गुजरात से उठी चिंता, देशभर में 27 BLO की मौत!

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Ajit Kumar

भारत
गुजरात से उठी चिंता, देशभर में 27 BLO की मौत!

क्या SIR का दबाव बन रहा है जानलेवा?

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,29 नवंबर 2025 — हाल ही में गुजरात में BLO दिनेश कुमार रावल की मौत ने पूरे देश का ध्यान एक बेहद गंभीर मुद्दे की ओर खींचा है.कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X (Twitter) अकाउंट से जारी पोस्ट में दावा किया कि रावल पर SIR कार्यों का अत्यधिक दबाव था और वे देर रात तक काम करते थे. परिजनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि काम का बोझ बढ़ने के कारण उनकी मृत्यु हुई.

यह घटना एक अकेला मामला नहीं है.कांग्रेस ने बताया कि देशभर में अब तक 27 BLO और SIR से जुड़े कर्मचारियों की मौत या आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं. यह आंकड़ा न सिर्फ भयावह है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कई गंभीर प्रश्न भी खड़ा करता है.

उत्तर प्रदेश: लगातार बढ़ते हादसे और आत्महत्या के मामले

उत्तर प्रदेश SIR और BLO कर्मचारियों की मौत और आत्महत्या के मामलों में सबसे आगे रहा है.
यहां जिन लोगों ने जान गंवाई, उनमें शामिल हैं,

BLO विजय कुमार वर्मा — मौत

BLO विपिन यादव — आत्महत्या

BLO सर्वेश कुमार गंगवार — मौत

SIR सुपरवाइजर सुधीर कोरी — आत्महत्या

इन घटनाओं से यह साफ समझ आता है कि इस स्तर पर काम करने वाले इन कर्मचारियों पर कार्य का दबाव कितना गहरा है.

केरल: अनीश जॉर्ज ने आत्महत्या की

केरल से भी एक चिंताजनक घटना सामने आई जहां

अनीश जॉर्ज ने आत्महत्या की

परिवारजन और स्थानीय लोगों ने इस मामले में कार्यभार को प्रमुख कारण बताया है.यह एक बार फिर काम के दबाव की समस्या को पहचानने की आवश्यकता पर जोर देता है.

तमिलनाडु: लगातार बढ़ रहा स्ट्रेस

तमिलनाडु से दो घटनाओं ने पूरे महकमे को हिला कर रख दिया है.

BLO जहिता — आत्महत्या

आंगनबाड़ी सेविका — आत्महत्या का प्रयास

यह बताता है कि तनाव और अव्यवस्थित सिस्टम सिर्फ BLO को ही नहीं बल्कि संबंधित कर्मचारियों को भी प्रभावित कर रहा है.

पश्चिम बंगाल: चार मौतें और आत्महत्या के मामले

पश्चिम बंगाल से आई घटनाएं भी हालात की गंभीरता को दर्शाती हैं.

BLO नम‍िता — मौत

BLO शांत‍ि — आत्महत्या

BLO जाकिर हुसैन हक — मौत

BLO रिंकू तरफदार — आत्महत्या

यह आंकड़े दिखाते हैं कि SIR कार्यों के दौरान सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सपोर्ट सिस्टम की अत्यंत कमी है.

राजस्थान: मानसिक दबाव ने ली कई जानें

राजस्थान से भी चिंताजनक घटनाएं दर्ज की गई हैं.

BLO हरिओम बैरवा — मौत

BLO मुकेश जांगिड — आत्महत्या

SIR सुपरवाइजर संतराम — मौत

इन मामलों ने प्रशासनिक प्रबंधन और अधिकारी-कर्मचारी संबंधों पर सवाल खड़े किए हैं.

मध्य प्रदेश: सबसे अधिक मौतें और आत्महत्याएं

कांग्रेस की सूची में सबसे ज्यादा घटनाएं मध्य प्रदेश से दर्ज की गईं, जिनमें शामिल हैं.

BLO उदयभान — आत्महत्या

BLO मनीराम नापित — मौत

BLO सुजान सिंह रघुवंशी — मौत

BLO भुवन — मौत

BLO रमाकांत पांडे — मौत

BLO सीताराम गोंड — मौत

BLO अनिता नागेश्वर — मौत

नायब तहसीलदार कविता कड़ेला — आत्महत्या

यहाँ की घटनाएँ साफ संकेत देती हैं कि SIR प्रक्रियाएं कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं.

गुजरात: जिस घटना ने राष्ट्रीय बहस छेड़ी

गुजरात में इन कर्मचारियों की मौत की सूची में.

BLO अरविंद — आत्महत्या

BLO रमेशभाई परमार — मौत

BLO डिंकल सिंगोड़ावाला — मौत

BLO सहायक उषाबेन — मौत

BLO सहायक कल्पना पटेल — मौत

BLO दिनेश कुमार रावल — मौत

रावल की मौत ने इस पूरे मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बना दिया है.

क्या SIR सिस्टम में सुधार की ज़रूरत है?

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, लेकिन इस प्रक्रिया में BLOs पर डाले जाने वाले कार्यभार को लेकर गंभीर सवाल लंबे समय से उठ रहे हैं.

लंबी ड्यूटी

लगातार डेटा एंट्री

फील्ड वेरिफिकेशन

सख्त समयसीमा

अपर्याप्त स्टाफ

ये सब मिलकर BLO और सुपरवाइज़र्स को ऐसी स्थिति में पहुँचा देते हैं जहाँ मानसिक और शारीरिक तनाव चरम पर पहुँच जाता है.

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कांग्रेस की मांग: जिम्मेदारी तय हो, परिवारों को न्याय मिले

Congress @INCIndia ने स्पष्ट कहा है कि 27 मौतें किसी आकस्मिक घटना का हिस्सा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और काम के असहनीय बोझ का नतीजा हैं.

पार्टी की मांगें —
SIR कार्य प्रणाली की समीक्षा
BLO कार्य समय और बोझ पर नियंत्रण
मनोवैज्ञानिक सहायता प्रणाली
परिवारों को उचित मुआवज़ा
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

निष्कर्ष: समय रहते परिवर्तन ज़रूरी

SIR और BLO प्रणाली लोकतंत्र की रीढ़ हैं, लेकिन इन कर्मचारियों के कल्याण को सुनिश्चित किए बिना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सुचारु रूप से चल पाना असंभव है.27 मौतें केवल आँकड़े नहीं — यह एक चेतावनी है कि सिस्टम में तत्काल सुधार की आवश्यकता है.

अगर समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मानव जीवन दोनों के लिए गंभीर संकट साबित हो सकता है.

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