आवाज उठी तो लाठियां चलीं: क्या डर गई है सरकार?
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 —देश की राजधानी एक बार फिर युवाओं के आक्रोश और सत्ता के दमन का गवाह बना है. रामलीला मैदान में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे SSC अभ्यर्थियों और कुछ शिक्षक संगठनों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज ने ना केवल लोगों को झकझोर दिया है , बल्कि विपक्ष को सरकार के खिलाफ एकजुट होने का भी मौका दे दिया है.
इस पूरी घटना को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दिया है. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुये.राहुल ने लिखा है कि,यह सिर्फ़ लाठीचार्ज नहीं, बल्कि एक डरपोक सरकार की पहचान है जो युवाओं की आवाज़ से डरता है.
रोज़गार की मांग पर मिली लाठियां
राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कोई हिंसा नहीं किया वह तो, बस अपनी मांगें रख रहे थे — नौकरी और न्याय को लेकर, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया में उन्हें लाठियों का सामना करना पड़ा है राहुल ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि,
पहले ये सरकार वोट चुराती है, फिर परीक्षा और नौकरियों को भी छीन लेती है. अब आवाज़ उठाने पर डंडे बरसाए जा रहे हैं.
युवाओं के साथ कैसा न्याय?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि — क्या देश का युवा आज़ाद भारत में अपनी बात भी नहीं कह सकता? नौकरी की मांग करना कोई अपराध तो नहीं, फिर लाठीचार्ज क्यों?कई छात्रों और युवाओं ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर किया है,और सरकार से सवाल पूछा है कि हर बार शांति से अपनी बात कहने पर पुलिसिया बर्ताव ही क्यों मिलता है.
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राहुल गांधी ने फिर उठाया ईवीएम और लोकतंत्र पर सवाल
राहुल गांधी यहीं नहीं रुके आगे उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि यह सरकार जनता के वोटों से नहीं, ‘चुराए गए वोटों’ से सत्ता में आई है. उन्होंने कहा कि जब सत्ता में आने का रास्ता ही पारदर्शी नहीं है. तो फिर जनता की समस्याएं भला प्राथमिकता कैसे होंगी?
किसान,गरीब ,मजदूर ,अल्पसंख्यक सभी को नजरअंदाज किया जा रहा है
अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने ये भी दावा किया कि मौजूदा सरकार को न किसानों की चिंता है. न युवाओं की, और न ही समाज के वंचित तबकों की. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि,
इन लोगों को जनता का वोट नहीं चाहिए, इसलिए जनता की मांगें भी इनकी प्राथमिकता नहीं हैं.
अब क्या?
इस लाठीचार्ज और उसके बाद विपक्ष की प्रतिक्रियाओं के बाद माहौल गर्म हो चुका है.सोशल मीडिया पर SSC छात्रों के साथ न्याय करो जैसे ट्रेंड्स चल रहा हैं.आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को संसद से सड़क तक उठाने की तैयारी में है.
मेरा नाम रंजीत कुमार है और मैं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हूँ. मैं महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहन एवं विचारोत्तेजक लेखन में रुचि रखता हूँ। समाज में व्याप्त जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित तथा पठनीय शैली में प्रस्तुत करना मेरा मुख्य उद्देश्य है.
लेखन के अलावा, मूझे अकादमिक शोध पढ़ने, सामुदायिक संवाद में भाग लेने तथा समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने में गहरी दिलचस्पी है.



















