एनडीए सरकार का तानाशाही रवैया उजागर, महिला शिक्षिका पर कार्रवाई से मचा बवाल

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Ajit Kumar

बिहार
एनडीए सरकार का तानाशाही रवैया उजागर, महिला शिक्षिका पर कार्रवाई से मचा बवाल

शिक्षिका को प्रताड़ित करने वालों पर कार्रवाई की बजाय पीड़िता पर नोटिस

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 6 सितंबर 2025:बिहार की राजनीति में एक बार फिर एनडीए सरकार का तानाशाही चेहरा सामने आया है. जहानाबाद में 4 सितंबर को हुए बंद के दौरान जिस महिला शिक्षिका के साथ एनडीए कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर गाली-गलौच और धक्का-मुक्की की थी, अब उसी पीड़िता पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) द्वारा नोटिस थमा दिया गया है.

शिक्षिका को प्रताड़ित करने वालों पर कार्रवाई की बजाय पीड़िता पर नोटिस

राजद ने इस कार्रवाई को महिला विरोधी और तानाशाही रवैया करार दिया है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाय पीड़िता महिला को ही कटघरे में खड़ा करना राज्य सरकार की संवेदनहीन मानसिकता को उजागर करता है.

शिक्षिका को प्रताड़ित करने वालों पर कार्रवाई की बजाय पीड़िता पर नोटिस

राजद प्रवक्ता गगन ने जहानाबाद की घटना को बिहार की आत्मा पर हमला बताया है. उनका कहना है कि शिक्षिका केवल अपने कर्तव्य पालन हेतु विद्यालय जा रही थीं, लेकिन एनडीए समर्थकों ने उन्हें सड़क पर रोका, गाली-गलौज किया और धक्का-मुक्की उनके साथ किया गया .
आगे उन्होंने कहा कि, यह न केवल महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला है बल्कि एनडीए के महिला विरोधी चरित्र का जीता-जागता उदाहरण है.

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महिला सम्मान पर चोट, शिक्षा जगत आहत

गगन ने कहा कि इससे बड़ी विडंबना क्या हो सकती है कि जिस महिला के साथ अभद्रता हुई, उसी को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेज दिया है.
उन्होंने इसे “मानसिक प्रताड़ना और नारी सम्मान के प्रति संवेदनहीनता की पराकाष्ठा” करार दिया है.

भाजपा-जेडीयू का असली चेहरा

राजद प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा-जेडीयू गठबंधन के चरित्र की असलियत है. उन्होंने कहा कि यह गठबंधन न केवल महिलाओं के सम्मान का विरोधी है बल्कि शिक्षा और शिक्षकों के प्रति भी शत्रुतापूर्ण रवैया रखता है.

राजद की मांग

राजद ने सरकार से मांग की है कि-

शिक्षिका को प्रताड़ित करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए.

जिला शिक्षा पदाधिकारी का पत्र वापस लिया जाए.

और पीड़ित शिक्षिका से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए.

निष्कर्ष

जहानाबाद की यह घटना बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ चुकी है. सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार महिला सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करने में असफल हो चुकी है? शिक्षिका पर नोटिस थमाने के इस तानाशाही रवैये ने न केवल शिक्षकों को झकझोरा है बल्कि बिहार की संस्कृति और सम्मान पर भी गहरी चोट पहुंचाई है.

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