बीजेपी की किसान विरोधी नीतियों पर AAP का बड़ा हमला

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Ajit Kumar

भारत
बीजेपी की किसान विरोधी नीतियों पर AAP का बड़ा हमला

किसानों की शहादत, कीलें और आयात नीति पर गम्भीर सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 19 नवंबर 2025 — देश की राजनीति एक बार फिर किसानों के मुद्दों पर गर्मा गया है.आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से एक सख्त बयान जारी करते हुए भारतीय जनता पार्टी,पर किसानों के प्रति निर्दयी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. AAP का दावा है कि केंद्र सरकार की नीतियों ने न सिर्फ किसानों की आजीविका छीन ली है बल्कि हजारों किसानों की जान भी ले ली है.

AAP ने अपने पोस्ट में कई गंभीर आरोप लगाए हैं—काले कानूनों का विरोध करते हुए 700 से अधिक किसानों की शहादत, आंदोलनकारियों को रोकने के लिए सड़कों पर कीलें ठोकना, अमेरिका से कपास आयात को शून्य शुल्क पर करने का निर्णय और गुजरात के किसानों की तबाही.

यह रिपोर्ट AAP के पोस्ट के हवाले से इन आरोपों, घटनाओं और राजनीतिक संदेशों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है.

काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन: 700 से अधिक किसानों की मौत का मुद्दा फिर उठा

AAP ने अपने पोस्ट में कहा है कि कृषि कानूनों के विरोध में हुए लंबे किसान आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों ने अपनी जान गंवाई थी.
हालांकि यह आंकड़ा स्वयं किसान संगठनों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में बार-बार सामने आता रहा है, लेकिन इस मुद्दे को AAP ने अब दोबारा राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है.

AAP का कहना है कि,

केंद्र की नीतियाँ किसानों की बात सुनने के बजाय उन्हें दबाने पर आधारित थीं.

किसान आंदोलन के दौरान सरकार की कठोरता ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया है.

किसानों के बलिदान को AAP राजनीतिक ईंधन की तरह उपयोग करते हुए बीजेपी सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा कर रही है.

लखीमपुर खीरी घटना: मंत्री के बेटे पर गंभीर आरोप, AAP ने उठाए सवाल

AAP के बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि बीजेपी सरकार अपने ही मंत्री के बेटे द्वारा किसानों पर गाड़ी चढ़ाने की घटना पर कार्रवाई करने में नाकाम रही है.

यह मुद्दा पहले भी देश में व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है, और अब दुबारा AAP इसका इस्तेमाल करते हुए सवाल खड़े कर रही है कि,

क्या किसानों की जान की कोई कीमत नहीं?

क्या सत्ता की ताकत कानून से ऊपर है?

यह आरोप बीजेपी पर राजनीतिक दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है.

किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने के लिए सड़कों पर कीलें?

AAP की सबसे तीखी आलोचना इस दावे पर है कि किसानों को राजधानी दिल्ली तक न पहुँचने देने के लिए सड़कों पर कीलें ठोक दी गई थीं.

यह आरोप किसान आंदोलन के दौरान कई तस्वीरों के वायरल होने के बाद सामने आया था.
AAP का कहना है कि,

सरकार असली आतंकवादियों को पकड़ने में असफल रहती है

पर किसानों को आतंकवादी बताने में सबसे आगे रहती है

यह बयान सीधे-सीधे बीजेपी की किसान विरोधी छवि को उभारने का प्रयास है.

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अमेरिकी कपास पर Import Duty 0%: AAP का दावा – गुजरात के किसानों को बर्बाद कर दिया

AAP के पोस्ट का सबसे बड़ा आर्थिक आरोप अमेरिकी कपास पर 0% आयात शुल्क से जुड़ा है.
AAP का कहना है कि,

इस फैसले ने भारतीय किसानों को, खासकर गुजरात के कपास उत्पादकों को, बाजार के मुकाबले में कमजोर कर दिया है.

आयात बढ़ा, घरेलू कीमतें गिरीं

हजारों किसान दिवालिया हो गए और कई ने आत्महत्या तक कर ली है.

हालांकि इस आर्थिक दावे पर नीति विशेषज्ञों में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन राजनीतिक मैदान में यह बीजेपी पर बड़ा हमला है, क्योंकि गुजरात खुद प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य माना जाता है.

राजनीतिक निष्कर्ष: किसके आरोप कितने भारी?

AAP ने अपने पोस्ट के जरिए जिस आक्रामक तरीके से बीजेपी पर हमला बोला है, उससे यह साफ है कि किसानों का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बनने वाला है.

बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि वह किसानों के विकास, MSP सुधार, कृषि निवेश और समर्थन मूल्य से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दे.
दूसरी ओर, AAP और विपक्ष इन घटनाओं को चुनावी रणनीति के रूप में पेश कर रहे हैं, जिससे जन समर्थन जुटाया जा सके.

निष्कर्ष

AAP के X पोस्ट के आधार पर बीजेपी सरकार पर लगाए गए आरोप न सिर्फ भावनात्मक हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद प्रभावशाली हैं.
किसानों की शहादत, लखीमपुर जैसी घटनाएँ, सड़क पर कीलें, और कपास आयात नीति—ये सभी मुद्दे सरकार की छवि पर गंभीर सवाल उठाते हैं.

भारतीय राजनीति में किसान हमेशा केंद्र में रहे हैं, और AAP के इस बयान से साफ है कि आगामी चुनावों में यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ने वाला है.

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