BJP की नफरत की राजनीति बनाम संविधान: अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा

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Ajit Kumar

भारत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे BJP की नफरत की राजनीति पर बयान देते हुए

अल्पसंख्यकों पर टारगेटिंग और Bulldozer Politics से खतरे में लोकतंत्र: कांग्रेस

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 5 फरवरी 2026 — देश की राजनीति में जब सत्ता की भाषा नफरत, डर और विभाजन पर टिकने लगे, तब लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि संकटग्रस्त मूल्य बन जाता है.कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक BJP मुख्यमंत्री द्वारा मुस्लिम समाज को निशाना बनाकर दिया गया बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरे का भी घंटी है. कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ शब्दों में कहा है कि आज देश में Selective Targeting और Bulldozer Politics को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

ध्रुवीकरण की राजनीति और सत्ता का दुरुपयोग

.कांग्रेस का आरोप है कि BJP के कई नेता लगातार ध्रुवीकरण की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं.मुस्लिम समाज को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए दूसरे दर्जे का नागरिक साबित करने की कोशिश हो रहा है. यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें समाज को धर्म और पहचान के आधार पर बांटकर सत्ता को मजबूत किया जा रहा है.

Bulldozer Politics: कानून नहीं, डर का शासन

पिछले कुछ वर्षों में बुलडोजर राजनीति एक प्रतीक बन चुका है. कांग्रेस का कहना है कि कानून की आड़ में खास समुदायों को टारगेट किया जा रहा है. बिना न्यायिक प्रक्रिया पूरी किए घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलाना संविधान के मूल सिद्धांतों ,न्याय, समानता और कानून के राज , पर सीधा हमला है. यह तरीका लोकतंत्र नहीं, बल्कि भय का वातावरण पैदा करता है.

देश के कई राज्यों में अल्पसंख्यकों पर हमले

कांग्रेस ने ध्यान दिलाया है कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है.बल्कि अनेक राज्य में फैले हुये है,

मध्य प्रदेश ओडिशा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, केरल, इन राज्यों में चर्चों पर हमले और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसक घटनाएं सामने आया हैं. यह दर्शाता है कि नफरत की राजनीति स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर फैल रहा है.

केरल में चुनाव, और दोहरा चरित्र

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रवैये पर भी सवाल उठाते हुये उन्होंने आरोप लगाया है कि केरल में चुनाव के समय प्रधानमंत्री चर्च की प्रार्थनाओं में शामिल होते हैं, लेकिन जब उन्हीं चर्चों पर हमले होता हैं, तब उनकी चुप्पी बहुत कुछ कहता है. यह दोहरा चरित्र जनता के विश्वास को कमजोर करता है और यह संदेश देता है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा राजनीतिक सुविधा पर निर्भर है.

Hate Speech को बढ़ावा देने का आरोप

कांग्रेस का सबसे तीखा हमला BJP की राजनीतिक संस्कृति पर है.पार्टी का कहना है कि आज BJP का प्रवक्ता बनने की Qualification नफरत फैलाना बन गई है.जो जितना ज्यादा Objectionable, Inflammatory और Divisive Speech देगा, वह उतना बड़ा रक्षक माना जाता है.
इस तरह की भाषा न केवल समाज में ज़हर घोलती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है.

संविधान की मूल भावना पर चोट

भारत का संविधान विविधता में एकता की भावना पर आधारित है. लेकिन कांग्रेस के अनुसार, आज उसी संविधान की core values को कमजोर किया जा रहा है.धर्मनिरपेक्षता, समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मूल अधिकार खतरे में हैं. जब सरकार या सत्तारूढ़ दल नफरत भरे बयानों पर चुप रहता है, तो यह मौन भी अपराध में भागीदारी बन जाता है

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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सवाल

कांग्रेस ने महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर भी असंतोष जताया है. पार्टी का कहना है कि राष्ट्रपति जी ने स्वयं गरीबी और कमजोर तबकों की पीड़ा को देखा है, लेकिन उनके अभिभाषण में उस चिंता की कोई स्पष्ट झलक नहीं दिखी. यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग ज़मीनी सच्चाइयों से दूर होते जा रहा हैं?

विकसित भारत या विभाजित भारत?

कांग्रेस ने अंत में एक सीधा और कठोर सवाल देश के सामने रखा है,
क्या आप विकसित भारत को नफरत और विभाजन की बुनियाद पर खड़ा करना चाहते हैं?
कांग्रेस का मानना है कि सच्चा विकास तभी संभव है जब हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से हो.

निष्कर्ष

कांग्रेस के अनुसार, आज भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक रास्ता नफरत, ध्रुवीकरण और डर का है, जबकि दूसरा रास्ता संविधान, समानता और भाईचारे का. लोकतंत्र को बचाने के लिए जरूरी है कि सत्ता से सवाल पूछे जाएं, नफरत की राजनीति को चुनौती दी जाए और संविधान की आत्मा की रक्षा की जाये,क्योंकि अगर लोकतंत्र ही कमजोर हो गया, तो विकसित भारत केवल एक नारा बनकर रह जाएगा.

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