जनता ने किया सिरे से खारिज :राजद
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 4 सितम्बर 2025 – एनडीए और भाजपा द्वारा बुलाए गए बिहार बंद का असर न के यही कारण रहा कि बंद एनडीए के लिए ,बैकफायर या सिधे शब्दों में कहा जाये तो असफल साबित हुआ. एनडीए का बुलाया गया बंद उल्टा उन्हीं पर भारी पड़ गया है फेल हो गया. बराबर रहा. आम जनता ने इस बंद को पूरी तरह नकारते हुए भाजपा की सियासी चाल को समझ लिया. यही कारण रहा कि बंद एनडीए के लिए ,बैकफायर या सिधे शब्दों में कहा जाये तो असफल साबित हुआ. एनडीए का बुलाया गया बंद उल्टा उन्हीं पर भारी पड़ गया है फेल हो गया.
बंद की अवधि घटाकर किया गया बचाव प्रयास
राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने इसे भाजपा की नाकामी बताते हुए कहा कि पहले ही भाजपा को इसका अंदाजा हो गया था. इसलिए बंद की अवधि को पूरे दिन से घटाकर सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक सीमित कर दिया गया.उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सामान्यतः दुकानें और बाजार सुबह 10 बजे के बाद खुलते हैं, तब तक बंद समाप्त हो गया था. यही वजह रही कि कार्यालय, शिक्षण संस्थान और यातायात सामान्य रूप से चलते रहे.
बंद के नाम पर हिंसा और गुंडागर्दी !
हालांकि आम जनता बंद से अप्रभावित रही, लेकिन बंद समर्थकों की गुंडागर्दी कई जगहों पर देखने को मिली.
जहानाबाद में स्कूल जा रही एक महिला शिक्षिका को बीच सड़क पर बेरहमी से पीटा गया और गालियां दी गईं.
प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को ले जा रही एम्बुलेंस तक को रोक दिया गया.
बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहन भी जबरन रोके गए.
भागलपुर में पत्रकार कांतेश की मां और बहन के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई.
गगन ने कहा कि महिला के नाम पर बंद बुलाने वाले एनडीए के कार्यकर्ताओं ने सबसे ज्यादा महिलाओं को ही अपमानित और प्रताड़ित किया.
ये भी पढ़े :बिहार बंद में छात्रा को रोका गया: मुकेश सहनी का NDA सरकार पर करारा वार
ये भी पढ़े :लालू प्रसाद यादव का तीखा वार: क्या मोदी ने बिहारियों को गाली देने का आदेश दिया है?
जनता ने भाजपा की साजिश को किया खारिज
राजद प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा बेबुनियाद बातों के आधार पर राजद और कांग्रेस के खिलाफ नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही थी. लेकिन जनता अब इस राजनीति को भलीभांति समझ चुकी है. यही कारण रहा कि लोग अपने कामकाज और दैनिक जीवन में व्यस्त रहे और भाजपा का बंद पूरी तरह विफल हो गया.
जवाबदेही किसकी?
गगन ने सवाल उठाया कि, कभी मुख्यमंत्री के डीएनए पर सवाल खड़े कर उनकी दिवंगत मां को गाली देने वाले ने क्या माफी मांगी? उन्होंने आगे कहा कि आज जब महिलाओं और आम नागरिकों को बंद के नाम पर गालियां दी गईं और मारपीट की गई, तो इसका जवाब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कब देंगे?
निष्कर्ष
भाजपा के बंद की राजनीति बिहार की जनता के लिए नाकाम और खतरनाक साबित हुई. आम जनता ने जहां इसे पूरी तरह नकार दिया वहीं बंद समर्थकों की हिंसा और गुंडागर्दी ने भाजपा और एनडीए की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















