बिहार में बुलडोजर राज के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद: पटना सहित पूरे प्रदेश में उठी आवाज़ें

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Ajit Kumar

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बिहार में बुलडोजर राज के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद: पटना सहित पूरे प्रदेश में उठी आवाज़ें

सरकार में भाजपा का वर्चस्व, गरीबों पर बुलडोजर की राजनीति — महबूब आलम

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 3 दिसंबर 2025 — बिहार में नई सरकार बनने के तुरंत बाद राजधानी पटना से लेकर अन्य जिलों तक फुटपाथ दुकानदारों, दलित-गरीब परिवारों और छोटे व्यवसायियों पर कथित रूप से अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर चलाया जा रहा है.इस कार्रवाई ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है. सरकार की इस नीति के खिलाफ आज बिहार में माले, खेग्रामस और व्यवसायी महासंघ के नेतृत्व में राज्यव्यापी प्रतिवाद आयोजित किया गया.मुख्य नारा था.
बुलडोजर नहीं पर्चा दो, रोज़ी-रोटी की सुरक्षा दो!

पटना में विशाल धरना: विधानसभा के समक्ष गूंजे नारे

राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर हजारों की संख्या में लोग जुटे.
भीड़ में शामिल थे,

फुटपाथ दुकानदार

दलित-गरीब परिवार

रोज़गार खो चुके युवा

शहर के विभिन्न बाजारों के प्रभावित व्यवसायी

इनमें न्यू मार्केट, महावीर मंदिर, वीणा सिनेमा, दीघा हाट, कारगिल चौक, चितकोहरा बाजार, गोरिया टोली आदि इलाकों के लोग बड़ी संख्या में आए. सभी ने एक सुर में कहा कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की नहीं, बल्कि गरीबों को उजाड़ने की कवायद है.

धरना स्थल पर माले के पूर्व विधायक महबूब आलम, विधायक संदीप सौरभ, एमएलसी शशि यादव, विधायक अरुण सिंह, दीघा से उम्मीदवार दिव्या गौतम और फुटपाथ दुकानदारों के नेता शहजादे आलम सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए.

सरकार में भाजपा का वर्चस्व, गरीबों पर बुलडोजर की राजनीति — महबूब आलम

सरकार में भाजपा का वर्चस्व, गरीबों पर बुलडोजर की राजनीति — महबूब आलम

महबूब आलम ने Bihar में चल रहे बुलडोजर अभियान को जनविरोधी बताते हुए कहा है कि,

नई सरकार बनते ही भाजपा का प्रभाव दिखने लगा है.

गृह मंत्रालय संभालते ही सम्राट चौधरी ने आम लोगों पर बुलडोजर चलवाना शुरू कर दिया है.

चुनाव भले बेईमानी से जीत लिया गया हो, लेकिन बिहार का गरीब अब पहले से ज्यादा जागरूक है.

उन्होंने राज्य सरकार से तुरंत बुलडोजर कार्रवाई रोकने और सभी जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की.

घूस लेकर वोट, अब बुलडोजर से हमला — संदीप सौरभ

माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा है कि,

चुनाव से पहले 10 हजार की घूस बांटी गई और अब गरीबों पर बुलडोजर चल रहा है.

एनडीए सरकार कॉरपोरेट और भूमाफिया के हित में काम कर रही है.

गरीबों को बेदखल कर शहर को अमीरों के हवाले किया जा रहा है.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़ाई लम्बी चलेगी और इससे पीछे नहीं हटेंगे.

नालंदा में 1970 से बसे परिवारों पर बुलडोजर: बड़ा सवाल — यह कैसा न्याय?

खेग्रामस नेता गोपाल रविदास ने उदाहरण देते हुए बताया कि नालंदा के शिवनंदन नगर में उन गरीब परिवारों के घरों को ढहा दिया गया जो
1970 के दशक से वहाँ बसे हुए थे.

उन्होंने कहा कि,
मुख्यमंत्री के गृह जिले में ऐसा अन्याय हो रहा है, तो बाकी जिलों का क्या हाल होगा?

चुनाव का अहंकार न दिखाएं, बुलडोजर पर रोक लगाएं — एमएलसी शशि यादव

एमएलसी शशि यादव ने भाजपा-जदयू गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा है कि,

चुनाव जीतकर ये अहंकार में डूब गए हैं.

महिलाओं को झांसा देकर जीता चुनाव गरीबों पर बुलडोजर चलाने का लाइसेंस नहीं है.

बिहार की जनता हर जिले में इसका विरोध तेज करेगी.

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शहरी गरीबों की रोज़ी-रोटी उजाड़ी जा रही है — दिव्या गौतम

दिव्या गौतम ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार अपने असली रंग में आ गई है.

अतिक्रमण हटाने के नाम पर पटना शहर में हर जगह शहरी गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है.

हम चुनाव भले हार गए हों, लेकिन जनता के हक़ के लिए आंदोलन जारी रहेगा.

फुटपाथ दुकानदारों का सवाल: जब सरकार पहचान पत्र व लोन देती है, तो ठेला क्यों जब्त किया जाता है?

फुटपाथ दुकानदारों के नेता शहजादे आलम ने एक महत्वपूर्ण तथ्य रखा.

नगर निगम द्वारा जारी वेंडिंग पहचान पत्र

प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मिला 10,000–50,000 तक का लोन

फिर भी दुकानदारों से जुर्माना लेकर उनका ठेला जब्त किया जा रहा है.

उन्होंने मांग उठाई,
जिन परिवारों पर बुलडोजर चला है, उन्हें पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए.

निष्कर्ष: बिहार में संघर्ष जारी रहेगा, बुलडोजर के खिलाफ आवाज़ और तेज़ होगी

आज का राज्यव्यापी प्रतिवाद यह दर्शाता है कि बिहार के दलित, गरीब, मजदूर और छोटे व्यवसायी अपनी आवाज़ दबने नहीं देंगे.
सरकार से स्पष्ट मांग है,

अंधाधुंध बुलडोजर कार्रवाई पर तुरंत रोक

पुनर्वास की ठोस व्यवस्था

रोज़ी-रोटी की सुरक्षा

वेंडिंग ज़ोन का सही क्रियान्वयन

बिहार में यह संघर्ष बुलडोजर के खिलाफ नहीं,
बल्कि अधिकार, सम्मान और जीवन-यापन की सुरक्षा के लिए है.

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