अगर यही करना था तो चुनाव की औपचारिकता क्यों?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,14 नवंबर 2025— बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ताज़ा परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में जोरदार हलचल पैदा कर दी है.राजद ने इन नतीजों को पूरी तरह अविश्वसनीय और अप्राकृतिक बताते हुए कहा है कि यह जनादेश नहीं बल्कि चुनाव आयोग का करिश्मा है. राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने चुनाव नतीजों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की भावना और जमीनी सच्चाई के विपरीत आए परिणाम लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में गहरा असंतोष और अविश्वास का माहौल दिखाई दे रहा है. जहां एक ओर सत्ता पक्ष ने जनता के भरोसे की जीत का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष विशेषकर राजद ने इन नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने पटना में जारी बयान में कहा कि यह चुनाव परिणाम किसी भी दृष्टि से जनादेश प्रतीत नहीं होते. उनके अनुसार, जनता के मूड, अभियान की दिशा, वोटिंग पैटर्न और विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर यह परिणाम किसी भी सामान्य राजनीतिक विश्लेषण की परिधि से बाहर हैं. गगन ने सीधे चुनाव आयोग पर संकेत करते हुए कहा कि,
यह जनादेश हो ही नहीं सकता. यह चुनाव आयोग का करिश्मा है. जिन उम्मीदवारों को जीत मिली है, उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें खुद अपनी जीत का यकीन नहीं था.
अगर यही करना था तो चुनाव की औपचारिकता क्यों?
राजद ने यह भी कहा कि यदि नतीजे पहले से ही तय थे, तो चुनाव कराने का पूरा अभ्यास केवल लोकतांत्रिक औपचारिकता मात्र था. चित्तरंजन गगन ने टिप्पणी किया कि,
जब यही करना था तो चुनाव का नाटक ही नहीं करवाना चाहिए था. ऐसी स्थिति में तो सभी को बिना मतदान के ही जीत का प्रमाणपत्र दे दिया जाता.
राजद का यह बयान स्पष्ट रूप से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, जो राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है.
सीट वितरण पर भी सवाल — अगर कारक वही थे, तो नंबर अलग क्यों?
गगन ने कुछ राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा बताए गए जीत के कारकों की ओर भी ध्यान दिलाया. उनका कहना है कि यदि उन कारकों को आधार माना जाए, तो परिणाम पूरी तरह अलग होने चाहिए थे.
उन्होंने कहा कि,
कुछ समीक्षकों का विश्लेषण अगर सही मान भी लें, तो भाजपा से ज्यादा सीटें जदयू को आनी चाहिए थीं. लेकिन नतीजे बिल्कुल अलग दिशा में चले गए.
राजद का यह तर्क चुनाव परिणामों की संरचना पर सवाल उठाता है, विशेषकर एनडीए के अंदरुनी सीट शेयरिंग के तर्क पर.
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हम 20 साल से जनता के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं
राजद प्रवक्ता ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पार्टी पिछले दो दशकों से लगातार विपक्ष में रहते हुए जनता के मुद्दों पर संघर्ष करती आई है. उन्होंने कहा कि यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी.
राजद जनता के मुद्दों पर हाज़िर है और आगे भी जनता से जुड़े सवालों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी.
गगन का यह बयान बताता है कि राजद चुनावी परिणामों से निराश होने के बावजूद राजनीतिक लड़ाई को जारी रखने के लिए तैयार है.
जदयू और नीतीश कुमार पर बड़ा हमला — जी-हजूरी की मजबूरी शुरू
चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गगन ने अपनी सबसे तीखी टिप्पणी नीतीश कुमार और जदयू पर की. उनके अनुसार, परिणामों के बाद सबसे बड़ा संकट नीतीश कुमार और उनके समर्थकों पर आने वाला है.
उन्होंने कहा कि,
अब नीतीश कुमार जी और उनके समर्थकों की मजबूरी हो गई है कि वे भाजपा की जी-हजूरी करें. अब उनका और जदयू का कोई अलग अस्तित्व नहीं बचा है.
राजद के अनुसार, यह केवल तात्कालिक राहत है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई जा सकती है, पर यह स्थिति स्थायी नहीं है.
बहुत जल्द नीतीश को हटाकर BJP अपना मुख्यमंत्री बनाएगी
गगन ने आगे दावा किया कि ये नतीजे जदयू के लिए शुभ संकेत नहीं हैं. उन्होंने आगाह किया है कि,
भाजपा बहुत जल्द ही नीतीश कुमार को बाहर का रास्ता दिखा देगी और न केवल अपना मुख्यमंत्री बनाएगी बल्कि जदयू को भी तोड़कर अपने में मिला लेगी.
राजद का यह बयान संकेत देता है कि वह एनडीए के अंदरुनी समीकरणों में उथल-पुथल की भविष्यवाणी कर रही है.
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 के परिणामों पर राजद की यह कड़ी प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति में नई बहस और विवाद को जन्म दे रही है. विपक्ष जहां इन नतीजों को अप्राकृतिक और अविश्वसनीय” मान रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का दावा है कि यह जनता के भरोसे की जीत है.
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं—क्या विपक्ष की आपत्तियाँ नई राजनीतिक जंग की शुरुआत करती हैं, या चुनाव परिणाम स्थिर सरकार की ओर संकेत देते हैं.

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