बिहार में बढ़ती भीड़ हिंसा के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद

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Ajit Kumar

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बिहार में बढ़ती भीड़ हिंसा के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद

नवादा मॉब लिंचिंग ने कानून के शासन पर खड़े किए गंभीर सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 दिसंबर 2025 — बिहार एक बार फिर भीड़ हिंसा के क्रूर चेहरे से रूबरू हुआ है. नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र अंतर्गत भट्टा गांव में 5 दिसंबर 2025 को मुस्लिम कपड़ा फेरीवाले मोहम्मद अतहर हुसैन की बर्बर मॉब लिंचिंग ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है.इस अमानवीय घटना के खिलाफ भाकपा(माले) और इंसाफ मंच के संयुक्त आह्वान पर आज पूरे बिहार में राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाया गया है.

पटना से लेकर नवादा, नालंदा, दरभंगा, आरा और अन्य जिलों में विरोध मार्च और सभाएं आयोजित किया गया है . राजधानी पटना में बुद्ध स्मृति पार्क के पास आयोजित प्रतिवाद सभा में नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठनों, महिला संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली.

भीड़ हिंसा स्वीकार नहीं — प्रतिवाद का स्पष्ट संदेश

भीड़ हिंसा स्वीकार नहीं — प्रतिवाद का स्पष्ट संदेश

पटना की सभा में ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, पूर्व विधायक गोपाल रविदास, एमएलसी शशि यादव, पीयूसीएल के राज्य सचिव सरफराज, मीरा दत्त, भाकपा(माले) की युवा नेत्री दिव्या गौतम सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया.
सभा का संचालन एआईपीएफ के कमलेश शर्मा ने किया और अध्यक्षता भाकपा(माले) पटना नगर सचिव जितेंद्र कुमार ने की.

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बिहार को सांप्रदायिक हिंसा की प्रयोगशाला बनने नहीं दिया जाएगा. भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेना लोकतंत्र, संविधान और मानवाधिकारों पर सीधा हमला है.

नवादा की घटना: मानवता पर धब्बा

मोहम्मद अतहर हुसैन को केवल मुस्लिम होने के संदेह में भीड़ ने घेर लिया. उन्हें बेरहमी से पीटा गया, गर्म औज़ार से दागा गया, कान काटे गए, उंगली तोड़ी गई और निजी अंगों में पेट्रोल डाला गया. अधमरी हालत में छोड़ दिए जाने के बाद, पीड़ित के खिलाफ ही चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया. इलाज के दौरान 12 दिसंबर 2025 को उनकी मौत हो गई.

वक्ताओं ने इस मौत के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और चिकित्सकीय लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. यह घटना न केवल कानून व्यवस्था की विफलता है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे पीड़ित को ही अपराधी बनाने की कोशिश की जाती है.

भय के साए में भट्टा गांव

घटना के बाद भट्टा गांव और आसपास के इलाकों में भय का माहौल व्याप्त है। गांव में रह रहे 10–15 मुस्लिम परिवार डरे हुए हैं और खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं हैं. आरोप है कि अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है और उनकी सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि की गंभीर जांच अब तक नहीं की गई है.

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गृह मंत्री से जवाब की मांग

प्रदर्शनकारियों ने बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी से राज्य की कानून व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग किया है. वक्ताओं ने कहा कि गृह मंत्री के कार्यभार संभालने के बाद मॉब हिंसा और बुलडोज़र कार्रवाई की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. यदि बिहार में तथाकथित योगी मॉडल लागू करने की कोशिश की जा रही है, तो यह राज्य की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक परंपरा के लिए बेहद खतरनाक होगा.

प्रमुख मांगें

प्रतिवाद के दौरान निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं,

मोहम्मद अतहर हुसैन की हत्या में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा

पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्याय और पर्याप्त मुआवज़ा

झूठे मुकदमों की तत्काल वापसी

दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई

बुलडोज़र कार्रवाई और भीड़तंत्र पर तुरंत रोक

लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का आह्वान

भाकपा(माले) और इंसाफ मंच ने बिहार की जनता से अपील किया है कि वह संविधान, लोकतंत्र और इंसाफ की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे आए. नफरत, सांप्रदायिकता और दमन की राजनीति के खिलाफ संघर्ष को और तेज किया जाएगा.

यह प्रतिवाद केवल एक घटना के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो भीड़ को न्यायाधीश और जल्लाद दोनों बनने की छूट देती है. बिहार की धरती हमेशा से सामाजिक न्याय और भाईचारे की रही है, और इसे नफरत की राजनीति से बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है.

भीड़तंत्र के खिलाफ यह संघर्ष जारी रहेगा, जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा.

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