छात्रहित के मुद्दों पर आइसा आंदोलन के आगे झुका विश्वविद्यालय प्रशासन
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 21 जनवरी 2026 पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में छात्र संगठन आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) द्वारा छात्रहित की मांगों को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन अनशन दूसरे दिन प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाप्त कर दिया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन और आइसा प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई लंबी वार्ता के बाद कुलसचिव प्रो. अबू बकार ने अनशन पर बैठी आइसा नेत्री आशना कुमारी और काजल को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया.

इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि छात्र-छात्राओं से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों पर 24 घंटे के भीतर सकारात्मक पहल की जाएगी और एक सप्ताह के अंदर अधिकांश मांगों को पूरा किया जाएगा. आइसा ने इसे छात्र आंदोलन की नैतिक जीत बताते हुए कहा कि यह संघर्ष छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए था और आगे भी संगठन सतर्क रहेगा.
पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रखीं छात्र समस्याएं
आइसा की ओर से गठित पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में आइसा राज्य अध्यक्ष प्रीति कुमारी, अनशनकारी छात्र नेता आशना कुमारी और काजल, मुस्कान सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि शामिल थे. इस प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. राजीव रंजन, प्रॉक्टर कृति और सीसीडीसी डॉ. शिव कुमार यादव से घंटों चली वार्ता में कॉलेजों से जुड़ी तमाम गंभीर समस्याओं को सामने रखा.
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कॉलेजों में छात्रों से नामांकन और प्रमाण-पत्रों के नाम पर मनमानी और असमान शुल्क वसूली की जा रही है, जिससे विशेषकर छात्राओं को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है.

प्राचार्य पर उच्च स्तरीय जांच की मांग
आइसा ने कॉलेज प्राचार्य डॉ. पूनम के खिलाफ तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग उठाई. प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता के दौरान ऐसे कई साक्ष्य प्रस्तुत किए जिनसे यह स्पष्ट होता है कि एक ही सेमेस्टर की छात्राओं से अलग-अलग राशि वसूली गई.
आइसा नेताओं के अनुसार, कुछ छात्राओं से नामांकन शुल्क मात्र 50 रुपये लिया गया, जबकि उसी सेमेस्टर की अन्य छात्राओं से 1000 रुपये से अधिक की वसूली की गई.इसके अतिरिक्त आईडी कार्ड, बोनाफाइड सर्टिफिकेट, लाइब्रेरी शुल्क, नो-ड्यूज और अन्य मिसलेनियस चार्ज के नाम पर भी मनमानी की जा रही थी.
सभी वर्गों के छात्रों का नामांकन सुनिश्चित करने का आश्वासन
प्रशासन के साथ हुई वार्ता में यह सहमति बनी कि, सभी वर्गों के सभी सेमेस्टर के छात्रों का नामांकन लिया जाएगा.
वंचित छात्राओं का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा.
गलत तरीके से वसूले गए नामांकन शुल्क को वापस किया जाएगा.
आइसा का कहना है कि ये मांगें लंबे समय से छात्रों द्वारा उठाई जा रही थीं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा.

कैंपस में अराजकता और मानसिक उत्पीड़न का आरोप
आइसा नेताओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज कैंपस में प्रशासनिक मनमानी के कारण अराजक स्थिति बन रही थी.छात्राओं को अनावश्यक दबाव में रखा जा रहा था, जिससे उनका शैक्षणिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा था. आइसा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का माहौल भय और शोषण से मुक्त होना चाहिए, न कि मुनाफाखोरी का अड्डा.
आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल
इस आंदोलन में आइसा की कई छात्र नेत्रियां और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से शामिल रहीं. इनमें प्रमुख रूप से अदिती, रुखसार, काजल, स्वीटी, नैंसी, अपराजिता, प्रतिभा, तनिषा, सुप्रिया, आयुषी, मुस्कान, सीमा सहित कई छात्राएं मौजूद थीं.
इसके अलावा पटना विश्वविद्यालय के संयोजक नीतीश कुमार, सह-संयोजक ऋषि कुमार, सुमित कुमार, सोनू विवेक और अन्य छात्र साथी भी आंदोलन के दौरान एकजुट होकर छात्रहित की मांगों के समर्थन में खड़े रहे.
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आइसा ने दी चेतावनी, वादे पूरे न हुए तो आंदोलन फिर तेज होगा
आइसा राज्य अध्यक्ष प्रीति कुमारी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिया गया आश्वासन अगर समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया, तो आइसा पुनः आंदोलन करने को मजबूर होगी. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक कॉलेज या एक विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और समानता की है.
आइसा ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन छात्र-छात्राओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगा और किसी भी प्रकार की मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
निष्कर्ष
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में आइसा का यह आंदोलन न केवल छात्र समस्याओं को उजागर करने में सफल रहा, बल्कि प्रशासन को बातचीत के लिए मजबूर करने का भी उदाहरण बना. अनशन की समाप्ति के साथ ही अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं.यदि वादे जमीन पर उतरे, तो यह छात्र आंदोलन की बड़ी उपलब्धि होगी।

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