BSP चीफ मायावती ने की राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा: जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर बड़ा फोकस

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Ajit Kumar

भारत
BSP चीफ मायावती ने की राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा: जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर बड़ा फोकस

बिहार विधानसभा परिणामों से सीखने की जरूरत—BSP का बड़ा राजनीतिक संदेश

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,19 नवंबर 2025— देश की प्रमुख बहुजन राजनीति की धुरी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी ने आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अपने संगठन को मज़बूत करने के लिए कमर कस ली है. पार्टी प्रमुख बहन कु. मायावती ने महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और झारखंड जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चल रही संगठनात्मक गतिविधियों की राज्यवार गहन समीक्षा बैठक किया .
इस बैठक में जहां जनता के बीच BSP के जनाधार को मजबूत करने पर बल दिया गया, वहीं पहले दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा किया गया .

संगठन की मजबूती और सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाना—BSP की प्राथमिकता

बैठक का मुख्य फोकस रहा—वे इलाके और सामाजिक वर्ग जहाँ BSP का पारंपरिक वोटबैंक तो मौजूद है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर उसे और सक्रिय करने की आवश्यकता है.
मायावती ने स्पष्ट संदेश दिया है कि,

संगठन को और अधिक मजबूत किया जाए

सभी कमियाँ दूर की जाएं

जिम्मेदार व पदाधिकारी जी-जान से फील्ड में लगें

समाज के हर वर्ग में पार्टी की विचारधारा को नए ढंग से पहुंचाया जाए

यह दिशा-निर्देश इस बात को दर्शाता है कि BSP अब केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सर्वसमाज के साथ अपने विस्तार को लेकर अत्यंत गंभीर है.

डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की विचारधारा को आगे ले जाने की प्रतिबद्धता

BSP की पहचान उसकी मिशनरी राजनीति है—जहाँ जातिवादी दिखावे से दूर, सामाजिक न्याय और आत्म-सम्मान की राजनीति को केंद्र में रखा जाता है.
मायावती ने कहा कि,

परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जी का आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का कारवाँ आगे बढ़ाना ही वास्तविक जनहित और देशहित है.

पार्टी का यह बयान स्पष्ट रूप से बताता है कि BSP अपनी मूल विचारधारा—बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय—को लेकर आने वाले समय में और एक्टिव होने जा रही है.

वोटर लिस्ट का सघन पुनरीक्षण (SIR): BSP ने दिया बड़ा संदेश

मायावती ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों और नाम कटने की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से उठाया है .
उन्होंने निर्देश दिया कि,

सघन पुनरीक्षण अभियान को प्राथमिकता दी जाए

किसी भी नागरिक को वोट के संवैधानिक अधिकार से वंचित न होने दिया जाए

बूथ स्तर पर टीमों का प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए

यह कदम आने वाले चुनावों के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर उन राज्यों में जहाँ मतदान पैटर्न आखिरी समय में वोटर लिस्ट की वजह से प्रभावित होता है.

बिहार विधानसभा परिणामों से सीखने की जरूरत—BSP का बड़ा राजनीतिक संदेश

BSP प्रमुख ने हाल ही में आए बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों को बेहद चौंकाने वाला बताया और कहा कि इन परिणामों से सभी विपक्षी दलों को सीख लेनी चाहिए.
उन्होंने कहा,

पहले चुनावों को धनबल, बाहुबल से प्रभावित किया जाता था

लेकिन अब स्थिति बदलकर सरकारी धन व संस्थानों के दुरुपयोग तक पहुँच गई है

इससे चुनावों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और भी कठिन हो गई है

यह बयान विपक्ष की उस शिकायत को मजबूत करता है जिसमें वे लगातार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं.

6 दिसंबर को बाबा साहेब अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस—मिशनरी भावना से आयोजन का आह्वान

BSP प्रमुख ने इस वर्ष 6 दिसंबर, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस को बेहद अनुशासित और मिशनरी तरीके से मनाने का आह्वान किया.
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि

जातिवादी पार्टियों की तरह दिखावटी कार्यक्रम न किए जाएं

BSP की मिशनरी सोच—समानता, भाईचारा, सामाजिक न्याय—को केंद्र में रखा जाए

बूथ से लेकर राज्य स्तर तक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए

इससे स्पष्ट है कि BSP अपने सामाजिक-राजनीतिक मिशन को फिर से सक्रिय मोड में ला रही है.

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BSP की रणनीति: आने वाले चुनावों से पहले का बड़ा संकेत

अंदरूनी सूत्रों और संगठनात्मक संदेशों से यह साफ है कि BSP अब एक बार फिर से.

ग्राउंड एक्टिविटी

बूथ संरचना

सोशल इंजीनियरिंग

और युवा कैडर को तैयार करने

पर विशेष जोर दे रही है।

तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में आगामी वर्षों में चुनाव होने हैं, ऐसे में BSP का यह कदम रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.

निष्कर्ष

BSP @Bsp4u के ट्वीट से स्पष्ट होता है कि पार्टी आने वाले समय में अपने राजनीतिक मिशन को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने वाली है.
संगठन की समीक्षा, वोटर लिस्ट सुधार, चुनावी रणनीति में बदलाव, और दलित-बहुजन आंदोलन की पुनर्स्थापना को लेकर मायावती का यह कदम BSP के लिए एक नई राजनीतिक ऊर्जा का संकेत देता है.

यह कहना गलत नहीं होगा कि BSP अब अपने मूल मिशन के साथ नए सिरे से मैदान में उतरने को तैयार है—और आने वाले महीनों में इसका असर कई राज्यों की राजनीति में देखने को मिल सकता है.

न्यूज़ स्रोत: यह खबर BSP @Bsp4u के आधिकारिक X (Twitter) पोस्ट पर आधारित है.

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