बंसी पहाड़पुर के पत्थर को लेकर क्या बोले अशोक गहलोत?

प्रेस वार्ता में अशोक गहलोत ने बताया कि जब राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर बंसी पहाड़पुर क्षेत्र से ले जाए जा रहे थे, तब उस इलाके में अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही थीं.

उनके अनुसार, मंदिर निर्माण से जुड़े प्रतिनिधियों, जिनमें उन्होंने चंपत राय का नाम भी लिया, से उनकी मुलाकात हुई थी. उस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि मंदिर निर्माण जैसा पवित्र कार्य किया जा रहा है तो उसके लिए अवैध खनन से प्राप्त पत्थरों का उपयोग नहीं होना चाहिए.

गहलोत ने दावा किया कि उन्होंने कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी, जिसके बाद मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर संबंधित क्षेत्र को वन क्षेत्र से बाहर लाने की कार्रवाई हुई. उनके मुताबिक, इसके बाद कानूनी रूप से खनन संभव हुआ और मंदिर निर्माण के लिए पत्थर उपलब्ध कराए गए.

चढ़ावा विवाद पर क्या कहा?

प्रेस वार्ता के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि यदि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय आस्था के केंद्र से जुड़े किसी मामले में चोरी या वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आते हैं और उसकी चर्चा देश के गांव-गांव तक पहुंच जाती है, तो यह बेहद गंभीर विषय है.

उन्होंने कहा कि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित हो सकता है.हालांकि, उन्होंने स्वयं किसी जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष का हवाला नहीं दिया, बल्कि हाल में सामने आए आरोपों के संदर्भ में अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

कांग्रेस का रुख

कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही है कि सार्वजनिक जीवन और धार्मिक संस्थानों से जुड़े किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

अशोक गहलोत के बयान का भी मुख्य फोकस यही रहा कि यदि किसी संस्था या ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगते हैं तो तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे.

विवाद की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे और उससे जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से बयानबाजी देखने को मिली है. विपक्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाए हैं, जबकि मंदिर ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर इन आरोपों का खंडन भी किया जाता रहा है.

यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है.हालांकि, किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच अथवा सक्षम प्राधिकरण के आधिकारिक निष्कर्षों के आधार पर ही माना जाएगा.

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बंसी पहाड़पुर क्यों है महत्वपूर्ण?

राजस्थान का बंसी पहाड़पुर क्षेत्र अपने उच्च गुणवत्ता वाले गुलाबी बलुआ पत्थर (Sandstone) के लिए प्रसिद्ध है. राम मंदिर निर्माण में भी इसी क्षेत्र के पत्थरों का व्यापक उपयोग किया गया.

मंदिर निर्माण के दौरान इस पत्थर की मजबूती और टिकाऊ गुणवत्ता को देखते हुए इसे चुना गया था.पत्थर की आपूर्ति को लेकर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं भी चर्चा का विषय रही थीं, जिनका उल्लेख अशोक गहलोत ने अपनी प्रेस वार्ता में किया.

राजनीतिक महत्व

राम मंदिर देश की राजनीति और जनभावनाओं से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है.ऐसे में मंदिर निर्माण, चढ़ावा या ट्रस्ट से जुड़े किसी भी आरोप पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाती हैं.

अशोक गहलोत का यह बयान भी उसी क्रम में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने एक ओर कांग्रेस सरकार की भूमिका का उल्लेख किया तो दूसरी ओर वर्तमान विवाद पर चिंता व्यक्त की.

निष्कर्ष

अशोक गहलोत ने अपनी प्रेस वार्ता में दो प्रमुख बातें रखीं। पहली, राम मंदिर निर्माण के लिए बंसी पहाड़पुर से पत्थर कानूनी प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराने में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सहयोग किया था.दूसरी, उन्होंने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र संस्थान से जुड़े किसी भी कथित वित्तीय विवाद या चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे.

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि चढ़ावा या वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। किसी भी आरोप की पुष्टि केवल संबंधित जांच एजेंसियों या सक्षम प्राधिकरण के आधिकारिक निष्कर्षों से ही मानी जाएगी. इसलिए इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक तथ्यों और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।

स्रोत :यह समाचार अशोक गहलोत द्वारा X (पूर्व Twitter) पर साझा किए गए बयान और AICC प्रेस वार्ता में दिए गए उनके वक्तव्य के आधार पर तैयार किया गया है.

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