एसआईआर के दबाव में शिक्षकों ने की आत्महत्या,राजद ने बनाई जांच कमेटी

| BY

Ajit Kumar

बिहार
एसआईआर के दबाव में शिक्षकों ने की आत्महत्या,राजद ने बनाई जांच कमेटी

नौकरी जाने के डर और अधिकारियों की फटकार ने ली जान

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 6 सितम्बर बिहार में शिक्षकों पर थोपे गए एसआईआर (स्पेशल समरी रिवीजन) कार्य का बोझ अब जानलेवा साबित हो रहा है.कुछ ही दिनों के भीतर दो शिक्षकों ने दबाव और प्रताड़ना से टूटकर आत्महत्या कर ली है. राजद ने इस घटना को गंभीर मानते हुए जांच कमेटी का गठन किया है और सरकार व प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है.

चुनाव आयोग की सख्ती, शिक्षकों की जान पर भारी

चुनाव आयोग ने एसआईआर कार्य के लिए बेहद कम समय सीमा तय किया है. इस वजह से बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) बनाए गए शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविकाएं और अन्य कर्मी मानसिक दबाव में आ गए हैं. बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के, अनजान इलाकों में जिम्मेदारी थोप दी जाती है. लक्ष्य पूरा न करने पर कार्रवाई और नौकरी जाने की धमकी दी जाती है.

काम का बोझ और धमकियां बनी मौत की वजह

29 अगस्त को मुजफ्फरपुर की 58 वर्षीय शिक्षिका आशा मिंज और 31 अगस्त को भागलपुर के 50 वर्षीय शिक्षक अविनाश कुमार ने आत्महत्या कर ली है.

आशा मिंज को हाल ही में अपरिचित क्षेत्र का बीएलओ बनाया गया था, दबाव और डांट-फटकार ने उन्हें तोड़ दिया था.

अविनाश कुमार हाल ही में ऑपरेशन से गुजरे थे, तबीयत खराब थी. असमर्थता जताने पर उन्हें नौकरी से निकालने और जेल भेजने की धमकी मिली थी .मजबूर होकर उन्होंने अपनी जान हि दे दी.

राजद की जांच कमेटी ने खोली पोल

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने जांच कमेटी गठित किया है .इसमें पूर्व मंत्री इजरायल मंशुरी, प्रवक्ता चित्तरंजन गगन, विधायक निरंजन राय, पूर्व विधायक स्वीटी सिमा हेम्ब्रम और अन्य नेता शामिल रहे.
कमेटी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि एसआईआर कार्य में शिक्षकों को अमानवीय दबाव और गलत तरीके से काम कराने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है.

ये भी पढ़े :तेजस्वी यादव पर सियासी निशाना: बिहार बहादुरों का या बीड़ी वालों का?
ये भी पढ़े :OPS बहाली को लेकर पटना में शिक्षकों और कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन

भय और चुप्पी में जी रहे बीएलओ

आज स्थिति यह है कि सैकड़ों बीएलओ पर कार्रवाई हो चुकी है.नौकरी जाने और जेल भेजे जाने के डर से कोई भी शिक्षक कैमरे के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है.
शिक्षक वर्ग खुलकर अपनी पीड़ा नहीं बता पा रहा है.जबकि भीतर ही भीतर मानसिक और शारीरिक दबाव उन्हें तोड़ रहा है.

सरकार और आयोग पर सवालों की बौछार

राजद ने सवाल उठाया है कि आखिर शिक्षकों की जान लेकर ही क्यों चुनावी काम पूरे किए जा रहे हैं?

क्या शिक्षकों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?

क्या नौकरी बचाने के लिए उनकी जान दांव पर लगाई जाएगी?

सरकार और प्रशासन कब तक चुप रहेंगे?

राजद की मांग है कि सरकार तत्काल इस मामले पर कार्रवाई करे, एसआईआर कार्य का दबाव कम करे और जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त सजा दिया जाये .इस तरह की घटनाएं न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को भी उजागर करती हैं.

निष्कर्ष

बिहार में एसआईआर कार्य का दबाव अब शिक्षकों की जान पर भारी पड़ रहा है.मुजफ्फरपुर और भागलपुर में हुई आत्महत्याएं इस बात का सबूत हैं कि जब काम का बोझ, अधिकारियों की फटकार और नौकरी खोने का डर हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो हालात जानलेवा बन जाते हैं.

राजद की जांच कमेटी की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग और प्रशासन की सख्ती ने शिक्षकों को मानसिक व शारीरिक रूप से तोड़ दिया है.अगर सरकार और आयोग ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं.

यह सिर्फ दो शिक्षकों की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता की गवाही है. अब समय है कि सरकार और प्रशासन दोनो संवेदनशीलता दिखाते हुए दबाव की इस काली जो व्यवस्था है उसे बदले.

Trending news

Leave a Comment