आलू के गिरते दाम पर भड़के अखिलेश यादव: बोले—किसानों की मेहनत बर्बाद, भाजपा सिर्फ सत्ता में व्यस्त

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Ajit Kumar

भारत
आलू के गिरते दाम पर किसानों के मुद्दे को उठाते हुए अखिलेश यादव का बयान

क्या सच में किसानों को खेती छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है?

तीसरा पक्ष ब्यूरो लखनऊ, 10 मार्च 2026 :देश की अर्थव्यवस्था में किसानों की भूमिका हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण रही है. भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन जब किसानों की मेहनत की सही कीमत नहीं मिलती, तो यह चिंता का विषय बन जाता है. हाल ही में आलू के गिरते दाम को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ गई है. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है.

उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है, लेकिन भाजपा सरकार पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है और किसानों की मांगों की अनदेखी कर रही है. उनका आरोप है कि भाजपा को सिर्फ अपनी राजनीतिक सत्ता की चिंता है, जबकि किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा हैं.

आलू के दाम गिरने से बढ़ी किसानों की परेशानी

कई राज्यों में इस समय आलू की कीमतें इतना कम हो गया हैं कि किसानों को अपनी लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है. खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन जैसी कई लागतें शामिल होता हैं. जब बाजार में फसल का दाम इन लागतों से भी कम मिल रहा हो, तो किसान आर्थिक संकट में फंस जाता हैं.

अखिलेश यादव ने कहा कि किसानों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होते जा रहा है, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है. उनके अनुसार, भाजपा के नेता चुनाव प्रचार में तो सक्रिय रहते हैं, लेकिन किसानों की परेशानी के समय उनके पास समय नहीं होता है.

भाजपा पर लगाया गंभीर आरोप

अखिलेश यादव ने अपने बयान में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं. उनका कहना है कि यह एक सोची-समझी एक रणनीति है, जिसके तहत फसलों के दाम इतने कम कर दिया जाता हैं कि किसानों को खेती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा.

उन्होंने कहा है कि जब किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे, तब उन्हें अपनी जमीन सस्ते दामों पर बेचनी पड़ेगी. इससे बड़े और अमीर लोग जमीन खरीद लेंगे और किसान अपने ही खेत में मजदूर बनकर रह जाएंगे.

कृषि नीतियों पर भी उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने यह भी कहा है कि सरकार समय-समय पर ऐसे कानून लाने की कोशिश करता रहा है, जो किसानों के हितों के खिलाफ हैं. उन्होंने 2020 Indian farm laws का जिक्र करते हुए कहा कि इन कानूनों के खिलाफ देशभर के किसानों ने आंदोलन किया था.

उनका आरोप है कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि क्षेत्र में बदलाव करना चाहता है. उनका कहना है कि अगर कृषि उत्पादन और बाजार पर बड़े उद्योगपतियों का नियंत्रण हो गया, तो आम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान होगा.

किसानों के भविष्य को लेकर चिंता

अखिलेश यादव ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर यही स्थिति यही बना रहा तो आने वाले समय में किसानों के लिए खेती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसा समय भी आ सकता है जब आज का खेत मालिक किसान, कल को उसी खेत में उगी फसल को खरीदने के लिए मजबूर हो जाए.

यह स्थिति न केवल किसानों के लिए बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है.इसलिए जरूरी है कि सरकार किसानों की समस्याओं को समझे और उनके हित में ठोस कदम उठाए.

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सरकार से की कार्रवाई की मांग

अखिलेश यादव ने सरकार से मांग किया है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिया जाए. साथ ही ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जिससे किसानों की आय बढ़े और उन्हें खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिले.

उन्होंने कहा कि किसानों की अनदेखी करना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. अगर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, तभी देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनेगी.

निष्कर्ष

आलू के गिरते दाम का मुद्दा केवल एक फसल का संकट नहीं है, बल्कि यह किसानों की व्यापक समस्या को उजागर करता है. खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों की कीमतें स्थिर या कम होती जा रही हैं.

ऐसे में सरकार, विपक्ष और सभी संबंधित पक्षों को मिलकर किसानों की समस्याओं का समाधान ढूंढना होगा.क्योंकि जब किसान खुशहाल होंगे, तभी देश की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों मजबूत बन पाएंगे.

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