वोटचोरी नहीं सहेंगे: बिहार की आवाज़ बनी राष्ट्रीय पुकार – दीपंकर भट्टाचार्य
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 1 सितंबर 2025 – डाकबंगला चौराहे पर आयोजित एक विशाल जनसभा में भाकपा-माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार की जनता ने एक बार फिर देशभर को लोकतंत्र की रक्षा का रास्ता दिखाया है.वोट चोर गद्दी छोड़, का नारा अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश में लोकतंत्र की बहाली का प्रतीक बन चुका है.

वोटचोरी बनाम वोटबंदी: लोकतंत्र पर संकट
दीपंकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस तरह नोटबंदी और लॉकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया, उसी तरह अब वोटबंदी और वोटचोरी के जरिए चुनावी व्यवस्था को तहस-नहस करने की कोशिश हो रही है.
उन्होंने कहा कि, 25 जून, जिसे इमरजेंसी की याद में संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. उसी दिन को चुनकर बिहार में मताधिकार पर हमला किया गया. यह सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि साजिश है.
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लाखों वोटरों के नाम काटे गए
माले महासचिव ने खुलासा किया कि चुनाव आयोग से 2 जुलाई को हुई मुलाकात के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि बिहार के 20% लोग राज्य से बाहर रहते हैं. उन्हें वहीं से मतदान करना चाहिए. इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि लगभग डेढ़ से दो करोड़ मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर करने की योजना चल रही थी.

हालांकि जनआंदोलन के दबाव में यह संख्या घटकर 65 लाख पर आ गई. लेकिन तब भी लाखों लोगों के साथ अन्याय हुआ.किसी को मृत घोषित कर दिया गया, किसी को विदेशी कह दिया गया. महिलाओं के नाम विशेष रूप से बड़ी संख्या में काटे गए,.उन्होंने कहा.
बीजेपी की बौखलाहट और जुमलों की राजनीति
सभा में दीपंकर ने बिहार की सत्ता में बैठी भाजपा-जदयू सरकार को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा कांग्रेस के दफ्तर पर हमले कर रही है. वहीं दूसरी ओर चुनावी साल में अचानक मुफ्त बिजली, बढ़ी हुई पेंशन और महिला सशक्तिकरण के वादे किए जा रहे हैं.
नीतीश कुमार जो कभी कहते थे कि एक यूनिट बिजली मुफ्त नहीं देंगे. आज 125 यूनिट मुफ्त की बात कर रहे हैं. महिलाओं को 10,000 रुपये देने का वादा भी वही कर रहे हैं जिन्होंने पहले दो लाख देने का झूठा वादा किया था. उन्होंने कहा.
दीपंकर ने इन घोषणाओं को झुनझुना करार देते हुए कहा कि ये माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की जेब में जल्दी पहुंच जाएंगे.उन्होंने महिलाओं को कर्ज से राहत, नियमित रोजगार और 200 यूनिट मुफ्त बिजली की मांग दोहराई.
बदलाव की हवा और INDIA गठबंधन की ताकत
उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन बिहार में बदलाव का वाहक बन चुका है और जनता इस बार वोट के माध्यम से डबल इंजन सरकार को हटाने के लिए तैयार है.बदलो सरकार, बदलो बिहार” का नारा अब जन-जन की जुबान पर है.
सभा से पहले भाकपा-माले कार्यालय में IPF के संस्थापक महासचिव का. राजाराम की दूसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई.इसके बाद गांधी मैदान की ओर एक विशाल मार्च निकाला गया. जिसमें INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी भाग लिया.
संगठनों की सक्रियता और जनता की उम्मीदें
मार्च के दौरान कई संगठनों ने अपने-अपने मांगपत्र भी सौंपे.ओल्ड पेंशन योजना की बहाली और सरकारी विभागों में स्थायी बहाली की मांग करते हुए महासंघ (गोप गुट) ने दीपंकर को ज्ञापन सौंपा.
सभा के अंत में दीपंकर ने कहा – “ये तो बस अंगड़ाई है, आगे लंबी लड़ाई बाकी है.
निष्कर्ष
बिहार की जमीन से उठी यह लोकतांत्रिक लड़ाई अब केवल एक राज्य की नहीं रही। यह पूरे देश की उस आवाज का हिस्सा बन चुकी है जो पारदर्शी, निष्पक्ष और भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की मांग कर रही है.पटना की यह जनसभा बताती है कि जनता अब केवल वादों से नहीं, बदलाव से संतुष्ट होगी.

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