मोदी सरकार की विदेश नीति पर AAP का बड़ा हमला, अमेरिका के सामने झुकने का आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,7 मार्च 2026 :देश की विदेश नीति को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आज भारत की विदेश नीति स्वतंत्र नहीं रह गया है और देश अमेरिका के फैसलों के पीछे चलने वाला राष्ट्र बनता जा रहा है.
Aam Aadmi Party के राष्ट्रीय प्रवक्ता Anurag Dhanda ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर पोस्ट के माध्यम से यह आरोप लगाया कि कभी अंतरराष्ट्रीय विवादों में भारत को एक संतुलित और निष्पक्ष ताकत के रूप में देखा जाता था, लेकिन मौजूदा समय में स्थिति बदलती हुई नजर आ रहा है.
उनका कहना है कि भारत की वह वैश्विक पहचान कमजोर हो रहा है, जो दशकों तक उसकी कूटनीति की सबसे बड़ी ताकत रही है.
भारत की एक अलग वैश्विक पहचान थी
अनुराग ढांडा ने अपने बयान में कहा कि एक समय ऐसा था जब दुनिया में किसी भी बड़े विवाद या अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में कई देश भारत की ओर देखता था.
भारत को एक ऐसा देश माना जाता था जो न तो किसी शक्ति का पिछलग्गू था और न ही किसी दबाव में फैसला लेता था.
उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत स्वतंत्र निर्णय और संतुलित कूटनीति रहा है.
लेकिन AAP का आरोप है कि वर्तमान समय में यह संतुलन कमजोर होता दिखाई दे रहा है और कई मामलों में भारत की नीति अमेरिका के निर्णयों के अनुरूप चलता हुआ नजर आता है.
मोदी सरकार हर अमेरिकी फैसले पर ‘हाँ’ कह देती है
AAP प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है कि मौजूदा समय में हालात ऐसा बन गया है कि अमेरिका जो भी निर्णय लेता है, भारत सरकार उस पर सहमति जताता हुआ नजर आता है.
उनके मुताबिक, भारत के इतिहास में ऐसा शायद ही कभी देखने को मिला हो कि कोई प्रधानमंत्री किसी वैश्विक शक्ति के सामने इस तरह झुकता हुआ दिखाई दे.
AAP का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र रुख बनाए रखना चाहिए, ताकि देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे.
विदेश नीति पर विपक्ष के लगातार सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाया हों.
बीते कुछ समय में कई विपक्षी दलों ने यह आरोप लगाया है कि भारत की रणनीतिक नीतियां पहले की तुलना में कम स्वतंत्र दिखाई देती हैं.
हालांकि सरकार और सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहा हैं. सरकार का कहना है कि भारत आज वैश्विक मंच पर पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है और कई बड़े देशों के साथ उसकी साझेदारी बढ़ी है.
सरकार का पक्ष: भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हुई
केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और प्रभाव दोनों बढ़ा हैं.
सरकार का कहना है कि भारत आज वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा है और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका निर्णायक बनता जा रहा है.
सरकारी पक्ष यह भी कहता है कि अमेरिका समेत कई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए की जाती है.
राजनीतिक बयानबाज़ी या वास्तविक चिंता?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अक्सर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद देखने को मिलता हैं.
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक राजनीति में आज किसी भी देश के लिए पूरी तरह अलग-थलग रहकर काम करना संभव नहीं है. इसलिए कई बार रणनीतिक साझेदारियों को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी देखने को मिलती है.
हालांकि यह भी सच है कि भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत पर आधारित रहा है.
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आने वाले समय में क्या होगी भारत की भूमिका?
दुनिया तेजी से बदल रहा है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बन रहा हैं. ऐसे समय में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी पारंपरिक कूटनीतिक संतुलन नीति को बनाए रखते हुए वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी.
इसी के साथ देश के अंदर भी इस बात पर बहस जारी रहेगी कि भारत की विदेश नीति कितनी स्वतंत्र है और वैश्विक शक्तियों के साथ उसका रिश्ता किस दिशा में आगे बढ़ रहा है.
निष्कर्ष
AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा का बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि देश की विदेश नीति राजनीतिक बहस का अहम विषय बनी हुई है.
जहां विपक्ष सरकार पर अमेरिका के प्रभाव में काम करने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार खुद को मजबूत और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में पेश कर रही है.
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वह अपनी पारंपरिक स्वतंत्र पहचान को और मजबूत कर पाता है.

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