95 साल बाद भी गूंज रहा है इंकलाब: भगत सिंह की विरासत पर पटना से बड़ा संदेश
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 23 मार्च 2026: देशभर में आज क्रांतिकारी परंपरा के प्रतीक भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसी कड़ी में पटना में भाकपा–माले, छात्र संगठन आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) के नेतृत्व में एक संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और छात्र संगठनों ने भाग लिया.
कार्यक्रम के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आज के दौर में और अधिक प्रासंगिक बताया.

क्रांतिकारी विरासत की याद और उसका महत्व
वक्ताओं ने कहा कि आज से 95 वर्ष पहले इन महान क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति देकर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी. इंकलाब जिंदाबाद और साम्राज्यवाद का नाश हो जैसे नारे केवल इतिहास की विरासत नहीं, बल्कि आज के सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों में भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.
उन्होंने कहा कि भगत सिंह केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी विचारक और समाजवादी दृष्टिकोण रखने वाले क्रांतिकारी थे. उनके विचार आज भी युवाओं को अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता हैं.
जलियांवाला बाग से क्रांति की शुरुआत
वक्ताओं ने भगत सिंह के जीवन के शुरुआती प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला. इस घटना ने उनके भीतर स्वतंत्रता और न्याय के लिए संघर्ष की आग जला दी.
इसके साथ ही उनके चाचा अजीत सिंह द्वारा चलाया गया पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन भी उनके राजनीतिक और वैचारिक विकास में अहम भूमिका निभाता है.
समाजवाद और अंतरराष्ट्रीय प्रेरणा
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि भगत सिंह पर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव था. खासकर रूसी क्रांति, जो व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में हुई, ने उनके विचारों को आकार दिया.
वक्ताओं के अनुसार, भगत सिंह एक ऐसे भारत का सपना देखते थे जहां मजदूर, किसान और मेहनतकश वर्ग सत्ता के वास्तविक भागीदार हों और समाज में समानता हो.
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर सवाल
वक्ताओं ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश की नीतियां कॉरपोरेट हितों और वैश्विक साम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में बन रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ शक्तियों के साथ बढ़ती नजदीकियां भारत को आर्थिक संकट और महंगाई की ओर धकेल रही हैं.
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण लाखों भारतीय प्रवासी कामगार असुरक्षित माहौल में फंसे हुए हैं, जिससे देश के सामाजिक और आर्थिक हालात प्रभावित हो रहा हैं.
किसान और मजदूरों के मुद्दे
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि वर्तमान कृषि और व्यापार नीतियां छोटे किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी कर रही हैं। वक्ताओं के अनुसार, असमान व्यापार समझौते भारतीय कृषि के लिए खतरा बनते जा रहा हैं और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन नीतियों के कारण किसानों की आय और रोजगार के अवसरों में गिरावट आ रही है.
राष्ट्रीय हित और विदेश नीति पर चिंता
वक्ताओं ने कहा कि देश की रणनीतिक स्वायत्तता पर भी सवाल खड़ा हो रहा हैं. उनका मानना है कि पारंपरिक मित्र देशों से दूरी और नई वैश्विक धुरी के साथ नजदीकियां भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कमजोर कर सकती हैं.
उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया के देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया.
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संघर्ष का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने आह्वान किया कि आज के समय में भगत सिंह की साम्राज्यवाद-विरोधी विचारधारा को और मजबूत करने की आवश्यकता है.उन्होंने कहा कि अन्याय, शोषण और असमानता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष को नई दिशा देने का समय आ गया है.
उन्होंने युवाओं, छात्रों, मजदूरों और किसानों से अपील किया कि वे आगे आकर लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए आवाज उठाएं.
निष्कर्ष
भगत सिंह की शहादत केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक विचारधारा है जो हर दौर में प्रासंगिक रहती है. आज जब देश और दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब उनके विचार हमें एक नई दिशा दिखाता हैं.
उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना ही सच्ची देशभक्ति है—और यही संदेश आज के समय में सबसे ज्यादा जरूरी है.

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