माँ के अपमान के खिलाफ बिहार बंद: एनडीए महिला मोर्चा का प्रदर्शन

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Ajit Kumar

बिहार
माँ के अपमान के खिलाफ बिहार बंद: एनडीए महिला मोर्चा का प्रदर्शन

भाजपा अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल सड़कों पर

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 4 सितंबर 2025 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ को गाली दिए जाने के विरोध में एनडीए संयुक्त महिला मोर्चा द्वारा आयोजित पांच घंटे का बिहार बंद पूरी तरह सफल रहा.दरभंगा में कांग्रेस और राजद के मंच से हुई अमर्यादित टिप्पणी ने पूरे प्रदेश में आक्रोश फैला दिया और इसके खिलाफ एनडीए के नेता, कार्यकर्ता और खासकर महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया.

राजधानी से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक असर

सुबह से ही पटना के आयकर गोलंबर सहित कई इलाकों में भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी और कार्यकर्ता हाथों में झंडे-बैनर लेकर सड़क पर बैठ गईं. जगह-जगह कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ नारेबाजी हुई. बंद के दौरान ऑटो, बस और निजी वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा.

एनडीए नेताओं की बड़ी मौजूदगी

इस प्रदर्शन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल, सांसद रवि शंकर प्रसाद, विधायक संजीव चौरसिया, विधान पार्षद संजय मयूख, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद धर्मशीला गुप्ता, जदयू महिला मोर्चा अध्यक्ष भारती मेहता, हम पार्टी महिला मोर्चा अध्यक्ष अमृता शर्मा और रालोमो महिला मोर्चा अध्यक्ष स्मृति कुमुद समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए.

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संस्कार और संस्कृति पर चोट – डॉ. दिलीप जायसवाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार बंद स्वतःस्फूर्त रहा और लोगों ने माँ एवं नारी सम्मान की रक्षा के लिए भारी संख्या में सड़कों पर उतरकर अपना समर्थन दिया.
आगे उन्होंने कहा कि – प्रधानमंत्री मोदी की स्वर्गीय माता के प्रति अपमानजनक टिप्पणी ने पूरे देश की भावनाओं को आहत किया है.बिहार की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि नारी असम्मान बर्दाश्त नहीं होगा.

डॉ. जायसवाल ने यह भी मांग की कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सार्वजनिक रूप से माफी माँगें क्योंकि उनका बयान देश की संस्कृति और परंपरा का अपमान है.

मातृशक्ति की निर्णायक भूमिका

बंद के दौरान महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली.भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो के महिला मोर्चा की नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़कों पर डटी रहीं. इन महिलाओं ने यह संदेश दिया कि वे अपमान और असम्मान को चुपचाप सहने वाली नहीं हैं.

निष्कर्ष

बिहार बंद’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात माँ और नारी सम्मान की हो, तो बिहार की जनता और खासकर महिलाएँ सबसे आगे खड़ी होती हैं. एनडीए के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे व्यापक सफलता दिलाई और यह आंदोलन आगे भी राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रहेगा.

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