थार गाड़ी से रौंदकर 5 की हत्या,पूर्व विधायक पर लगे संगीन आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो बाढ़, 26 अगस्त 2025 — बिहार के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत जमानिया गांव में एक बेहद दर्दनाक और निंदनीय घटना सामने आई है. जानकारी के अनुसार, दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पाँच लोगों को एक तेज रफ्तार थार गाड़ी ने बेरहमी से कुचल दिया.जिसमें मासूम बच्चे भी शामिल थे. आरोप है कि यह गाड़ी पूर्व विधायक अनंत सिंह के गुर्गों द्वारा चलाया जा रहा था.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह घटना शाम करीब 5 बजे की है. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से पुलिस को घटनास्थल पर पहुँचने में पूरे छह घंटे लग गये. इस देरी ने न सिर्फ पीड़ितों के गुस्से को और भड़काया
राजनीतिक हलकों में उबाल, दलित नेता बोले – यह मानवता पर हमला है
इस घटना को लेकर राजद नेता अनिल कुमार साधु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि,
यह केवल एक हत्या नहीं है,बल्कि मानवता पर सीधा सीधा हमला है. अगर दलितों की जान की कोई कीमत नहीं है, तो फिर यह किसका शासन है — जनता का या बाहुबलियों का?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की निष्क्रियता यह दर्शाता है कि बिहार में अब कानून नहीं, बल्कि ताकतवरों का राज चल रहा है.साथ ही उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग किया है.
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ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन पर भरोसा टूटता नजर आ रहा है
घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है. जमानिया गांव के निवासियों का कहना है कि यह हमला पूर्व नियोजित था और प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है. ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि घटना के समय वहां मौजूद पुलिस चौकी को सूचित किया गया था.लेकिन कोई मदद नहीं आई.
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
अब तक इस घटना को लेकर जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है. न ही किसी गिरफ्तारी की पुष्टि हुआ है. घटनास्थल पर तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. लेकिन पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद धुंधली नजर आ रहा है.
क्या कहती है यह घटना बिहार की कानून व्यवस्था के बारे में?
यह घटना सिर्फ एक गांव की त्रासदी नहीं है.बल्कि बिहार के मौजूदा सिस्टम पर बड़ा सवालिया निशान है. जब आम नागरिक — खासकर समाज के हाशिए पर खड़े लोग — सुरक्षित नहीं हैं. तो राज्य की,सुशासन नीति पर कैसे भरोसा किया जाए?
निष्कर्ष
जमानिया की यह घटना एक बार फिर साबित करता है कि सामाजिक न्याय और कानून का राज केवल नारों तक सीमित रह गया है. जब तक दोषियों को कानूनी सजा नहीं मिलता. यह सवाल कायम रहेगा — क्या वाकई भारत में हर नागरिक समान रूप से सुरक्षित है?

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