लखनऊ से उठी सम्मान और सामाजिक न्याय की पुकार
तीसरा पक्ष ब्यूरो लखनऊ, उत्तर प्रदेश 27 नवंबर 2025 — भारत रत्न, संविधान निर्माता, महान समाज सुधारक डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की पुण्यतिथि (6 दिसंबर) को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) द्वारा तैयारियों का सिलसिला ज़ोरों पर है.आज सुबह BSP के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @Bsp4u के हवाले से जानकारी मिली कि आगामी श्रंद्धांजलि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का BSP के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने लखनऊ में पहुंचकर गहन निरीक्षण किया हैं.
इस कार्यक्रम को केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समानता, न्याय, स्वाभिमान और संवैधानिक मूल्यों को पुनः स्मरण करने का ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है.बाबा साहब के विचारों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ, BSP के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय संगठन एकजुट होकर बेहतर से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटे हैं.
निरीक्षण में वरिष्ठ BSP नेताओं की मौजूदगी — ज़मीनी स्तर पर तैयारी का संदेश
आज किए गए निरीक्षण में कई महत्वपूर्ण BSP नेता मौजूद रहे.
उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं.
श्री मुनकाद अली, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं मुख्य मंडल प्रभारी
श्री सूरज सिंह जाटव, वरिष्ठ बहुजन नेता
श्री शैलेंद्र गौतम, लखनऊ जिला अध्यक्ष
तथा BSP के अनेक अन्य मंडल एवं जिला पदाधिकारी
इन सभी ने स्थल पर पहुंचकर कार्यक्रम में अपेक्षित व्यवस्थाओं—जैसे मंच व्यवस्था, श्रद्धांजलि स्थल का लेआउट, सुरक्षा, पार्किंग, आगंतुकों के लिए मार्गदर्शन, और दिव्यांगजन हेतु सुविधा—का प्रत्यक्ष जायजा लिया.
इस निरीक्षण से साफ संदेश जाता है कि BSP इस आयोजन को अत्यंत गंभीरता, अनुशासन और सम्मान के साथ कराना चाहती है.
6 दिसंबर: केवल एक तारीख नहीं, सामाजिक न्याय की आत्मा का प्रतीक
6 दिसंबर, जिसे ‘परिनिर्वाण दिवस’ भी कहा जाता है, भारतीय समाज के लिए केवल इतिहास का हिस्सा नहीं — यह वह स्मृति दिवस है जो हमें बताता है कि आधुनिक भारत का लोकतांत्रिक ढांचा किस महान व्यक्ति के बलिदान, संघर्ष और दूरदर्शिता पर खड़ा है.
बाबा साहब अंबेडकर के प्रति सम्मान व्यक्त करना सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि संविधान और उसमें निहित समानता के मूल्यों की रक्षा का संकल्प है.
BSP सदैव डॉ. अंबेडकर की विचारधारा को अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यों के केंद्र में रखती है. इसलिए यह आयोजन उनके लिए विशेष महत्व रखता है.
कार्यक्रम स्थल पर चल रहा है व्यापक प्रबंधन: आमजन व समर्थकों की बड़ी संख्या की संभावना
लखनऊ में होने वाला यह आयोजन प्रदेश भर के बहुजन समाज के लाखों समर्थकों की उपस्थिति को आकर्षित करता है.अनुमान है कि इस बार भी बड़ी संख्या में लोग बाबा साहब को श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे.
इसी को ध्यान में रखते हुए BSP पदाधिकारी निम्न पहलुओं को लेकर विशेष रूप से सक्रिय दिखाई दिए,
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा
आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार
सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस व स्वयंसेवकों की व्यवस्था
आपातकालीन चिकित्सा सहायता का प्लान
कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखने पर जोर
मंच पर वक्ताओं की क्रमबद्ध उपस्थिति
फूल-श्रद्धांजलि के लिए सुव्यवस्थित मार्ग
अनुशासन बनाए रखने हेतु स्वयंसेवी टोली
मीडिया कवरेज के लिए विशेष व्यवस्था
LIVE कवरेज के लिए मीडिया ज़ोन
विभिन्न चैनलों व डिजिटल टीमों के लिए विशेष स्थान
सुविधा और सुचारु संचालन
पानी, शेड, बैठने की व्यवस्था
दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पथ
पार्किंग की सुचारु व्यवस्था
इस प्रभावी प्लानिंग से यह स्पष्ट है कि BSP इस आयोजन को किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से दूर रखते हुए, उच्चतम स्तर की मर्यादा के साथ सम्पन्न करना चाहती है.
मंडल व जिला पदाधिकारियों से निरंतर संवाद: पार्टी का जमीनी कनेक्शन मजबूत
निरीक्षण के दौरान नेताओं ने कर्मचारियों तथा स्वयंसेवकों से भी बातचीत की.
उन्हें निर्देश दिए गए कि,
कार्यक्रम का हर हिस्सा समयबद्ध और अनुशासित हो,
आगंतुकों को दिशा-निर्देश स्पष्ट मिलें,
और कार्यक्रम में आने वाला हर व्यक्ति सम्मानपूर्वक महसूस करे.
BSP की यह कार्यशैली हमेशा जमीनी स्तर पर संवाद और संगठनात्मक अनुशासन के लिए जानी जाती रही है. इसी परंपरा को जारी रखते हुए कार्यक्रम के हर स्तर पर विशेष फोकस रखा गया है.
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बाबा साहब का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक — ‘समानता ही राष्ट्र की नींव
यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का केंद्र है, जहां लाखों लोग यह संकल्प दोहराते हैं.
जाति और भेदभाव से मुक्त समाज बनाना है
संविधान के मूल्यों की रक्षा करनी है
शिक्षा, जागरूकता और समान अवसर के लिए संघर्ष जारी रखना है
BSP के इस निरीक्षण संदेश का उद्देश्य यही है कि बाबा साहब की विचारधारा को सम्मान के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए.
निष्कर्ष: 6 दिसंबर का कार्यक्रम सामाजिक न्याय के नए संकल्प का प्रतीक होगा
BSP द्वारा किए गए आज के निरीक्षण से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि 6 दिसंबर 2025 का यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं होगा, बल्कि बहुजन आंदोलन की एक बड़ी और ऐतिहासिक एकजुटता का केंद्र बनने जा रहा है.
अंबेडकरवाद की धारा को सशक्त बनाने और लोगों तक उनके मूल सिद्धांत — शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो — को पहुंचाने का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रेरणा देगा.
लखनऊ में BSP की यह सक्रियता बताती है कि वह बाबा साहब के मिशन को केवल भाषणों में नहीं, बल्कि संगठनात्मक कार्रवाई में भी उतनी ही गंभीरता से निभा रही है.

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