बिहार में म्यूजिक टीचर नहीं, फिर भी 158 करोड़ के वाद्य-यंत्र! बड़ा सवाल या बड़ा घोटाला?

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार के स्कूलों में बिना म्यूजिक शिक्षक के खरीदे गए वाद्य-यंत्रों पर Tejashwi Yadav ने सवाल उठाए

बिना म्यूजिक टीचर के 158 करोड़ के वाद्य-यंत्र! Tejashwi Yadav ने उठाए बड़े सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 12 अप्रैल 2026: बिहार की राजनीति में एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी खर्च को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है.Tejashwi Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बिहार की NDA सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.उन्होंने दावा किया है कि राज्य के हजारों स्कूलों में एक भी संगीत शिक्षक नहीं है, लेकिन सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर संगीत वाद्य-यंत्र खरीद लिया है.

क्या है पूरा मामला?

तेजस्वी यादव के अनुसार, बिहार के लगभग 76,000 से अधिक प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में एक भी संगीत शिक्षक नियुक्त नहीं है. इसके बावजूद सरकार ने 158.44 करोड़ रुपये खर्च करके विभिन्न संगीत वाद्य-यंत्रों की खरीद कर ली है.
इन वाद्य-यंत्रों में शामिल हैं,सितार,सरोद,सारंगी,वायलिन,बांसुरी,शहनाई,हारमोनियम,तबला,ढोलक,डमरू,शंख और घंटा

अब सवाल यह उठता है कि जब स्कूलों में इन वाद्य-यंत्रों को सिखाने वाला कोई शिक्षक ही नहीं है, तो इनका उपयोग कैसे होगा?

शिक्षक नहीं, फिर उपकरण क्यों?

इस मुद्दे पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह योजना बिना किसी ठोस तैयारी के लागू की गई?

तेजस्वी यादव का कहना है कि,ना तो शिक्षकों ने इन उपकरणों की मांग की,ना ही उन्हें इनका उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया,और ना ही सरकार के पास यह आंकड़ा है कि कितने संगीत शिक्षक की जरूरत है.

ऐसे में यह खरीद प्रक्रिया कई सवाल खड़े करती है. क्या यह केवल बजट खर्च करने के लिए किया गया निर्णय था या इसके पीछे कोई और मंशा है?

शिक्षा व्यवस्था पर असर

बिहार पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है.

स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव,छात्रों की गिरती गुणवत्ता.

ऐसे में यदि संसाधनों का सही उपयोग न हो, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण पर ध्यान देना चाहिए था, उसके बाद ही इस तरह के उपकरणों की खरीद की जानी चाहिए थी.

भ्रष्टाचार के आरोप

तेजस्वी यादव ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा है कि इतनी बड़ी खरीद में पारदर्शिता की कमी दिख रही है.

उनका आरोप है कि,खरीद प्रक्रिया में जल्दबाजी की गई, पारदर्शिता नहीं बरती गई,और संभवतः कमीशन के लिए यह निर्णय लिया गया

हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है.

सरकार की जवाबदेही पर सवाल

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों से सीधे सवाल पूछा है कि,

जब एक भी संगीत शिक्षक नहीं है, तो ये वाद्य-यंत्र किसके लिए खरीदे गए? क्या ये केवल धूल खाने के लिए हैं?

यह सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है.

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क्या कहते हैं आंकड़े?

76,000+ स्कूलों में संगीत शिक्षक नहीं, 158.44 करोड़ रुपये वाद्य-यंत्रों पर खर्च, शिक्षक भर्ती और प्रशिक्षण पर कोई स्पष्ट योजना नहीं.

ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है.

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि,पहले मानव संसाधन (शिक्षक) विकसित करना जरूरी है.फिर इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों में निवेश करना चाहिए
अन्यथा संसाधन बेकार हो जाते हैं.

निष्कर्ष

यह मामला केवल एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं है, बल्कि यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था की गहरी समस्या को उजागर करता है.

अगर वाकई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और फिर भी करोड़ों के उपकरण खरीदे गए हैं, तो यह नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों पर सवाल खड़ा करता है.

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या इस मामले की कोई जांच होती है या नहीं.

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