शपथ के तुरंत बाद तेज़ हुई कार्यवाही: एनडीए सरकार का औद्योगिक एक्शन प्लान
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 25 नवंबर — बिहार में औद्योगिक विकास की नई शुरुआत हो चुकी है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने सोमवार को विकास भवन पहुंचकर उद्योग मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया.पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बिहार को आत्मनिर्भर, नवाचार आधारित और उद्यमिता-केंद्रित अर्थव्यवस्था में बदलना एनडीए सरकार का प्रमुख लक्ष्य है.
डॉ. जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में रोजगार सृजन, उद्योग विस्तार और नई तकनीकों को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पूर्ण निष्ठा, समर्पण और पारदर्शिता के साथ बिहार को औद्योगिक जगत में नई पहचान दिलाने के लिए कार्य करेंगे.
नए उद्योग मंत्री का संकल्प: बिहार को नवाचार और उद्यमिता का हब बनाएंगे
पदभार संभालते ही डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए व्यापक औद्योगिक रोडमैप तैयार किया गया है.उन्होंने बताया कि राज्य के हर जिले में औद्योगिक व नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहाँ युवा स्टार्टअप शुरू कर सकें, प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें और निवेशक कंपनियों से सीधे जुड़ सकें.
उन्होंने कहा कि,
हमारा प्रयास है कि बिहार आत्मनिर्भर बने और उद्योग एवं नवाचार का एक शक्तिशाली केंद्र तैयार हो. राज्य के युवाओं को अधिकतम रोजगार और अवसर उपलब्ध कराना ही हमारा संकल्प है.
शपथ के तुरंत बाद तेज़ हुई कार्यवाही: एनडीए सरकार का औद्योगिक एक्शन प्लान
डॉ. जायसवाल ने बताया कि एनडीए सरकार ने शपथ ग्रहण के बाद ही तेज़ गति से निर्णय लेने शुरू कर दिए हैं. कैबिनेट की पहली बैठक में ही कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनके माध्यम से बिहार को नए औद्योगिक युग की ओर आगे बढ़ाने की योजना है.
मुख्य निर्णयों में शामिल हैं.
नई तकनीक और एआई आधारित उद्योगों को बढ़ावा
राज्य भर में इंडस्ट्रियल इनोवेशन सेंटर्स की स्थापना
स्टार्टअप और MSME सेक्टर के लिए नई प्रोत्साहन नीतियाँ
युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार
ग्लोबल कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने की रणनीति
नए सैटेलाइट शहरों का विकास
बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की योजना
ये फैसले निश्चित रूप से बिहार के युवाओं के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों के बड़े दरवाज़े खोलते हैं.
बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
डॉ. जायसवाल ने कहा कि बिहार की क्षमता बहुत बड़ी है और सरकार का प्रयास है कि इस क्षमता को उद्योग, टेक्नोलॉजी और कृषि-आधारित उद्यमों के माध्यम से तेज़ी से बढ़ाया जाए.
उन्होंने कहा कि,
हमारी प्रतिबद्धता है कि बिहार को एक मजबूत, विकसित और रोजगार-सृजन करने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करें. राज्य को भारत के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना ही लक्ष्य है.
सरकार का मानना है कि यदि उद्योग और उद्यमिता के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाए, तो बिहार आने वाले वर्षों में देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल हो सकता है.
निवेश आकर्षित करने के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचा
नई औद्योगिक नीति में निवेशकों के लिए पारदर्शी प्रक्रियाएँ, ऑनलाइन पोर्टल, सिंगल-विंडो सिस्टम और भूमि उपलब्धता को सरल बनाना शामिल है. सरकार का कहना है कि बिहार अब इंवेस्टमेंट-फ्रेंडली स्टेट के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा.
राज्य में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स, टेक्निकल हब, स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क और एग्रो-आधारित क्लस्टर विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
युवाओं के लिए रोजगार की नई राह
डॉ. जायसवाल ने कहा कि बिहार के युवा प्रतिभाशाली हैं और सही अवसर मिलने पर वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं. इसलिए सरकार उन्हें:
बेहतर प्रशिक्षण
आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम
औद्योगिक इंटर्नशिप
स्टार्टअप फंडिंग
मेंटरशिप प्रोग्राम
प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रही है.
उन्होंने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में लाखों युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
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स्टार्टअप और MSME सेक्टर को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
नई नीति के अनुसार:
स्टार्टअप्स को आसान फंडिंग
0% ब्याज पर सीड फंड
इनक्यूबेशन सेंटर
मार्केट लिंकअप
एक्सपोर्ट सपोर्ट
जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. इससे ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में नए उद्यम खड़े होंगे.
बिहार की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
एनडीए सरकार के इन प्रयासों के बाद बिहार में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे. राज्य के आर्थिक ढांचे को मजबूती मिलेगी, साथ ही बिहार देश के औद्योगिक नक्शे पर अपनी जगह और मजबूत करेगा.
डॉ. दिलीप जायसवाल के नेतृत्व में उद्योग विभाग से यह उम्मीद की जा रही है कि बिहार जल्द ही विकसित उद्योग-हब के रूप में पहचाना जाएगा.

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