संविधान का सबसे बड़ा अधिकार: वोट की ताकत
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,13 दिसंबर 2025— भारतीय लोकतंत्र की नींव संविधान पर टिकी है, और संविधान का सबसे सशक्त औज़ार है,हर नागरिक का वोट का अधिकार.यही अधिकार सरकारों को वैधता देता है, सत्ता को जवाबदेह बनाता है और जनता की आकांक्षाओं को नीतियों में ढालता है. लेकिन हाल के समय में इस अधिकार पर गंभीर सवाल उठा हैं.कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि वोटर लिस्ट में धांधली, मनमाने ढंग से SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) और EVM में गड़बड़ी के ज़रिये लोकतंत्र की आत्मा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
कांग्रेस के आधिकारिक X (Twitter) पोस्ट के अनुसार, पार्टी का दावा है कि राहुल गांधी ने लगातार तथ्यों और सबूतों के साथ यह दिखाने की कोशिश की है कि मौजूदा सत्ता और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े संस्थानों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं. यह सिर्फ किसी एक दल का राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है.
वोटर लिस्ट में धांधली: लोकतंत्र की जड़ों पर वार
वोटर लिस्ट किसी भी चुनाव की आधारशिला होती है. यदि सूची ही संदिग्ध हो जाए, तो निष्पक्ष चुनाव की कल्पना अधूरी रह जाती है. कांग्रेस का कहना है कि नामों का अनावश्यक विलोपन, नए नाम जोड़ने में पक्षपात और सत्यापन प्रक्रियाओं में असंगतियाँ सामने आ रही हैं.इन कथित गड़बड़ियों का सीधा असर उन नागरिकों पर पड़ता है, जिनका संवैधानिक अधिकार मतदान से पहले ही छीन लिया जाता है.
यह चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में वोटर लिस्ट की शुद्धता ही चुनावी भरोसे का मूल आधार है.यदि नागरिकों को यह विश्वास न रहे कि उनका नाम सुरक्षित है, तो लोकतंत्र कमजोर पड़ता है.
SIR और प्रक्रियागत पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया हैं.आरोप है कि इस प्रक्रिया को मनमाने ढंग से लागू किया गया है , जिससे बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम प्रभावित हुआ है. लोकतंत्र में किसी भी प्रशासनिक कदम का उद्देश्य समावेशन होना चाहिए, न कि बहिष्कार. जब प्रक्रियाएँ अस्पष्ट हों और जवाबदेही तय न हो, तो संदेह स्वाभाविक है.
EVM पर बहस: भरोसा बनाम संदेह
EVM भारत की चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं.वर्षों से इनकी सुरक्षा और विश्वसनीयता पर बहस चलती रही है. कांग्रेस का आरोप है कि हालिया चुनावों में EVM से जुड़ी अनियमितताओं ने भरोसे को कमजोर किया है. पार्टी का कहना है कि जब सवाल उठें, तो उनका समाधान पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच से होना चाहिए, न कि उन्हें खारिज कर देने से.
लोकतंत्र में भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है.यदि जनता का भरोसा डगमगाता है, तो संस्थाओं की साख पर असर पड़ता है.
राहुल गांधी की भूमिका और वोट चोरी का आरोप
राहुल गांधी ने बार-बार सार्वजनिक मंचों पर यह मुद्दा उठाया है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता अनिवार्य है. कांग्रेस का दावा है कि प्रस्तुत किए गए तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.‘वोट चोरी’ का आरोप इसी संदर्भ में सामने आया है,एक ऐसा आरोप जो सीधे-सीधे जनता की संप्रभुता से जुड़ा है.
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14 दिसंबर: रामलीला मैदान से जनजागरण
इन्हीं मुद्दों को लेकर 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया जा रहा है. कांग्रेस इसे नए जनजागरण की शुरुआत बता रही है. ऐतिहासिक रामलीला मैदान, जो अतीत में कई निर्णायक आंदोलनों का साक्षी रहा है, एक बार फिर लोकतंत्र के समर्थन में गूंजने को तैयार है.
इस रैली का नारा—वोट चोर – गद्दी छोड़—सिर्फ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सत्ता से जवाबदेही की मांग है. कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक दल के लिए नहीं, बल्कि हर उस नागरिक के लिए है जो अपने वोट की ताकत पर भरोसा करता है.
लोकतंत्र की रक्षा: नागरिकों की भूमिका
लोकतंत्र केवल चुनाव के दिन मतदान तक सीमित नहीं है.यह निरंतर सतर्कता, सवाल पूछने और अधिकारों की रक्षा की प्रक्रिया है.यदि वोट के अधिकार पर संकट है, तो उसका समाधान भी जनभागीदारी से ही निकलेगा.शांतिपूर्ण आंदोलन, संवैधानिक तरीकों से विरोध और संस्थागत सुधार,यही लोकतंत्र को मज़बूत बनाता हैं.
निष्कर्ष
कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवाल देश की चुनावी व्यवस्था पर व्यापक बहस की मांग करते हैं. वोटर लिस्ट, SIR और EVM जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है.14 दिसंबर की रैली को पार्टी लोकतंत्र बचाने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देख रही है.अंततः, लोकतंत्र की ताकत जनता में निहित है, और उसका सबसे बड़ा हथियार है,निष्पक्ष और सुरक्षित वोट.

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