जनता के बीच भारी उत्साह, महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 9 नवंबर 2025 — बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का प्रथम चरण ख़त्म हो चुका है और इस बार जनता के मूड में एक बड़ा परिवर्तन देखा जा रहा है.भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जनता इस बार रोज़गार, महंगाई, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर वोट कर रही है — यह बदलाव की स्पष्ट लहर है.
दीपंकर ने बताया कि उनकी पार्टी ने इस चुनाव को सिर्फ़ सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए लड़ा है.उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर के दाम में कमी, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, कर्ज़ से महिलाओं को राहत, किसानों की सुरक्षा और कानून के राज की बहाली — इन वादों पर हमने जनता से सीधा संवाद किया है.
जनता के बीच भारी उत्साह, महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी
माले महासचिव ने बताया कि 22 अक्टूबर से 6 नवंबर तक पार्टी ने 50 से अधिक जनसभाएँ कीं, जिनमें युवाओं और महिलाओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. उन्होंने कहा कि राजगीर से अभियान की शुरुआत कर पिपरा में हमने इसका समापन किया. हर जगह जनता ने जोश के साथ चुनाव में भागीदारी की और एक-एक वोट की लड़ाई लड़ी.
दीघा से माले प्रत्याशी दिव्या गौतम ने भी सम्मेलन में कहा कि इस चुनाव में युवाओं ने अभूतपूर्व भागीदारी दिखाई है.उन्होंने कहा कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है और युवाओं ने इसे अपना मिशन बना लिया है.
रिकॉर्ड मतदान और सत्ता विरोधी लहर
पहले चरण में 65.08% मतदान को लेकर दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह बिहार के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है.उन्होंने कहा कि जब भी जनता बदलाव चाहती है, वह वोटों में झलकता है.इस बार भी ऐसा ही हुआ है — लोग सरकार से नाराज़ हैं और यह मतदान उसी गुस्से की आवाज़ है.
उन्होंने कहा कि इस बार तीन बड़े कारणों से जनभागीदारी बढ़ी है.
बदलाव की चाहत और सत्ता-विरोधी लहर.
वोट चोरी के खिलाफ जनता की सतर्कता और जागरूकता.
47 लाख मतदाताओं की संख्या घटने के कारण वोट प्रतिशत का बढ़ा हुआ आंकड़ा.
दीपंकर ने कहा कि एसआईआर के मुद्दे ने भी लोगों में जागरूकता बढ़ाई है. लोगों को लगा कि अगर वे सतर्क नहीं रहे, तो उनका वोट छिन सकता है.इसलिए गरीबों, प्रवासियों और अल्पसंख्यकों ने बड़ी संख्या में मतदान किया.
फर्जी वोटिंग और प्रशासनिक दबाव का सामना
माले नेता ने कहा कि इस बार कई क्षेत्रों में फर्जी वोटिंग की कोशिशें हुईं, लेकिन जनता ने साहस के साथ उसका मुकाबला किया.उन्होंने कहा कि मतदाताओं और उम्मीदवारों पर हमले हुए, कई जगह तनाव दिखा, लेकिन लोगों ने डटकर लोकतंत्र की रक्षा की.
उन्होंने एनडीए नेताओं की भाषा की भी आलोचना की.प्रधानमंत्री से लेकर अन्य नेता तक जनता को धमकी देने वाली भाषा बोल रहे थे — बिजली काट देंगे, घर से निकलने नहीं देंगे. अगर विकास इतना हुआ था, तो डराने की क्या ज़रूरत थी?
दीपंकर ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और कहा कि यह संकेत है कि सत्ता का आत्मविश्वास खत्म हो चुका है.
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महिलाओं का गुस्सा और कर्ज माफी’ की गूंज
मीना तिवारी ने कहा कि इस चुनाव में सरकार के दस हजार रुपये वाले प्रलोभन का कोई असर नहीं दिखा. उन्होंने बताया कि महिलाओं के भीतर 20 साल की सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है. बहुत कम महिलाओं ने यह राशि पाई और जिनको मिली, वहां भी भारी अनियमितता रही.
उन्होंने कहा कि कर्ज़ के बोझ से दबे परिवारों में दस हजार में दम नहीं, कर्ज माफी से कम नहीं! का नारा गूंजता रहा. यही नारा पूरे चुनाव का एजेंडा बन गया.
बिहार ने दिखाया जनजागरण, देश को देगा संदेश
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार का यह चुनाव सिर्फ़ राज्य की दिशा नहीं, बल्कि देश की राजनीति का भी संकेत देगा.बिहार की जनता जगी है और अब यह जनादेश पूरे देश को जगाने वाला है.लोग अब डर के माहौल से बाहर निकल चुके हैं. बदलाव तय है.
उन्होंने कहा कि माले आने वाले समय में जनता के हर वादे को नीतिगत मुद्दा बनाएगी और विधानसभा में आम लोगों की आवाज़ को मुखर करेगी.
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण यह साफ़ संकेत दे चुका है कि जनता बदलाव चाहती है.महिलाओं का असंतोष, युवाओं की भागीदारी, रिकॉर्ड मतदान और जनता की सजगता — यह सब मिलकर एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत का संकेत हैं.
दीपंकर भट्टाचार्य के शब्दों में —
बिहार का जनादेश सिर्फ़ एक सरकार को हटाने के लिए नहीं, बल्कि नई राजनीति और नई सोच को जन्म देने के लिए है.

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