दिल्ली को नशे की राजधानी बनाने का आरोप: क्या वाकई जिम्मेदार है केंद्र सरकार? — एक गहन विश्लेषण

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Ajit Kumar

भारत
दिल्ली को नशे की राजधानी बनाने का आरोप: क्या वाकई जिम्मेदार है केंद्र सरकार? — एक गहन विश्लेषण

दिल्ली में नशे का बढ़ता संकट: आंकड़े और जमीनी स्थिति क्या कहती है?

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,25 नवंबर 2025 — दिल्ली, भारत की राजधानी, जहां सपनों, अवसरों और प्रगति की चमक हर वक्त नजर आती है, अब एक ऐसे गंभीर संकट के केंद्र में दिखाई दे रही है जिसकी ओर समाज, राजनीति और प्रशासन—तीनों को मिलकर ध्यान देने की आवश्यकता है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने आज अपने आधिकारिक X (Twitter) पोस्ट में आरोप लगाया है कि BJP ने दिल्ली को नशे की राजधानी बना दिया है.
यह आरोप जितना बड़ा है, उतनी ही गंभीर है वह समस्या जिसका मुद्दा उठाया गया है.

AAP का कहना है कि देश में पिछले 11 वर्षों से केंद्र में BJP की सरकार है और दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है.ऐसे में, अगर दिल्ली में नशा लगातार बढ़ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे-सीधे केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर आती है. सवाल उठता है—क्या यह आरोप सिर्फ राजनीति है या इसके पीछे कोई ठोस आधार है? आइए इसे गहराई से समझने की कोशिश करते हैं.

दिल्ली में नशे का बढ़ता संकट: आंकड़े और जमीनी स्थिति क्या कहती है?

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में नशे से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दिल्ली के कई इलाकों—जैसे कि

गली-मोहल्ले,पार्क,बस स्टैंड,झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र,रेलवे स्टेशन के आसपास

इन जगहों पर नशेड़ी लोगों का खुलेआम मिलना अब आम दृश्य बन गया है.
यही नहीं, दिल्ली में हेरोइन, चरस, सिंथेटिक ड्रग्स, कोकेन और MD जैसी खतरनाक नशीली चीजों का नेटवर्क लगातार फैला है.अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि नशा दिल्ली के युवाओं को धीमे-धीमे खा रहा है, और भविष्य की पीढ़ी इसकी भारी कीमत चुकाएगी.

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब हम जानते हैं कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र के गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है. यानी कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और ड्रग नेटवर्क तोड़ने की पूरी जिम्मेदारी केंद्र की है.

AAP का आरोप: जिम्मेदार कौन?

AAP ने अपने पोस्ट में तीन मुख्य बातें कहीं है.

11 साल की BJP सरकार और बढ़ता नशा

AAP का कहना है कि पिछले एक दशक में भारत में नशे का कारोबार कई गुना बढ़ गया है,और इसका सबसे सीधा असर दिल्ली पर दिख रहा है.
बॉर्डर राज्यों से होकर आने वाली ड्रग्स का बड़ा हिस्सा राजधानी में पहुंच रहा है, जहां इसे युवा व गरीब समुदायों में तेजी से फैलाया जा रहा है.

दिल्ली पुलिस गृह मंत्री के अधीन—लेकिन कार्रवाई अपर्याप्त

दिल्ली पुलिस पूरी तरह गृह मंत्रालय के नियंत्रण में काम करती है.
ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नेटवर्क की निगरानी, सप्लाई चेन बंद करना, काले कारोबारी पकड़ना—ये सब केंद्र के दायरे में आता है.
फिर सवाल उठता है कि, अगर नशा बढ़ रहा है, तो जिम्मेदार कौन?

युवा पीढ़ी को खतरा, लेकिन सरकार मौन?

पार्कों, कॉलोनियों और झुग्गियों में छोटे बच्चे तक नशीले पदार्थों की पकड़ में आ रहे हैं.
नशा न केवल स्वास्थ्य बल्कि अपराध और सामाजिक अस्थिरता को भी बढ़ाता है.
AAP का आरोप है कि BJP को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वह केवल राजनीति में व्यस्त है.

नशे की समस्या: राजनीति से परे वास्तविकता

राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन सामाजिक रूप से यह समस्या कहीं अधिक गहरी है.
कई रिपोर्टें दिखाती हैं कि,

युवा बेरोज़गारी

परिवारिक विघटन

मानसिक तनाव

शहरी गरीबी

अपराध नेटवर्क

स्कूल-कॉलेज में खराब निगरानी

ये सभी कारण नशे की ओर लोगों को धकेलते हैं.
यह केवल दिल्ली की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश में फैली चुनौती है.

लेकिन राजधानी में इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है, क्योंकि यहां आबादी घनी है और गैरकानूनी तत्वों के लिए छिपने के मौके ज्यादा हैं.

केंद्र बनाम राज्य: जिम्मेदारी किसकी?

यह एक बड़ा सवाल है.दिल्ली की प्रशासनिक संरचना अनोखी है,

कानून-व्यवस्था

पुलिस

इंटेलिजेंस

ड्रग्स विरोधी कार्रवाई

ये सब केंद्र सरकार के पास हैं.
जबकि

स्कूल

स्वास्थ्य

मोहल्ला क्लीनिक्स

जागरूकता अभियान

इनकी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के हाथ में है.

अर्थात्,
नशे की समस्या कम करने के लिए दोनों सरकारों को समन्वय से काम करना चाहिए.

लेकिन राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप ने इसे और बिगाड़ दिया है.

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नशे के नेटवर्क को कैसे रोका जा सकता है? समाधान क्या?

दिल्ली पुलिस की जवाबदेही तय ह

केंद्र को दिल्ली पुलिस से हर महीने नशा रोकथाम की रिपोर्ट लेनी चाहिए.

बड़े ड्रग सप्लायरों पर कड़ी कार्रवाई

छोटे पकड़ने से काम नहीं चलेगा.
जब तक बड़े रैकेट खत्म नहीं होंगे, समस्या खत्म नहीं होगी.

स्कूल-कॉलेज में काउंसलिंग और जागरूकता

युवाओं को नशे के दुष्परिणाम समझाना अनिवार्य है.

पुनर्वास केंद्रों को मजबूत करना

नशे के शिकार लोगों को इलाज और मदद मिलनी चाहिए, न कि पुलिसिया डर.

सोशल मीडिया और डार्क-नेट की निगरानी बढ़े

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ड्रग्स खरीदना आसान हो गया है—इस पर विशेष नजर जरूरी है.

निष्कर्ष: राजनीति नहीं, समाधान जरूरी

AAP का आरोप राजनीतिक रूप से अहम है, और इसमें कुछ हद तक तथ्य भी हैं क्योंकि दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर है.
लेकिन वास्तविकता यह है कि नशे की समस्या केवल आरोपों से खत्म नहीं होगी—इसके लिए जिम्मेदारी, कार्रवाई, समन्वय और इच्छाशक्ति—चारों की जरूरत है.

दिल्ली के युवाओं का भविष्य दांव पर है.
नशे का फैलता जाल केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक आपातकाल है—जिसे जितनी जल्दी समझा जाए, उतना बेहतर है.

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