UGC Act लागू व OBC 27% आरक्षण की प्रमुख मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो भोपाल,13 फ़रवरी 2026: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बहुजन अधिकारों को लेकर बड़ा राजनीतिक-सामाजिक आंदोलन देखने को मिला.भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संयुक्त तत्वावधान में CM हाउस घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बहुजन समाज के हक-अधिकार, ओबीसी आरक्षण और बैकलॉग भर्तियों सहित 17 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ. यह आंदोलन बहुजन राजनीति और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

आंदोलन का उद्देश्य: बहुजनों के हक और आरक्षण की लड़ाई
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य बहुजन समाज के संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने प्रमुखता से उठाना था. प्रदर्शनकारियों ने मांग किया कि ओबीसी के 13% होल्ड आरक्षण को समाप्त कर पूर्ण 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया जाना चाहिये. इसके अलावा बैकलॉग पदों पर तत्काल भर्ती हो , निजीकरण में आरक्षण लागू करने और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल था.
प्रदर्शन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना था कि सामाजिक न्याय की अवधारणा तभी सार्थक होगा जब संविधान में दिया गया आरक्षण प्रावधानों को पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाये . उनका आरोप था कि वर्षों से बैकलॉग पद खाली पड़ा हैं, जिससे बहुजन वर्ग के युवाओं के रोजगार के अवसर सीमित हो रहा हैं.
CM हाउस घेराव: बहुजन एकता का प्रदर्शन
राजधानी भोपाल में आयोजित CM हाउस घेराव कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुआ था.आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, लेकिन इसमें बहुजन समाज की एकजुटता और राजनीतिक जागरूकता स्पष्ट रूप से दिखाई दिया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तत्काल वार्ता कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील किया .
कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल था.
ओबीसी के 13% होल्ड आरक्षण को हटाकर 27% आरक्षण लागू करना.
बैकलॉग पदों पर त्वरित भर्ती.
निजीकरण में आरक्षण लागू करना.
शिक्षा और रोजगार में समान अवसर.
बहुजन समाज के अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा.
उच्च शिक्षा में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना.
इन मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई है.
बहुजन राजनीति को नई ऊर्जा
यह आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि बहुजन राजनीति को नई दिशा और ऊर्जा देने वाला कदम माना जा रहा है. हाल के वर्षों में आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर लगातार बहस तेज हुआ है, और ऐसे में यह घेराव कार्यक्रम राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आंदोलन बहुजन युवाओं को राजनीतिक रूप से जागरूक बनाते हैं और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग करता हैं. साथ ही यह सरकारों पर दबाव बनाने का लोकतांत्रिक माध्यम भी है, जिससे नीति निर्माण में सामाजिक संतुलन सुनिश्चित किया जा सके.
सरकार पर बढ़ा दबाव, वार्ता की मांग
प्रदर्शन के बाद अब सरकार पर इन मांगों को लेकर निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है.आंदोलनकारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुआ तो राज्यभर में बड़े स्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ओबीसी आरक्षण और बैकलॉग भर्तियों का मुद्दा आगामी चुनावी राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकता है. बहुजन समाज से जुड़े मुद्दे हमेशा से मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली रहा हैं, और यह आंदोलन उस दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है.
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सामाजिक न्याय की व्यापक बहस
यह आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की व्यापक बहस को भी सामने लाता है.प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक सामाजिक असमानता समाप्त नहीं हो सकता है.
आंदोलन ने यह भी संदेश दिया है कि बहुजन समाज अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक संगठित और जागरूक है.लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना ही इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य रहा.
निष्कर्ष: अधिकारों की लड़ाई का नया अध्याय
भोपाल CM हाउस घेराव आंदोलन बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में उभरकर सामने आया है.भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह प्रदर्शन न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देता है.
अब नजर इस बात पर टिका है कि सरकार इन 17 सूत्रीय मांगों पर क्या रुख अपनाता है. यदि इन मांगों पर सकारात्मक पहल होता है, तो यह बहुजन समाज के लिए बड़ी जीत साबित होगा. वहीं, अगर अनदेखी की जाती है तो आने वाले समय में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि बहुजन समाज अपने संवैधानिक अधिकारों और सम्मान के लिए संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के लिए तैयार है, और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत भी है.

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