बिहार में शिक्षा पर सियासी संग्राम: क्या नई घोषणाएं सिर्फ कागजी हैं?

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक विवाद और कॉलेज-भर्ती घोषणा

घोषणाओं की राजनीति बनाम जमीनी हकीकत

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 6 अप्रैल 2026 — बिहार की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने राज्य की एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नई डिग्री कॉलेज खोलने और शिक्षकों की बहाली की घोषणाएं महज दिखावा हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है.

क्या है पूरा मामला?

राज्य सरकार ने हाल ही में 209 नए डिग्री कॉलेज खोलने और 9196 शिक्षकों व गैर-शैक्षणिक कर्मियों की भर्ती की घोषणा की है. लेकिन राजद का कहना है कि यह घोषणा सिर्फ आंख में धूल झोंकने जैसी है.

चित्तरंजन गगन के अनुसार,

राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पहले से ही हजारों पद खाली हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 4000 से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं.
वास्तविक स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर बताई जा रही है.

कॉलेजों की हालत: गेस्ट फैकल्टी के भरोसे शिक्षा

राजद प्रवक्ता का आरोप है कि बिहार के अधिकांश कॉलेज आज गेस्ट फैकल्टी के सहारे चल रहा हैं.

कई कॉलेजों में स्थिति यह है कि,

कुछ विभागों में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है.
पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है.
छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है .

यह सवाल उठता है कि जब मौजूदा संस्थानों में ही शिक्षकों की भारी कमी है, तो नए कॉलेज खोलने का क्या औचित्य है?

स्कूलों की सच्चाई: अपग्रेड तो हुआ, लेकिन व्यवस्था नहीं

सरकार ने दावा किया कि हर ग्राम पंचायत में एक-एक माध्यमिक विद्यालय को उच्च माध्यमिक (प्लस टू) में अपग्रेड किया गया है.

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है,

कई स्कूलों में बुनियादी ढांचा ही नहीं है.
प्रयोगशाला (लैब) की व्यवस्था नहीं है .
पर्याप्त शिक्षक और संसाधनों की कमी है.
छात्रों को मजबूरन उन्हीं स्कूलों में नामांकन लेना पड़ रहा है.

इससे छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है.

डेटा का खेल: सरकार के पास सही आंकड़े भी नहीं?

चित्तरंजन गगन ने एक और बड़ा आरोप लगाया है कि सरकार के पास शिक्षकों की वास्तविक जरूरत और उपलब्धता का सही डेटा नहीं है.

विभाग अब भी 2013 के पुराने आंकड़ों पर काम कर रहा है.
हर महीने शिक्षक रिटायर हो रहे हैं.
लेकिन रिक्तियों की सही गणना नहीं हो रही है .

यही वजह है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास देखने को मिलता है.

महागठबंधन vs एनडीए: किसका प्रदर्शन बेहतर?

राजद प्रवक्ता ने महागठबंधन सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा,

सिर्फ 17 महीनों में TRE 1 और TRE 2 के जरिए बड़ी संख्या में बहाली हुई.
TRE 3 की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी.

वहीं, एनडीए सरकार पर आरोप है कि,

पिछले 18 महीनों से TRE 4 की घोषणा हो रही है.
लेकिन अब तक नोटिफिकेशन तक जारी नहीं हुआ है .

इससे सरकार की मंशा और कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं.

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शिक्षा व्यवस्था पर खतरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो, बिहार की शिक्षा व्यवस्था और कमजोर हो सकती है.
युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा,राज्य में रोजगार और विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है

निष्कर्ष: घोषणाओं से नहीं, काम से बनेगी शिक्षा

बिहार में शिक्षा को लेकर यह विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है.

अगर सरकार को सच में शिक्षा सुधारना है, तो उसे,

खाली पदों को जल्द भरना होगा, स्कूल और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाएं सुधारनी होंगी, पारदर्शी और तेज भर्ती प्रक्रिया अपनानी होगी.

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