वोटर लिस्ट से दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम क्यों हटा रहे हैं? प्रियंका गांधी का बड़ा आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 27 अगस्त 2025 —कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिहार में पहले हुए चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है.उन्होंने दावा किया है कि हजारों लोगों ने शिकायत किया है कि वे पहले कई बार वोट डाल चुके हैं. लेकिन इस बार उनका नाम सूची में नहीं है.
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए पोस्ट में प्रियंका गांधी ने लिखा है कि,
बिहार में हजारों लोगों ने हमसे कहा- हमने कई बार वोट डाला है, लेकिन इस बार हमारा नाम काट दिया गया, जिंदा लोगों को वोटर लिस्ट में मार दिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा यह भेदभाव जानबूझकर किया जा रहा है और यह खासतौर पर समाज के वंचित वर्गों — जैसे दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय — को निशाना बना रहा है.
प्रियंका गांधी ने बीजेपी पर भी सीधा हमला बोला है ,और उन्होंने लिखा कि,
चुनाव आयोग अमीरों का वोट नहीं काट रहा, बल्कि दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों और अल्पसंख्यकों के वोट काट रहा है. क्योंकि बीजेपी नहीं चाहती कि आपकी आवाज सुनाई दे, आपके बच्चों को उनका हक मिले.
उन्होंने यह टिप्पणी विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हवाले से साझा किया है . जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर गंभीर राजनीतिक रणनीति बना रही है.
क्या कहता हैं चुनाव आयोग के नियम?
भारतीय चुनाव आयोग का दावा है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाना एक नियमित प्रक्रिया है. जिसमें मृत्यु, डुप्लीकेट एंट्री या स्थानांतरण जैसी स्थितियों में नाम हटाए जाते हैं. हालांकि, बार-बार यह सवाल उठाया जाता रहा है, कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है. और कई बार जीवित व योग्य मतदाताओं के नाम भी गलती से हटा दिए जाते हैं.
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राजनीतिक असर
इस तरह के आरोप आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं. खासकर तब जब विपक्ष इसे ,जनतंत्र की हत्या के रूप में प्रचारित करने की कोशिश करे. प्रियंका गांधी की इस पोस्ट से यह साफ है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है.
निष्कर्ष
प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा उठाए गए सवाल बिहार की चुनावी प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर संकेत करते हैं. उनका आरोप है कि चुनाव आयोग जानबूझकर समाज के वंचित वर्गों — दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों — के वोट काट रहा है. ताकि बीजेपी को फायदा हो सके. यदि इन आरोपों में सच्चाई है. तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है. ऐसे में ज़रूरत है कि चुनाव आयोग इस मामले में पारदर्शी जांच करे और सभी योग्य मतदाताओं को उनका संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित कराए. यह मुद्दा सिर्फ एक पार्टी या राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख से जुड़ा हुआ है.
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