20 साल का सुशासन बनाम बिहार की हकीकत: क्यों आज भी सबसे पीछे है राज्य?

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Ajit Kumar

बिहार
20 साल के सुशासन के बाद भी बिहार विकास में सबसे पीछे – RJD का आरोप

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में बिहार क्यों पिछड़ा? RJD का बड़ा आरोप

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 6 फ़रवरी 2026: देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है. कई राज्य औद्योगीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक संकेतकों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा हैं. लेकिन इन तमाम दावों और उपलब्धियों के बीच बिहार की स्थिति आज भी चिंता का विषय बना हुआ है राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @RJDforIndia के माध्यम से भाजपा–नीतीश सरकार के सुशासन, न्याय का राज और तीव्र विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा किया हैं.
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RJD का स्पष्ट कहना है कि 20 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद बिहार आज भी लगभग हर सकारात्मक सूचकांक में देश के सबसे निचले पायदान पर खड़ा है. यह लेख इन्हीं दावों और हकीकत के बीच के अंतर को समझने की कोशिश है.

20 साल की सरकार, फिर भी क्यों नहीं बदली तस्वीर?

भाजपा–नीतीश सरकार बार-बार यह दावा करती रही है कि बिहार में कानून का राज स्थापित हुआ, विकास की रफ्तार तेज हुई और सुशासन एक मॉडल बन गया. लेकिन यदि जमीनी सच्चाई और सरकारी-गैरसरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है.

प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार आज भी देश में अंतिम पायदानों में है.

पलायन की समस्या जस की तस बना हुआ है.

उद्योग और निजी निवेश की स्थिति बेहद कमजोर है.

इन तथ्यों से यह सवाल उठता है कि अगर शासन इतना ही बेहतर था, तो 20 सालों में आम बिहारी की जिंदगी में बुनियादी बदलाव क्यों नहीं आया?

शिक्षा व्यवस्था: वादे बहुत, हालात कमजोर

शिक्षा किसी भी राज्य के भविष्य की नींव होती है. बिहार में शिक्षा सुधार को लेकर बड़े-बड़े दावे किया गया , लेकिन सच्चाई यह है कि:

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता अब भी सवालों के घेरे में है.

उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के अवसर सीमित हैं.

छात्र-छात्राएं बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन को मजबूर हैं.

RJD का आरोप है कि सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता देने के बजाय सिर्फ प्रचार पर जोर दिया है , जिसका खामियाजा बिहार का युवा भुगत रहा है.

स्वास्थ्य सेवाएं: इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बिहार की स्थिति चिंताजनक बना हुआ है. आज भी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को दिल्ली, कोलकाता या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है.

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी है.

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति है. .

ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है .

यह सवाल स्वाभाविक है कि 20 साल के लंबे शासन के बाद भी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पाया?

रोजगार और पलायन: सबसे बड़ा दर्द

बिहार की सबसे बड़ी समस्या आज भी बेरोजगारी और पलायन है. हर साल लाखों युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं.

उद्योगों की कमी, निजी निवेश का अभाव,

स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की विफलता,

RJD का कहना है कि भाजपा–नीतीश सरकार ने रोजगार को लेकर सिर्फ घोषणाएं किया है , लेकिन ठोस नीति और परिणाम सामने नहीं आया है.

कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर सवाल

न्याय का राज का नारा देने वाली सरकार पर RJD ने यह भी आरोप लगाया है कि,

कमजोर वर्गों को आज भी न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ता है.

अपराध की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं.

सामाजिक न्याय सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गया है.

अगर वास्तव में न्याय का राज होता, तो दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को आज भी असुरक्षा का सामना क्यों करना पड़ता?

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विकास बनाम प्रचार: असली मुद्दा

RJD का यह भी कहना है कि बिहार में विकास से ज्यादा प्रचार और आंकड़ों की बाजीगरी पर जोर दिया गया.सड़कें, पुल और योजनाएं गिनाई गईं, लेकिन:

गांवों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी

किसान आज भी संकट में हैं

महंगाई और बेरोजगारी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है

निष्कर्ष

राष्ट्रीय जनता दल के अनुसार, 20 साल का भाजपा–नीतीश शासन बिहार को उस मुकाम तक नहीं पहुंचा सका, जहां वह होना चाहिए था.सुशासन, न्याय और विकास के दावे जमीन पर खोखले साबित होते नजर आ रहा हैं.

आज जरूरत है ईमानदार आत्ममंथन और नई सोच की, ताकि बिहार को वाकई विकास की मुख्यधारा में लाया जा सके.सिर्फ नारों और वादों से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों, जवाबदेही और जनहित के कामों से ही बिहार आगे बढ़ सकता है.

स्रोत :यह लेख Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) के X (Twitter) पोस्ट पर आधारित है.

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