3 दिसंबर को बिहार में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन

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Ajit Kumar

बिहार
3 दिसंबर को बिहार में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन

गरीबों–दलितों पर हमले का आरोप तेज

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,30 नवंबर 2025— बिहार की राजनीति में चुनावी परिणामों के बाद एक नई बहस तेज हो गई है—गरीबों, दलितों और वंचित समुदायों पर बढ़ती बुलडोजर कार्रवाई को लेकर. भाकपा–माले ने इसे सीधे तौर पर दलित और गरीब विरोधी हमला बताया है और 3 दिसंबर 2025 को बिहार विधानसभा के समक्ष बड़े स्तर पर धरना तथा राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है.
केंद्रीय कमिटी की तीन दिवसीय बैठक के उपरांत पार्टी के राज्य सचिव कुणाल का यह बयान प्रदेश की सामाजिक–राजनीतिक स्थिति को लेकर गंभीर संकेत देता है.

दलितों–गरीबों पर बुलडोजर कार्रवाई: भाकपा–माले का गंभीर आरोप

भाकपा–माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही पूरे राज्य में दलित और गरीब समुदायों पर बुलडोजर चलाने की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं.
इन कार्रवाइयों को उन्होंने जनता पर सीधा हमला, लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे अभियान उस समय चलाए जा रहे हैं जब सरकार को लोगों को सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन देने पर ध्यान देना चाहिए.
इसके बजाय गरीब आबादी को विस्थापित किया जा रहा है, जिससे समाज में असुरक्षा और भय का वातावरण बन रहा है.

नालंदा का मामला: उदाहरण या चेतावनी?

कुणाल ने नालंदा जिले के शिवनन्दन नगर का उदाहरण देते हुए कहा कि पासवान जाति के गरीब परिवारों पर बुलडोजर चलाया गया और उन्हें बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के विस्थापित कर दिया गया.

उन्होंने कहा है कि,

यह कोई एक मामला नहीं है.पूरे राज्य में दलित और गरीब लोगों पर ऐसी कार्रवाइयाँ तेजी से बढ़ रही हैं.हमें इस श्रृंखला को तुरंत रोकना होगा.

भाकपा–माले का कहना है कि ऐसी घटनाएं सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की नींव को कमजोर करती हैं, और सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए.

फुटपाथ दुकानदारों पर कार्रवाई: आजीविका पर सीधा हमला

फुटपाथ दुकानदार लंबे समय से शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा हैं. कई गरीब परिवार इन्हीं दुकानों के भरोसे घर चलाते हैं.
लेकिन कुणाल का दावा है कि सर्वेक्षण किए गए और नगर निगम द्वारा वेंडिंग पहचान-पत्र प्राप्त दुकानदारों तक को हटाया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि पटना में

न्यू मार्केट

महावीर मंदिर

वीणा सिनेमा

दक्षिण बुद्ध पार्क
इन सभी क्षेत्रों में सर्वेक्षित दुकानदारों को भी जबरन हटाने की कार्रवाई हुई है.

भाकपा–माले नेता का कहना है कि यह अतिक्रमण हटाओ की आड़ में गरीबों की आजीविका छीनने का प्रयास है, जो न केवल सामाजिक रूप से गलत है बल्कि कानूनी और नैतिक रूप से भी अस्वीकार्य है.

सरकार से तत्काल रोक की मांग

कुणाल ने स्पष्ट शब्दों में मांग रखी कि,

बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगे

लोगों की जमीन, दुकान और आजीविका को सुरक्षा दी जाए

प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा व पुनर्वास मिले

स्थानीय प्रशासन मनमानी कार्रवाई बंद करे

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का पहला दायित्व कमजोर और वंचित वर्गों की रक्षा करना है.
अगर राज्य मशीनरी उन्हीं लोगों को प्रभावित करने लगे जिनकी वह संरक्षक है, तो यह लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए खतरनाक संकेत है.

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3 दिसंबर का आंदोलन: एकजुटता का प्रतीक

भाकपा–माले ने 3 दिसंबर 2025 को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन, सभाएँ और विधानसभा के समक्ष बड़ा धरना आयोजित करने की घोषणा की है.
पार्टी ने आम जनता, सामाजिक संगठनों, मजदूर–किसान यूनियनों और छात्र–युवा वर्ग से भी इसमें शामिल होने की अपील की है.

कुणाल ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे बिहार के गरीबों, दलितों और मेहनतकश वर्गों के अधिकारों की लड़ाई है.

आंदोलन का संदेश: लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा

3 दिसंबर का यह धरना केवल प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि

गरीबी में जी रहे परिवारों के अधिकारों की लड़ाई

संविधान की मूल भावना की रक्षा

दलित–वंचित समाज के सम्मान की पुकार
का प्रतीक है.

भाकपा–माले ने स्पष्ट किया है कि जब तक बुलडोजर राजनीति रुकेगी नहीं, तब तक उनकी लड़ाई भी जारी रहेगी.

निष्कर्ष

बिहार में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में तनाव बढ़ चुका है.
भाकपा–माले द्वारा उठाई गई यह लड़ाई सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों पर केंद्रित है.
3 दिसंबर को होने वाला राज्यव्यापी आंदोलन न केवल सरकार के लिए एक संदेश होगा, बल्कि यह बताने का भी प्रयास होगा कि,
गरीबों और दलितों की आवाज़ दबाई नहीं जा सकती.

यह आंदोलन आने वाले समय में बिहार की राजनीति और प्रशासनिक नीतियों को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा.

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