नेशनल हेराल्ड केस: सुप्रिया श्रीनाथ का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ED पर FIR लीक करने का गंभीर आरोप

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Ajit Kumar

भारत
नेशनल हेराल्ड केस: सुप्रिया श्रीनाथ का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ED पर FIR लीक करने का गंभीर आरोप

ED की FIR पर उठते सवाल: क्या सरकार जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है?

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,30 नवंबर 2025 — नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में है. कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनाथ ने मोदी सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर राजनीतिक प्रतिशोध का बड़ा आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है.सोशल मीडिया पर जारी किए अपने विस्तृत पोस्ट में उन्होंने न केवल ED की कार्रवाई पर सवाल उठाए, बल्कि इससे जुड़ी नई FIR के कथित लीक को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए है.चुनावी मौसम के बीच इस मुद्दे का उभरना कई राजनीतिक प्रश्न खड़े कर रहा है.

12 साल पुराना मामला—अब क्यों सक्रिय हुई ED?

सुप्रिया श्रीनाथ का कहना है कि नेशनल हेराल्ड केस में पिछले 12 वर्षों में ED ने एक भी समन जारी नहीं किया है. जिस प्रेडिकेट ऑफेंस पर यह पूरा मामला टिका है, उसमें आज तक आरोप तय नहीं हुए, और मामला अदालत में स्थगित पड़ा है. सुप्रिया का आरोप है कि इतने वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद अचानक चुनावी सीजन में ED की सक्रियता यह दर्शाती है कि यह कोई सामान्य कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरी तरह चुनावी रणनीति का हिस्सा है.

उनका कहना है कि जिस केस में न FIR थी, न समन, न नई कार्रवाई—उसी केस में अचानक FIR दर्ज कर देना और उसे मीडिया तक पहुँचाना बेहद संदिग्ध है.

सीलबंद FIR का लीक होना—सबसे बड़ा सवाल

श्रीनाथ के बयान का सबसे संवेदनशील हिस्सा FIR लीक को लेकर है. उन्होंने दावा किया कि अदालत ने साफ़ आदेश दिया था कि नई FIR सीलबंद लिफाफे में रहेगी और किसी भी आरोपी के साथ साझा नहीं की जाएगी.

फिर भी, कुछ ही घंटों के भीतर FIR की जानकारी सोशल मीडिया और चुनिंदा मीडिया हाउस तक पहुँच गई.सुप्रिया का सीधा आरोप है कि,

जब FIR की जानकारी सिर्फ़ ED और EOW के पास थी, तो यह लीक कैसे हुई? क्या इसे जानबूझकर मीडिया में फैलाया गया?

कांग्रेस का आरोप है कि FIR को लीक करके विपक्ष के खिलाफ़ एक नकारात्मक छवि बनाई जा रही है, ताकि जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा सके.

कायर और डरपोक सरकार – सुप्रिया का सीधा हमला

सुप्रिया श्रीनाथ ने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी कठघरे में खड़ा करते हुए लिखा है कि,

यह एक कायर और डरपोक सरकार है. मोदी जी, चाहे जितनी कोशिश कर लीजिए, आप कांग्रेस को न डरा सकते हैं, न झुका सकते हैं.

उनके इस बयान को कांग्रेस नेताओं ने बड़े पैमाने पर रीपोस्ट किया, जिससे साफ़ होता है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुकी है.

नेशनल हेराल्ड केस: क्या है पूरा विवाद?

नेशनल हेराल्ड अख़बार की स्थापना 1937 में जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी.बाद में आर्थिक संकट के कारण यह बंद हो गया और इसकी संपत्ति Associated Journals Limited (AJL) तथा Young Indian Pvt Ltd के पास चली गई.

2012 में BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं द्वारा AJL की संपत्तियों को Young Indian में अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया.इसी आरोप के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया.

कांग्रेस का दावा है कि Young Indian एक नॉट-फॉर-प्रॉफ़िट कंपनी है और इस पूरे लेन-देन में कोई व्यावसायिक लाभ नहीं हुआ है .

राजनीतिक प्रतिशोध या स्वतंत्र एजेंसी की कार्रवाई?

यह केस शुरू से ही राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है. विपक्ष लगातार आरोप लगाता है कि बीजेपी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में ED, CBI और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया है.

उदाहरण के तौर पर नाम लिए जाते हैं,

मनीष सिसोदिया

संजय सिंह

अभिषेक बनर्जी

सोनिया गांधी

राहुल गांधी

सरकार इन सभी आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि कानून सबके लिए बराबर है और एजेंसियाँ पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करती हैं.

2024–25 के चुनावी माहौल में FIR की टाइमिंग संदेहास्पद

नेशनल हेराल्ड केस में नई FIR दर्ज होने की टाइमिंग भी इस विवाद को और गहरा करती है. महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव में बीजेपी गठबंधन को झटका लगने के कुछ ही दिनों बाद यह कार्रवाई सामने आई.इससे राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि,

क्या यह विपक्ष की बढ़ती ताकत को रोकने का प्रयास है?
या फिर यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया है जो अब आगे बढ़ रही है?

सुप्रिया और कांग्रेस का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह सियासी उद्देश्यों से प्रेरित है.

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कांग्रेस का जवाब: हम डरने वाले नहीं

सुप्रिया श्रीनाथ की पोस्ट के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इस मामले को बड़े पैमाने पर उठाना शुरू कर दिया है.पार्टी साफ़ संकेत दे रही है कि वह सरकार की किसी भी धमकीपूर्ण कार्रवाई से घबराने वाली नहीं, बल्कि और मजबूती से मैदान में उतरने वाली है.

संसद का शीतकालीन सत्र भी नजदीक है, इसलिए यह मामला वहाँ भी जोरदार तरीके से उठाया जा सकता है.

निष्कर्ष

नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर भारतीय राजनीति को गरमा रहा है.FIR के कथित लीक, अचानक ED की सक्रियता और चुनावी टाइमिंग इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं. सुप्रिया श्रीनाथ के आरोपों ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है और कांग्रेस अब आक्रामक मोड में दिखाई दे रही है.

अब देखना यह है कि अदालत, ED और राजनीतिक दल—इस प्रकरण में आगे क्या कदम उठाते हैं.
एक बात निश्चित है कि,
एजेंसी बनाम राजनीतिक प्रतिशोध की यह बहस आने वाले महीनों में भारतीय राजनीति के केंद्र में बनी रहेगी.

न्यूज़ स्रोत :कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनाथ के आधिकारिक X हैंडल @SupriyaShrinate से 29-30 नवंबर 2025 की पोस्ट के आधार पर

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