भारत जोड़ो यात्रा में पावर सेक्टर की सामाजिक असमानता पर सवाल

| BY

Ajit Kumar

भारत
भारत जोड़ो यात्रा में पावर सेक्टर की सामाजिक असमानता पर सवाल

राहुल गांधी ने दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्ग की कम भागीदारी पर जताई चिंता

तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली,21 जनवरी 2026 — भारत की राजनीति में सामाजिक न्याय, समानता और प्रतिनिधित्व का सवाल हमेशा से अहम रहा है. हाल के वर्षों में यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया है, खासकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद. कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल @INCIndia से साझा एक पोस्ट में देश के पावर सेक्टर में दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्गों की बेहद कम मौजूदगी पर गंभीर सवाल उठाया गया है.
यह पोस्ट जननायक कर्पूरी ठाकुर की 103वीं जयंती के अवसर पर कांग्रेस OBC विभाग के चेयरमैन डॉ. जयहिंद के हवाले से जारी की गई. इसमें मनुस्मृति और बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान की तुलना करते हुए यह बताया गया कि आज भी सत्ता, संसाधन और बड़े पद कुछ वर्गों तक सीमित क्यों हैं. यह लेख इन्हीं सवालों को सरल भाषा में समझाने और सामाजिक असमानता की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का प्रयास है.

भारत जोड़ो यात्रा और राहुल गांधी का दृष्टिकोण

भारत जोड़ो यात्रा में कन्याकुमारी से शुरू होकर श्रीनगर तक पहुंची.इस यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि देश के अलग-अलग वर्गों की जमीनी समस्याओं को सुनना और समझना भी था.
यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने कई क्षेत्रों के लोगों से बातचीत किया.इसी क्रम में उन्होंने यह महसूस किया कि पावर सेक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में दलित, पिछड़े (OBC) और आदिवासी समुदाय की भागीदारी बेहद कम है. यह सिर्फ रोजगार का सवाल नहीं है, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है.
भारत जोड़ो यात्रा ने यह संदेश दिया कि अगर देश को सच में जोड़ा जाना है, तो आर्थिक और सामाजिक असमानता को भी खत्म करना होगा.

पावर सेक्टर में सामाजिक असमानता की सच्चाई

भारत का पावर सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़े इस क्षेत्र में बड़े फैसले लिए जाते हैं.लेकिन हकीकत यह है कि ऊंचे पदों पर सामाजिक विविधता न के बराबर है.
सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भी यह देखा गया है कि बोर्ड लेवल और सीनियर मैनेजमेंट में SC, ST और OBC वर्गों की भागीदारी बहुत सीमित है. इसका असर यह होता है कि नीतियां बनाते समय समाज के बड़े हिस्से की जरूरतें पीछे छूट जाती हैं.

इस असमानता के पीछे कई कारण हैं,

ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव

उच्च शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित पहुंच

निजीकरण के नाम पर आरक्षण की अनदेखी

राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इसी ढांचे पर सवाल उठाए और कहा कि देश के संसाधनों पर हर वर्ग का बराबर अधिकार होना चाहिए.

मनुस्मृति बनाम बाबासाहेब का संविधान

कांग्रेस के पोस्ट में मनुस्मृति और संविधान की तुलना एक गहरी सोच को सामने लाती है. मनुस्मृति वर्ण आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देती है, जहां अधिकार जन्म से तय होता हैं.इसके विपरीत, डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की गारंटी देता है.
कानून के स्तर पर संविधान सर्वोपरि है, लेकिन व्यवहार में आज भी कई संस्थानों में पुरानी मानसिकता हावी दिखाई देती है.

धन और सत्ता कुछ वर्गों तक सीमित

निर्णय लेने वाले पदों पर सामाजिक संतुलन की कमी

आरक्षण के सही क्रियान्वयन में बाधाएं

भारत जोड़ो यात्रा ने इसी विरोधाभास को उजागर किया,जहां संविधान तो है, लेकिन उसकी आत्मा को पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है.

जननायक कर्पूरी ठाकुर: सामाजिक न्याय की प्रेरणा

कर्पूरी ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और सामाजिक न्याय के बड़े नेता थे.उन्हें ‘जननायक’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने पिछड़े वर्गों को राजनीतिक और सामाजिक पहचान दिलाई. उनका कर्पूरी फॉर्मूला आगे चलकर मंडल राजनीति की नींव बना.
उन्होंने यह साबित किया कि सत्ता का उपयोग अगर सही दिशा में किया जाए, तो समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी मजबूत बनाया जा सकता है. आज जब पावर सेक्टर जैसे क्षेत्रों में असमानता की बात होती है, तो कर्पूरी ठाकुर के विचार और भी प्रासंगिक हो जाता हैं.
उनकी जयंती पर उठाए गए ये सवाल सिर्फ अतीत की याद नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का संकेत हैं.

ये भी पढ़े:मनरेगा: ग्रामीण भारत की जीवन रेखा को बचाने की जरूरत
ये भी पढ़े:अपना–पराया का खेल: देश को कौन बाँट रहा है और क्यों?

कांग्रेस की भूमिका और आगे की राह

कांग्रेस पार्टी ने हमेशा सामाजिक न्याय को अपने राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया है. भारत जोड़ो यात्रा और इसके बाद शुरू हुई न्याय आधारित पहलें इसी सोच का विस्तार हैं. आगे की राह में जरूरी है,

पावर सेक्टर में पारदर्शी और समावेशी भर्ती

आरक्षण नियमों का सख्त पालन

SC/ST/OBC युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण

नीति निर्माण में सभी वर्गों की भागीदारी

निष्कर्ष

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने यह साफ कर दिया कि देश की असली चुनौती सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता है.पावर सेक्टर में दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय की कम मौजूदगी इस असमानता का बड़ा उदाहरण है.
कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर उठाया गया यह मुद्दा हमें याद दिलाता है कि संविधान की भावना को जमीन पर उतारना अभी बाकी है. अगर भारत को सच में जोड़ना है, तो हर क्षेत्र में समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करना होगा. यह लेख उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक छोटा प्रयास है.

यह न्यूज़ कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल @INCIndia और कांग्रेस OBC विभाग के बयान के आधार पर किया गया है.

Trending news

Leave a Comment