भाकपा–माले की केंद्रीय कमिटी की बैठक पटना में शुरू

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Ajit Kumar

बिहार
भाकपा–माले की केंद्रीय कमिटी की बैठक पटना में शुरू

बिहार चुनाव परिणामों पर गहन समीक्षा

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 28 नवंबर 2025 — भाकपा–माले (CPI–ML) की केंद्रीय कमिटी की तीन-दिवसीय बैठक आज पटना में श्रद्धांजलि सभा के साथ प्रारंभ हुई.यह बैठक न केवल संगठनात्मक विमर्श का महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों के व्यापक और गंभीर विश्लेषण का भी केंद्र बिंदु बनी हुई है. पार्टी ने संकेत दिया है कि इस बैठक में प्रस्तुत मूल्यांकन राज्य और देश के राजनीतिक परिदृश्य के नए संकेत दे सकता है.

श्रद्धांजलि के साथ बैठक की शुरुआत

श्रद्धांजलि के साथ बैठक की शुरुआत

बैठक की शुरुआत पार्टी के दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि देकर हुई.
केंद्रीय कंट्रोल कमिटी के चेयरमैन कॉ. राजा बहुगुणा, वरिष्ठ नेता कॉ. परेश बनर्जी, राज्य कमिटी सदस्य विशेश्वर प्रसाद यादव, कॉ. मनोज यादव, तथा लंबे समय से टाडा के झूठे मुकदमों में जेल में बंद रहे कॉ. लक्ष्मण साव को गहरी भावनात्मक श्रद्धांजलि दी गई.
इन नेताओं का पार्टी की विचारधारा, जनसंघर्ष और संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसके प्रति पूरी केंद्रीय कमिटी ने कृतज्ञता व्यक्त की.

देशभर से केंद्रीय कमिटी सदस्यों की उपस्थिति

भाकपा–माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य और वरिष्ठ नेता कॉ. स्वदेश भट्टाचार्य के नेतृत्व में यह केंद्रीय बैठक सम्पन्न हो रही है.
देश के विभिन्न राज्यों से आए केंद्रीय कमिटी सदस्यों की मौजूदगी ने बैठक को विशेष महत्व प्रदान किया है.

अध्यक्ष मंडल में शामिल प्रमुख नाम हैं.

अभिजीत मजूमदार (पश्चिम बंगाल)

मीणा तिवारी

प्रतिमा इंगहपी

इनकी उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि बैठक में संगठनात्मक रणनीति, चुनावी विश्लेषण और भविष्य की राजनीतिक दिशा पर गहन विचार-विमर्श होने वाला है.

बिहार विधानसभा चुनाव की विस्तृत समीक्षा

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु रहा हालिया बिहार विधानसभा चुनाव का विश्लेषण.
पार्टी द्वारा अब तक प्रस्तुत मूल्यांकन में तीन प्रमुख कारणों को इस हैरतअंगेज चुनाव परिणाम का आधार बताया गया है.

SIR का चुनावी प्रभाव

    पार्टी का कहना है कि SIR ने मतदाताओं पर बड़ा मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक प्रभाव डाला.
    इसके चलते सरकारी मशीनरी की छवि और लोगों की अपेक्षाओं में अप्रत्याशित बदलाव आया.
    कई क्षेत्रों में इसे अभियान की पारदर्शिता से अधिक दबाव और प्रभाव के रूप में देखा गया, जिसने मतदाताओं के रुझान को प्रभावित किया.

    नकदी हस्तांतरण और जीविका समूहों को 10,000 रुपये देने का असर

      बैठक में यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि चुनाव पूर्व महिलाओं, विशेषकर जीविका समूह से जुड़ी लाखों महिलाओं को 10,000 रुपये के नकद हस्तांतरण का बड़ा प्रभाव पड़ा.
      यह प्रत्यक्ष लाभ योजनाओं की श्रृंखला चुनावी परिणामों में निर्णायक कारक साबित हुई.

      पार्टी का आकलन है कि यह कदम एक तरह का पूर्व-चुनावी प्रभावी प्रबंधन था जिसने सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के वोट पर सीधा असर डाला.

      चुनावी अनियमितताएँ, कदाचार और पक्षपातपूर्ण भूमिका

        केंद्रीय कमिटी की रिपोर्ट में मतदान प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख है.

        व्यापक अनियमितताएँ और कदाचार

        पार्टी ने कहा कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया के दौरान व्यवस्थित स्तर पर गड़बड़ियाँ दर्ज की गईं.
        इनमें मतदाताओं को प्रभावित करना, मतदान केंद्रों पर असमान व्यवस्था, और शिकायतों पर कार्रवाई न होना शामिल हैं.

        चुनाव आयोग और मशीनरी की पक्षपातपूर्ण भूमिका

        रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठे.
        सबसे बड़ा मुद्दा था,
        1,80,000 जीविका स्वयंसेविकाओं की मतदान ड्यूटी पर असामान्य तैनाती,
        जिसे पार्टी ने हितों का टकराव बताया है.

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        महाराष्ट्र मॉडल का दोहराव?

        बैठक में यह भी कहा गया कि बिहार के चुनाव परिणामों में जो रुझान दिखा, वह महाराष्ट्र की परिपाटी का सीधा दोहराव है.
        महाराष्ट्र में भी इसी प्रकार के प्रशासनिक हस्तक्षेप, चुनावी मशीनरी के प्रभाव व प्रत्यक्ष लाभ योजनाओं ने राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया था.
        पार्टी के अनुसार बिहार में भी वही पैटर्न दिखा, जिसने एकतरफा परिणाम सुनिश्चित किए.

        भाकपा–माले की अगली रणनीति पर चर्चा जारी

        बैठक अभी दो और दिनों तक चलेगी (30 नवंबर 2025 तक).
        संगठन की योजनाओं, विपक्षी रणनीति, जन आंदोलनों के विस्तार, और सामाजिक न्याय आधारित राजनीति को मजबूत करने पर भी विस्तृत चर्चा होगी.

        भाकपा–माले का कहना है कि लोकतांत्रिक ढांचे में बढ़ते हस्तक्षेप, प्रशासनिक पक्षपात और प्रत्यक्ष-लाभ आधारित चुनावी राजनीति के खिलाफ व्यापक जन संवाद आवश्यक है.
        बैठक से यह संकेत स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में पार्टी बिहार तथा देशभर में अपने जनसंगठन और राजनीतिक हस्तक्षेप को और तेज करेगी.

        निष्कर्ष

        पटना में भाकपा–माले की केंद्रीय बैठक एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है.
        बिहार चुनाव परिणामों का कठोर विश्लेषण, चुनौतियों की पहचान, और संगठनात्मक रणनीति का पुनर्मूल्यांकन—यह बैठक आने वाले राजनीतिक संघर्षों की दिशा तय करेगी.
        साथ ही पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र की रक्षा, जनआंदोलनों का विस्तार, और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए संघर्ष जारी रहेगा.

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