आदिवासी फंड से PM रैली? गुजरात में 50 करोड़ खर्च का आरोप

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Ajit Kumar

भारत
गुजरात में आदिवासी कल्याण फंड पर आरोप लगाते अरविंद केजरीवाल

RTI के हवाले से PM रैली पर 50 करोड़ खर्च होने का दावा

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली / गुजरात,19 जनवरी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में आदिवासी समाज की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि संविधान के तहत आदिवासी कल्याण के लिए हर साल आने वाले अरबों-खरबों रुपये ज़मीन तक नहीं पहुँच पा रहा हैं और इन पैसों का इस्तेमाल कथित तौर पर राजनीतिक आयोजनों में किया जा रहा है.

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि आज गुजरात में सबसे ज़्यादा पिछड़ा अगर कोई समाज है, तो वो आदिवासी समाज है.सवाल है कि आखिर क्यों?

उन्होंने आगे दावा किया कि आदिवासियों के नाम पर आने वाला कल्याण फंड उनके गांवों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार तक नहीं पहुँच रहा.

RTI के हवाले से 50 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा

केजरीवाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि देडियापाड़ा में प्रधानमंत्री की रैली पर आदिवासी कल्याण फंड से करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किया गया . उनके मुताबिक यह जानकारी RTI (सूचना के अधिकार) के जरिए सामने आई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि यह पैसा आदिवासी बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोज़गार के लिए था, न कि चुनावी भीड़ जुटाने के लिए.
केजरीवाल ने कहा कि यदि ये धनराशि सही मायनों में आदिवासी इलाकों में खर्च होती, तो आज वहां की तस्वीर अलग होती.

आदिवासी इलाकों की जमीनी हकीकत पर सवाल

गुजरात के कई आदिवासी बहुल जिलों में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठते रहा हैं. जानकारों के अनुसार, कई इलाकों में स्कूलों में शिक्षकों की कमी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों का अभाव और रोज़गार के सीमित अवसर जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं.

केजरीवाल ने इसी संदर्भ में कहा कि अगर आदिवासी कल्याण फंड का सही इस्तेमाल हुआ होता, तो आदिवासी समाज आज सबसे पिछड़ा नहीं होता.
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय को उनका संवैधानिक हक़ मिलना चाहिए.

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

अरविंद केजरीवाल के इस बयान के बाद गुजरात की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी इसे आदिवासी अधिकारों और जवाबदेही का मुद्दा बता रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अब तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए आदिवासी मतदाता एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया हैं.गुजरात में आदिवासी समाज की आबादी कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाती है.

आदिवासी कल्याण फंड क्या है?

संविधान के प्रावधानों के तहत केंद्र और राज्य सरकारें आदिवासी उप-योजना (TSP) और अन्य योजनाओं के माध्यम से आदिवासी कल्याण के लिए अलग से बजट का प्रावधान करती हैं. इस फंड का उद्देश्य है,

आदिवासी बच्चों की शिक्षा

स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

रोज़गार और आजीविका के अवसर

बुनियादी ढांचे का विकास

यदि इस फंड का उपयोग तय उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में होता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक और नैतिक सवाल खड़े करता है.

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जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

केजरीवाल ने अपने बयान के जरिए सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के नाम पर आने वाले हर रुपये का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सरकार का काम जनता की सेवा करना है, न कि कल्याणकारी फंड का राजनीतिक उपयोग.

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि,

क्या सरकार इन आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है.

RTI में सामने आई जानकारी को लेकर कोई जांच होती है या नहीं.

आदिवासी कल्याण फंड के उपयोग पर सार्वजनिक ऑडिट की मांग तेज होती है या नहीं.

फिलहाल, अरविंद केजरीवाल के इस बयान ने गुजरात में आदिवासी मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है.

नोट:यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है. आरोपों को संबंधित पक्ष का दावा मानते हुए प्रस्तुत किया गया है.

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